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अलीराजपुर : प्रजापिता ब्रह्मा बाबा सर्व धर्म पिताओं का भी पिता की 57 वीं पुण्यतिथि विश्व शांति दिवस के रूप मनाया गया

अलीराजपुर, मध्य प्रदश। प्रजापिता ब्रह्मा बाबा सर्व धर्म पिताओं का भी पिता की 57 वीं पुण्यतिथि विश्व शांति दिवस के रूप में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय दीपा की चौकी पर शांत , पवित्र वातावरण में मनाई गई ।सेवा केंद्र संचालिका ब्रह्माकुमारी माधुरी बहन ने बताया कि ब्रह्मा बाबा का जीवन सरल और उच्च कोटि का था ।उनका राजा महाराजाओं में बहुत सम्मान प्राप्त होता था । वह हीरे के एक प्रख्यात व्यवसायी थे। नारायण के भक्त थे उनकी भक्ति में बहुत रुचि थी और वह अपने प्रतिदिन के दिनचर्या में दान पुण्य को भी महत्व देते थे। 1936 में निराकार परमात्मा शिव ने उनके तन में प्रवेश किया और उस समय परमात्मा शिव ने इनको आदेश दिया कि तुमको पवित्र सतयुग की दुनिया की स्थापना के निमित्त बना है तो उनको सर्वप्रथम विनाश का साक्षात्कार हुआ इसके बाद सतयुग की दुनिया का और इसके पश्चात विष्णु चतुर्भुज का ऐसी दुनिया तुम्हें बनानी है। उन्होंने 14 वर्ष सिंध हैदराबाद में रहकर तपस्या की। तपस्या के पश्चात 1950 में भारत माउंट आबू को अपना मुख्यालय बनाया और यही से विश्व सेवा प्रारंभ की गई और आज यह संस्था विश्व शांति एकता के कार्य में निरंतर आगे बढ़ते हुए 195 देश में परमात्मा संदेश का कार्य कर रही है। इस अवसर पर जिला पुलिस अधीक्षक रघुवंश जी ने बताया कि इस धरा पर जब-जब भी धर्म की ग्लानि होती है तब ऐसी ईश्वरीय शक्ति प्रकट होती है जिससे पुनः मानव उच्च दिशा में पहुंच जाता है। आज मानव का चरित्र इतना गिर चुका है उसका कारण है आध्यात्म की कमी। प्रजापिता ब्रह्मा बाबा का जीवन शांति प्रेम शक्ति से ओत प्रोत था।वह मानव के मसीहा थे उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन मानव सेवा में समर्पित किया और भटके हुए मानव को सच्ची राह दिखाई। आज भी वह सभी के दिलों में बसे हुए हैं। इस अवसर पर इंदौर से पधारे ब्रह्मा कुमार नारायण भाई ने बताया कि ब्रह्मा बाबा को शांति दूत कहना कोई अतिश्योक्ति नहीं है। ब्रह्मा बाबा के सानिध्य में जो भी आते थे शांति प्रेम के प्रकंपन महसूस करते थे। ऐसा लगता ही नहीं था कि वह इस धरा के कोई मानव है पर ऐसा लगता था कोई अलग दुनिया से अवतरित हुई फरिश्ता जैसे लगते थे। उनके नैनों से सभी के प्रति शुभकामना दया की भावना, करुणा भावना बहती थी। सभी को आत्मिक दृष्टि से देखते थे उनकी नजर में कोई उच्च नीच नहीं होता था सभी को मात्रवत पित्रवत स्नेह देते थे। इस अवसर पर माननीय अतिथि डॉक्टर जगदीश चंद्र बैरागी प्रोफेसर ने बताया कि यहां आते ही शांति के प्रकंपन अनुभव होते हैं जैसे की सत्संग में होता है ।यहां का वातावरण दिल को छू लेने वाला है। यह ब्रह्मा बाबा की मार्गदर्शन पर चलकर यह संस्थान विश्व में शांति की स्थापना में लगी हुई है मुझे बहुत खुशी है कि भारत पुनः विश्व के लिए शांति का स्थान बनेगा। इसके लिए ब्रह्मा बाबा को मैं दिल से नमन करता हूं।माननीय अतिथि प्रोफेसर संगीता राठौर ने बताया की ब्रह्मा बाबा का जीवन त्याग तपस्या से भरपूर था उनके प्रति सेकंड चिंतन मानव कल्याण में निहित था ।वह अपनी हद की स्वार्थ भावना से उठकर विश्व कल्याण की भावना से भरपूर थे।नारी शक्ति का मान बड़ा कर भारत का गौरव उच्च किया और इसकी मिसाल है कि आज ब्रह्माकुमारी संस्थान में माताएं बहने अपने जीवन को सफल करके निर्भय शक्तिशाली जीवन का अनुभव कर रही है जहां कलयुग में इतना डर और भय फैला हुआ है ऐसे माहौल में अपने जीवन को निर्भय बनाना यह ब्रह्मा बाबा की देन है। कार्यक्रम के शुभारंभ के पहले सभी ब्रह्मा कुमार कुमारियों न और नागरिकों ने एक घंटा गहन शांति के लिए साधना की और पूरे विश्व में शांति के प्रकंपन फैलाए ।कार्यक्रम के अंत में सभी को राजयोग के माध्यम से परमात्मा अनुभूति व शांति अनुभूति कराई गई ।इसके पश्चात ब्रह्मा भोजन कराया गया। सभी ने अपने जीवन को ब्रह्मा बाबा के समान आदर्श में बनाने का संकल्प लिया।

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