मुख पृष्ठलेखनवयुग क्रांति का पावन संदेश - शिवरात्रि

नवयुग क्रांति का पावन संदेश – शिवरात्रि

जिस प्रकार मानव शरीर परमाणुओं से निर्मित है, गतिशील है और परिवर्तनशील है, लेकिन कहा जाता है कि योग उससे लगाएं जो अपरिवर्तनीय है, स्थिर है। इसीलिए मनुष्य आत्माओं से योग लगाने से शक्तिशाली नहीं बन सकते। लेकिन जो अपरिवर्तनीय है, निरंतर है, वो हम सबको अपने साथ जोड़कर स्थिर बना देता, अपने जैसा प्रकाशित कर देता। उस प्रकाशमान निराकार शिव को ही याद करने से हम सभी अमूल-चूल परिवर्तित होंगे। लेकिन परमात्मा शिव और शिवरात्रि के आधार से अद्भुत दृश्य हम सबके सामने बनेगा। वो आधार ही हम सबको निराधार बना देगा।

ज़ीरो का आदि और अंत नहीं होता। लेकिन यह अमूल्य है, सम्पूर्ण है। ज़ीरो का अर्थ निरहंकारी भी है। इसमें न कुछ प्लस है और न कुछ माइनस, “बस है”। जो निरहंकारी है वही तो हम सबको निरहंकारी बनाएगा! इसी को भक्ति में निरहंकार और निराकारी शिव के रूप में भी कहते हैं। वही निराकारी शिव ब्रह्मा के मस्तक से प्रगट हो शिव शक्ति पैदा कर क्रांतिकारी परिवर्तन लाते हैं।

शिवरात्रि केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि परमात्मा शिव के अवतरण का पावन स्मृति दिवस है। यह याद दिलाता है कि जब संसार अज्ञान अंधकार और विकारों में पूरी तरह डूब जाता है, जब मनुष्य डायरेक्शन खो देता है- तभी परमात्मा निराकार शिव इस धरती पर अवतरित होते हैं। उनका आगमन किसी भौतिक शरीर से जन्म लेने जैसा नहीं बल्कि ज्ञान का प्रकाश फैलाने के लिए किसी साधारण मनुष्य तन में अवतरित होते हैं। यही कारण है कि इस दिन को शिवरात्रि कहा गया – रात्रि अर्थात् अंधकार का समय और शिव का आगमन उस अंधकार को मिटाने के लिए।

आत्मा में सुषुप्त – शक्ति को जागृत करना – परमात्मा का प्रथम कत्र्तव्य है – आत्मा की सुषुप्त शक्तियों को जगाना। मनुष्य स्वयं को देह समझने की भूल में इतना फँस गया है कि उसके मूल गुण- ज्ञान, सुख, शांति, आनंद, प्रेम, पवित्रता, शक्ति सब पीछे छूट गए। परमात्मा शिव आकर आत्मा को उसकी असली पहचान ”मैं शुद्ध, अमर, दिव्य आत्मा हूँ” का स्मरण कराते हैं। इसी जागृति से आत्म शक्ति पुन: सक्रिया होती है और जीवन परिवर्तन की क्रांति शुरू होती है।

शिव माताओं-कन्याओं को दैवी स्वरूप प्रदान करते हैं – इसी युग में माताएं-कन्याएं जिन्हें समाज ने अपमानित, तिरस्कृत और कमज़ोर समझा- परमात्मा उन्हें विशेष सम्मान और शक्ति प्रदान करते हैं। शिव उन्हें मातृशक्ति बनाते हैं, उनके अंदर छिपी दिव्यता को उभारते हैं और उन्हें देवी शक्ति रूप में स्थापित करते हैं। यही कारण है कि शिवरात्रि के चित्रों में देवी-देवता और शक्ति रूपों की पूजा की जाती है, क्योंकि उनका आधार शिव ही है।

मानव की अज्ञानता और विकारों का अंधकार – आज का मनुष्य क्रोध, लोभ, अहंकार, भय और असुरक्षा में घिरा हुआ है। वह नहीं जानता कि क्यों दु:खी है, क्यों भटक रहा है, उसके कर्म उसे कहाँ ले जा रहे हैं, और जीवन का सही मार्ग क्या है। यह अज्ञान ही रात्रि है। जिसके कारण मनुष्य ठोकरें खा रहा है। जीवन ही बोझिल सा हो गया है। ऐसे में परमात्मा शिव का अवतरण इस अंधकार को ज्ञान-प्रकाश से समाप्त करने के लिए होता है।

सुख शांति और समृद्धी का पर्व शिवरात्रि

शिवरात्रि वह पावन पर्व है जो आत्मा को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाता है। यह हमें याद दिलाता है कि सच्ची समृद्धि बाहरी वस्तुओं में नहीं, बल्कि भीतर की शुद्धता, सकारात्मक विचारों, पवित्र भावनाओं और आत्म सशक्तिकरण में है। परमपिता शिव की याद में किया गया है राजयोग, मन को गहराई से शांत कर देता है। यह शांति बाहरी वातावरण पर निर्भर नहीं होती, बल्कि आत्मा की स्थिर अवस्था से उत्पन्न होती है। शिवरात्रि पर्व से हमें सीख मिलती है कि वास्तविक प्रकाश भीतर है और वास्तविक परिवर्तन भी भीतरी है। जब आत्मा दिव्य शक्ति से जुड़ती है तो जीवन में शांति, समृद्धि और सद्भाव स्वत: प्रकट होते हैं।

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