मुख पृष्ठराज्यगुजरातवड़ोदरा,अटलादरा: ब्रह्माकुमारीज़ में सुप्रसिद्ध प्राकृतिक भोजन एवं चिकित्सा विज्ञान विशेषज्ञ डॉ बी...

वड़ोदरा,अटलादरा: ब्रह्माकुमारीज़ में सुप्रसिद्ध प्राकृतिक भोजन एवं चिकित्सा विज्ञान विशेषज्ञ डॉ बी वी चौहान जी द्वारा कैंसर निदान सेमिनार का आयोजन किया गया

वड़ोदरा,अटलादरा, गुजरात : ब्रह्माकुमारीज़ में सुप्रसिद्ध प्राकृतिक भोजन एवं चिकित्सा विज्ञान विशेषज्ञ डॉ बी वी चौहान जी द्वारा कैंसर निदान सेमिनार का आयोजन किया गया। गुजरात एवं देश के प्रसिद्ध प्राकृतिक भोजन व चिकित्सा विशेषज्ञ एवं नवीन भोजन प्रणाली (NDS) के प्रणेता डॉ बी वी चौहान जी का अपने कार्य समिति के साथ अटलादरा सेवाकेंद्र में शुभ आगमन हुआ जिसमें प्राकृतिक जीवन शैली एवं भोजन को दिनचर्या में अपना कर कैसे शरीर को पूर्णतः निरोगी व स्वस्थ रखा जा सकता है और कैंसर जैसे असाध्य रोगों को भी समाप्त किया जा सकता है, इस विषय पर विशेष प्रकाश डाला। इस अवसर पर सरोजबेन चौहान (डॉ बी वी चौहान की धर्मपत्नी) अन्य गणमान्य अतिथियों के रूप में गुजरात योग बोर्ड के जिला कोऑर्डिनेटर – सुनील भाई पटेल, पूर्व स्टैंडिंग कमेटी प्रेसिडेंट – डॉ हितेंद्र भाई पटेल, पूर्व डीन बड़ौदा मेडिकल कॉलेज – डॉ हॉटचंदानी, गायत्री शक्तिपीठ खटंबा से – गिरीश भाई पटेल, पतंजलि गुजरात – लक्ष्मण भाई गुरुवाणी
प्रमुख रूप से पधारे।

अपने वक्तव्य में डॉ चौहान जी ने नवीन भोजन प्रणाली को स्पष्ट करते हुए कहा कि शरीर के स्वस्थ अथवा रोगी होने में हमारे भोजन की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। आज अप्राकृतिक और अनियमित भोजन शैली कई बीमारियों का कारण बन रही है इसीलिए नवीन भोजन प्रणाली के अंतर्गत विशुद्ध प्राकृतिक भोजन पद्धति को अपनाकर हम अपने शरीर में वह संतुलन प्राप्त कर सकते हैं जो हमारे निरोगी स्वस्थ जीवन का आधार बन सकता है। प्राकृतिक भोजन पद्धति में रोगों पर काम करने की वजह है रोगों के कारण का निदान करना| बिना पकाए प्राकृतिक भोजन शरीर में सहज सुपाच्य होता है और शरीर में अधिक अशुद्धि नहीं छोड़ता जिससे भोजन से शरीर को नेचुरल शक्ति मिलती है और पचाने में कम शक्ति व्यय होती है। जिससे धीरे-धीरे शरीर प्राकृतिक रूप से स्वस्थ और निरोगी बनने लगता है। कैंसर के संदर्भ में किस प्रकार पकाया हुआ असंतुलित भोजन कैंसर का कारण बन सकता है इस विषय में कई महत्वपूर्ण जानकारियां देने के अतिरिक्त डॉ चौहान ने प्राकृतिक भोजन के द्वारा उदाहरण सहित कैंसर से मुक्त होने वाले पेशेंट्स के बारे में बताया और प्राकृतिक भोजन से कैंसर निदान के सिद्धांतों को स्पष्ट किया।
डॉ हॉटचंदानी जी ने कहा कि प्राकृतिक भोजन पद्धति हमारे पांच तत्वों से बने हुए शरीर को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है जिससे हमारा तन स्वस्थ होता है पर मन के स्वास्थ्य के लिए राजयोग की आवश्यकता है क्योंकि मन की आवश्यकता अलग है। 90% बीमारियों की जड़ में मानसिक कमजोरी ही मुख्य कारण होती है। तो यदि मन शक्तिशाली हो और भोजन प्राकृतिक हो तब हम पूर्णतः स्वस्थ और निरोगी जीवन के लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं।
गायत्री शक्तिपीठ से पधारे गिरीश भाई ने कहा कि आज कुदरत की शक्ति सकारात्मक विचारों वाले लोगों का आह्वान कर रही है कि हम सब संगठित प्रयास के द्वारा “हम बदलेंगे युग बदलेगा” सिद्धांत को सिद्ध करें आज भारत विश्व गुरु बनने की दिशा में अग्रसर है इसलिए यह हमारा उत्तरदायित्व है कि हम स्वयं को एक श्रेष्ठ व्यक्तित्व के रूप में स्वीकार करें और प्रकृति का आह्वान सुनते हुए अपने सहयोग से फिर से भारत को विश्वगुरु बनाएं।

सेवाकेंद्र संचालिका बीके डॉ अरुणा बहन जी ने कहा की तन को सात्विक प्राकृतिक भोजन चाहिए और आत्मा को जीवन में खुशी चाहिए क्योंकि खुशी आत्मा का गुण है शरीर का नहीं। लेकिन आज हम यह भूल चुके हैं कि हम शरीर नहीं लेकिन शरीर को चलाने वाली एक चैतन्य शक्ति आत्मा हैं इसीलिए हम बाहर खुशी ढूंढ रहे हैं और आंतरिक खुशी को खो बैठे हैं जिससे मन कमजोर हो गया है। अब मन को पुनः शक्तिशाली बनाने के लिए आत्मा का संबंध गुणों और शक्तियों के परम स्रोत परमात्मा से जोड़ने की आवश्यकता है। ब्रह्माकुमारीज़ में आत्मा का संबंध परमात्मा से जोड़ने का अभ्यास सिखाया जाता हैं और इसी को हम राजयोग कहते हैं जिससे परमात्मा के गुण और शक्तियां हमारे संस्कारों में समाहित होने लगती हैं और मन पुनः शक्तिशाली हो जाता है। तब जीवन में खुशी और तन मन के संपूर्ण स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। इसीलिए प्राकृतिक भोजन के साथ-साथ हम आत्मा के भोजन के लिए राजयोग अवश्य सीखें और तन मन दोनों को स्वस्थ बनाएं।

RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments