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सिंगरौली: ब्रह्माकुमारीज़ तपोवन काम्प्लेक्स के रजत जयंती वर्ष का हुआ आगाज

राजयोग मेडिटेशन द्वारा प्रशासकीय उत्कृष्टता विषय पर प्रशासक सम्मेलन सम्पन्न

रजत जयंती वर्ष के शुभारंभ अवसर पर आयोजित चार दिवसीय कार्यक्रम संपन्न

सिंगरौली, मध्य प्रदेश। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की स्थानीय शाखा तपोवन काम्प्लेक्स विंध्य नगर सिंगरौली के ईश्वरीय सेवाओं के 25 वर्ष पूर्ण होने पर रजत जयंती वर्ष का शुभारंभ कार्यक्रम बड़े ही धूमधाम से आयोजित किया गया। कार्यक्रम के शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर किया गया जिसमें सभी अतिथियों ने अपने विचार रखें ब्रह्माकुमारी तपोवन कंपलेक्स की इंचार्ज ब्रह्माकुमारी शोभा दीदी ने सभी अतिथियों का मुखारविंद से एवं पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया दीदी ने आगे अपने विचार रखते हुए कहा कि मध्यप्रदेश की ऊर्जाधानी सिंगरौली में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करने वाली ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान ने पिछले 25 सालों में समाज के हर वर्ग के कल्याणार्थ विभिन्न प्रकार के आध्यात्मिक कार्यकम आयोजित किए गए जिसमें विश्व शांति सम्मेलन, 13 दिवसीय तनाव मुक्त जीवन शिविर, व्यसन मुक्ति कार्यक्रम, मन प्रबंधन कार्यक्रम, महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान, स्वच्छता अभियान, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम आदि-आदि कार्यक्रम आयोजित किए गए। रजत जयंती वर्ष के शुभारंभ अवसर पर संस्था के अंतराष्ट्रीय मुख्यालय माउंट आबू से दैवी भ्राता हरीश भाई जी, राष्ट्रीय संयोजक, प्रशासक प्रभाग, राजयोगिनी मंजु दीदी, वरिष्ठ राजयोग प्रशिक्षिका, दिल्ली से ब्रह्माकुमारी विधातरि, अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षक, प्रशासक प्रभाग, प्रदेश के विभिन्न स्थानों से पधारी वरिष्ठ बह्माकुमारी बहनें एवं भाई तथा क्षेत्रीय विधायक रामनिवास शाह जी, रिलायंस पावर प्लांट शासन के वाईस प्रेसीडेंट दैवी भ्राता जितेंद्र प्रसाद जी, ज्वालामुखी मंदिर प्रमुख पुजारी शलोकी प्रसाद मिश्र आदि की उपस्थित में सुंदर गीतों के साथ दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। माउंट आबू से पधारे वरिष्ठ राजयोगिनी प्रशिक्षिका मंजू दीदी ने वक्तव्य में कहा कि प्रशासन दो प्रकार का होता है एक बाह्य प्रशासन दूसरा आंतरिक प्रशासन अपने ऑफिस, कंपनी में बहुत अच्छे से प्रशासन चला लेते हैं सभी बहुत ठीक से चलता है लेकिन हम अपने कर्मेंद्रियां मन, बुद्धि, संस्कार हमारे अनुसार चलते हैं यह विचार करने योग्य बात है। कितना कंट्रोल है हमारा अपने ऊपर यह जानना भी जरूरी है जब तक हमारा अपने ऊपर अटेंशन नहीं तब तक हम बाहर भी प्रशासन नहीं चला सकते। हम सदा कहते हैं स्व परिवर्तन से विश्व परिवर्तन यह कभी नहीं कहते विश्व परिवर्तन से स्व परिवर्तन, हमें स्वयं को पहले बदलना होगा तभी हम सुशासन चला सकेंगे। दिल्ली से आए हुए ब्रह्माकुमारी विदातरी दीदी ने सकारात्मक सोच के बारे में बताते हुए कहा कि जिस कार्य को हमें करना चाहिए वह हम करते हैं और जिस कार्य को हमें नहीं करना चाहिए वह हम नहीं करते हैं यही सकारात्मकता है। माउंट आबू से आए हुए हरीश भाई जी ने अपने विचार रखते हुए कहा कि हमें अपने स्वमं की पहचान और परमात्मा की सच्ची पहचान होना जरूरी है तभी हमारा मन शांतचित्त हो सकता है। और हम अपने अंदर सुख, शांति, आनंद, प्रेम, पवित्रता, ज्ञान और शक्ति सातों गुणों की प्राप्ति कर सकते हैं। भाई जी ने सभी को ब्रह्माकुमारी के अंतर्राष्ट्रीय मुख्यालय माउंट आबू आने का निमंत्रण दिया। विधायक रामनिवास शाह जी ने ब्रह्माकुमारीज की भूरी-भूरी प्रशंसा की सिंगरौली नगरी में ब्रह्माकुमारी की सेवाओं के 25 साल में वेमिसाल रहे हैं यहां आकर कोई खाली हाथ नहीं जाता यह मैंने अनुभव किया है। अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखें अंत में केक काटकर रजत जयंती समारोह को धूमधाम से मनाया कार्यक्रम में बच्चों के लिए सांस्कृतिक प्रस्तुति देकर समां बांधा अधिक संख्या में भाई-बहनों ने आयोजन का लाभ लिया।

चार दिवसीय अभियान की शुभारंभ में प्रथम दिन सी.आई.एस.एफ एन टी पीसी विन्धनगर, डी ए वी स्कूल शासन में कार्यक्रम आयोजित हुआ l

सी. आई. एस. एफ  में माउंट आबू से पधारे ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी ने सकारात्मक दृष्टिकोण विषय पर अपने उद्बोधन में कहां की सैनिकों का इतिहास त्याग, सेवा और बलिदान से भरा हुआ है। आज मनुष्य संसार से तो जुड़ गया है, पर स्वयं से और परमात्मा से दूर हो गया है। राजयोग मेडिटेशन के माध्यम से न केवल मानसिक शांति प्राप्त की जा सकती है, बल्कि कई बीमारियाँ और दवाइयाँ भी पीछे छूट सकती हैं। ग्वालियर से पधारी ज्योति बहन ने सभी को राज्यों की गहन अनुभूति कराई l

दिल्ली से आए हुए ब्रह्माकुमारी बेदात्री दीदी ने कहा की वर्तमान युग में हमनें शिक्षा के माध्यम से मस्तिष्क को तो विकसित कर दिया लेकिन हृदय को भी विकसित कर सकें ऐसी शिक्षा की आवश्यकता है, जो धर्म और आध्यात्म के द्वारा ही संभव है क्योंकि इसके बिना हरेक के जीवन में अपूर्णता, रिक्तता तथा खालीपन बना ही रहता है। इसलिए जीवन में पूर्णता लाने के लिए बाहरी पढ़ाई, विज्ञान तथा प्रबंधन के साथ-साथ भीतर की यात्रा, धर्म और आध्यात्म भी अति आवश्यक है। तभी हम जीवन में आनंद का अनुभव कर सकते हैं। आगे आपने युवाओं को यथार्थ में जीने तथा रील के बजाय रियल लाइफ में जीने के लिए प्रेरित भी किया। आपने कई रचनात्मक एक्टिविटीज के माध्यम से विषय को स्पष्ट किया तथा युवाओं में एक नई ऊर्जा का संचार कर दिया। अधिक संख्या में सी आई एस एफ के जवान एवं स्कूल के बच्चों ने कार्यक्रम का लाभ लिया l

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