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अलीराजपुर: ब्रह्माकुमारीज  में विश्व ध्यान दिवस मनाया गया…

 – मन को शान्त रखने के लिए ध्यान जरूरी है… ब्रह्मा कुमार नारायण भाई।

– ध्यान से स्मरण शक्ति और एकाग्रता बढ़ती है… ब्रह्माकुमारी माधुरी बहन।

– जीवन में शान्ति के लिए ध्यान जरूरी  डॉ. राजकुमार।

अलीराजपुर,मध्य प्रदेश। मन को शान्त रखने और अपने आपको व्यवस्थित रखने के लिए ध्यान बहुत ही जरूरी है। जब आप अपने आपको जानने लगते हैं और ध्यानस्थ हो जाते हैं तब एकाग्रता आती है। एकाग्रता के लिए सतत् अभ्यास चाहिए।  इसीलिए कहा गया है कि जीवन में तपस्वी और ध्यानी लोगों का सम्पर्क जरूरी है। उनके संपर्क में आने से हमारा नकारात्मक विचारधारा का परिवर्तन होकर सकारात्मक दृष्टिकोण व हमारे संस्कारों में परिवर्तन आने लगता है ।समाज व परिवार श्रेष्ठ दिशा की ओर प्रेरित होता है।

सेवा केंद्र संचालिका ब्रह्माकुमारी माधुरी दीदी ने कहा कि ध्यान का मुख्य उद्देश्य समाज में सद्भावना उत्पन्न करना है। ध्यान हमें बाहरी दुनिया से जुडऩे की बजाए अपने भीतर झांकने और आत्म विश्लेषण करने का अवसर प्रदान करता है। यह हमारी बुद्घि को तेज और स्मरण शक्ति को बढ़ाने में मदद करता है। उन्होंने राजयोग मेडिटेशन का उल्लेख करते हुए बतलाया कि इससे मन शान्त होता है और एकाग्रता बढ़ती है। यह शरीर के रक्तचाप को नियंत्रित करने, हृदय के स्वास्थ्य में सुधार करने और रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है। ध्यान से हम अपनी आन्तरिक शक्तियोंं को जागृत सकते हैं जिससे  न केवल हमारा जीवन स्वस्थ और सन्तुलित बनता हे बल्कि हम शान्तिपूर्ण, संवेदनशील और श्रेष्ठ समाज की स्थापना में योगदान दे सकते हैं।

भ्राता अखिलेश पवार वरिष्ठ अध्यापक ने कहा कि ध्यान के द्वारा हम तनावमुक्त समाज बना सकते हैं। ध्यान में हम अपने मन के विचारों को रोकने का प्रयास न करें। यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। जीवन में आगे बढऩे के लिए स्वीकार भाव बहुत जरूरी है। हम जो हैं और जैसे हैं उसे स्वीकार करें तब ही आनन्द का अनुभव कर सकेंगे। जिस प्रकार शरीर को शक्ति देने के लिए तीन बार भोजन जरूरी है उसी प्रकार मन की शान्ति के लिए दिन में कम से कम दो बार ध्यान अवश्य करें। यह आत्मा का भोजन है। इससे स्ट्रेस बाहर निकलेगा और जीवन में शान्ति खुशी एवं आनन्द की प्राप्ति होगी।

डॉक्टर राजकुमार जमरा सहायक प्राध्यापक गवर्नमेंट पीजी कॉलेज ने कहा    कि जीवन में शान्ति के लिए ध्यान जरूरी है। यह ऐसी प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति अपने मन और विचारों को नियंत्रित करता है। यह आत्मा को परमात्मा से जोड़ता है और मन को सशक्त बनाता है। आज की भागदौड़ की जिन्दगी में राजयोग मेडिटेशन एक वरदान की तरह है जो कि हमें तनाव और चिन्ता से मुक्त कर खुशहाल जीवन जीने में मदद करता  है। समाजसेवी भ्राता अरुण गहलोत ने बताया कि ध्यान से हमारे मनोविकारों के ऊपर विजय प्राप्त करने में मदद मिलती है। जीवन व परिवार में खुशी व शांति का माहौल पैदा होता है। कार्यक्रम के अंत में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष में सभी को 15 मिनट योग कराया गया। कार्यक्रम का सुचारू रूप से संचालन प्रोफेसर सीताराम गोले ने किया।

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