हम सबके मन में यही संकल्प है कि हमें बाबा के हाथ में हाथ दे करके साथ चलना है। बाबा जैसा बनना है। हम सबने बाबा से वायदा किया है कि बाबा आपके साथ ही चलना है, तो बाबा जैसा समान बनना है। तो चेक करो कि हम बाबा जैसा कहाँ तक बना हूँ? बाबा क्या है और हम क्या हैं? बाबा से मिलन मनाते हैं तो बाबा की सूरत से, मूरत से बाबा के गुण, बाबा की शक्तियाँ सब दिखाई देती हैं। उनको देख करके हमको अपने आपको चेक करना है, जब बाबा हमारे सामने आता है तो वही दर्पण बन जाता है।
बाबा सभी बच्चों को अपने समान बनाने चाहता है। तो समान बनने की बहुत सहज युक्ति है — कोई भी कार्य करने के पहले चेक कर लो कि यह बाबा ने किया? मानो मन्सा संकल्प है तो यह हमको करने के पहले चेक करना चाहिए कि हमारे संकल्प बाबा के समान हैं! बाबा जो कहते हैं बच्चे मन्सा सेवा करो तो हम उसी प्रमाण मन्सा सेवा करते हैं? बाबा की मन्सा में हम एक-एक बच्चे के लिए बाबा के दिल में क्या है? जो कल पुरूषार्थी हैं उनके लिए भी बाबा को इतना ही ह्रश्वयार है जितना औरों से है। तो कम पुरूषाॢथयों के लिए बाबा का ह्रश्वयार भी है, रहम भी है। नम्बरवार तो सभी हैं ना, इसकी ही यादगार माला है। पुरूषार्थी तो सभी हैं लेकिन नम्बरवार तो हो ही जाते हैं, तो कुछ भी कमी है उसके ऊपर रहम आता है या दूसरा कुछ आता है जो होना नहीं चाहिए?
बाबा ने हमारी अभी दो कमज़ोरियाँ सुनाई हैं, एक बाबा ने कहा जो मैंने कहा है सेकण्ड में बिन्दी लगाओ, बिन्दी बन जाओ और बिन्दी को देखो क्योंकि आगे चल करके ऐसा समय आने वाला है जो सेकण्ड में फुलस्टॉप लगाने का अगर अभ्यास नहीं होगा तो हम उस पेपर में पास नहीं हो सकेंगे क्योंकि वह पेपर अचानक आना है। पेपर की डेट आउट नहीं होनी है, अचानक होना है। दूसरा उस समय हालतें ऐसी होंगी जो आप पुरूषार्थ करो कि सेकण्ड में पुरूषार्थ करके बिन्दी लगा दूँ, तो वह समय ही नहीं होगा। आजकल भाव-स्वभाव, पुराने संस्कार ही विघ्न डालते हैं और बाबा ने कहा कि संस्कार मिलन के रास की डेट फिक्स करो। तो उस डेट के लिए तैयार हो? अब बाबा का कहना और हमारा करना साथ-साथ होना चाहिए।





