मुख पृष्ठब्र.कु. अनुजकाल परिवर्तन की स्थिति शिवरात्रि

काल परिवर्तन की स्थिति शिवरात्रि

परमात्मा को कुछ विद्वान पंडित या ऋषि-मुनि, तपस्वी या कुछ अति विशिष्ट जन की मत अनुसार ये कह दिया गया कि परमात्मा को केवल वो ही प्राप्त कर सकते हैं, वो ही जान सकते हैं, जो दुनिया से वैराग्य वाला हो, जिन्होंने बहुत गहन अध्ययन किया हो, जिन्होंने बहुत कुछ समझा हो वो ही परमात्मा के नज़दीक है। क्योंकि वो बहुत विशाल भी है और एक आम आदमी की बुद्धि से परे की स्थिति भी है। तो उसको परखना, उसको जानना आसान नहीं है।

ऐसी कुछ मान्यताएं लेकर समाज बहुत दिन से चलता आ रहा है लेकिन कहा जाता है हरेक मान्यता का एक समय होता है और उस मान्यता को टूटना भी है, ज़रूरी भी है। तो ये जानकर बड़ी खुशी होती है कि परमात्मा सभी का है। उसके लिए सब बोलते भी हैं कि वो हम सबका पिता है, हम सबका रखवाला है, हम सबके भंडारे को भरपूर करने वाला है तो वो कुछ लोगों का कैसे हो सकता है? तो इस मान्यता को तोड़ते हुए परमात्मा ने सभी के सामने अपने होने का प्रमाण दिया। प्रमाण ये है कि आज किसी भी स्थान पर जायेंगे दुनिया में तो कुछ न कुछ मनुष्यों के अपने अहम काम कर रहे हैं, कुछ उनकी अपनी स्थिति काम कर रही है। कुछ आस-पास की परिस्थिति, पढ़ाई, कुछ अभिमान काम कर रहा है। तो वहाँ व्यक्ति वो महसूस नहीं कर पाता जो महसूस करना चाहता है। लेकिन जैसे ही वो परमात्मा के कार्य को देखता है जिसमें परमात्मा अपना इतना शक्तिशाली होने के बावजूद भी कार्य अपने बच्चों से कराता है और बच्चों से कराने का अर्थ है कि सबको ये कहता है मैं चाहूँ तो एक सेकण्ड में ये सारा कार्य कर दूँ लेकिन आप सबका भाग्य बनाना है मुझे। आप सबको इस स्थिति से उठाकर उस स्थिति में ले जाना है तो कार्य आपको भी करना चाहिए।

तो उस कार्य को कराने हेतु परमात्मा का आगमन इस धरती पर होता है। इस धरती पर आगमन और हम सबके परितर्वन का समय इन दोनों का जो संगम है इसी को शिवरात्रि के रूप में कह सकते हैं। क्योंकि हम सभी वैसे भी जागरूक नहीं हैं, अंधेरे में हैं। और रात्रि को अंधेरे के साथ जोड़ा जाता है। तो हमारे मन के अंधेरे को, मन के अन्दर जितनी भी दुर्भावनाएं थीं उसको सद्भावना में बदल कर समाज में एक नई ज्योत जगाने के लिए परमात्मा का अवतरण होता है।

अब रात्रि के साथ इसलिए जोड़ दिया गया क्योंकि हम सभी दिन में होते हुए भी रात में ही हैं। कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा है, सब सभी को शरीर के रूप में देखते हैं। उसी के रूप में कार्य भी करते हैं। तो परमात्मा ने सबसे बड़ा परिवर्तन किया, शरीर से निकाला हम सबको। और कहा कि ये तो पंच तत्वों से बना हुआ एक पुतला है। आप एक आत्मा हैं और इस शरीर की मालिक हैं। ऐसा कह करके उन्होंने हम सबको अपना परिचय दिया। जैसे आत्मा ज्योति बिन्दु है, वैसे मैं भी ज्योति बिन्दु हूँ। ये जागरण, ये जागृति हम सबके अन्दर लाई। इसके आते ही, हम सभी इस समाज में रहते हुए भी अपने आपको परिवर्तित महसूस करते हैं। और ये परिवर्तन क्योंकि बहुत लम्बे समय से हम सभी के अन्दर वो वाले संस्कार हैं अन्धियारे में रहने के, तो उजाला भी कई बार जैसे किसी को अंधेरे से उजाले में भी जायें तो आँखें बंद हो जाती हैं। ऐसे ही हमारी आँखें खुलने में थोड़ा टाइम लगेगा और टाइम लग रहा है लेकिन फिर भी कार्य तो चल रहा है परमात्मा का।

उसी कार्य का एक अनुपम उदाहरण ब्रह्माकुमारीज़ है। जहाँ पर परमात्मा के द्वारा रचित इस कार्य को सारी आत्माएं मिलकर कर रही हैं और ये परमात्मा ही कर सकते हैं। और इसको देखने के बाद लगता है कि नहीं परिवर्तन होने वाला है। तो क्यों न इस शिवरात्रि पर परमात्मा को और गहराई से समझें, जानें और इस कार्य में खुद को शामिल करें।

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