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इंदौर,प्रेम नगर : अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर “वंदे मातरम् – स्वर्णिम भारत की नींव सशक्त महिला” कार्यक्रम का आयोजन

इंदौर ,प्रेम नगर, मध्य प्रदेश। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिला प्रभाग (आ.ई.आर.एफ.) एवं ब्रह्माकुमारीज, प्रेम नगर इंदौर द्वारा 7 मार्च 2026 को “वंदे मातरम् – स्वर्णिम भारत की नींव सशक्त महिला” विषय पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन अनुभूति भवन, 30-बी, प्रेम नगर, इंदौर में सायं 6:00 बजे से 8:30 बजे तक किया गया।

कार्यक्रम का उद्देश्य नारी शक्ति के सम्मान, सशक्तिकरण और आध्यात्मिक जागरण का संदेश समाज तक पहुँचाना था। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न क्षेत्रों से आई हुई विशिष्ट अतिथियों ने अपने प्रेरणादायी विचार व्यक्त किए।

मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि- कुमारी पल्लवी कारड़ा – चार्टर्ड अकाउंटेंट , डॉ. आराधना सलूजा बहन – MBBS, MRD, MD, DNB, डॉ. हीना सोनी नीमा बहन – विद्या भारती मध्य क्षेत्र की क्षेत्रीय सहमंत्री एवं मालवा प्रांत उपाध्यक्ष, श्रीमती चांदनी नरेश फुंदवानी – महामंत्री, भारतीय सिंधु सभा, इंदौर महिला शाखा, डॉ. राखी विश्नानी बहन – स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, बहन निकिता मूलचंदानी – आर्किटेक्ट, BCM ग्रुप, संस्थान की ओर से उपस्थित रहीं- ब्रह्माकुमारी शशी दीदी जी – प्रभारी, इंदौर प्रेम नगर यूनिट, ब्रह्माकुमारी यशवनी दीदी – प्रभारी, इंदौर बिजलपुर उपसेवा केंद्र, ब्रह्माकुमारी शारदा दीदी जी – प्रभारी, इंदौर बैराठी कॉलोनी उपसेवा केंद्र, ब्रह्माकुमारी दामिनी दीदी – प्रभारी, इंदौर सुदामा नगर उपसेवा केंद्र, ब्रह्माकुमारी रक्षा बहन – प्रभारी, इंदौर राजेंद्र नगर उपसेवा केंद्र।

सांस्कृतिक एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम
कार्यक्रम की शुरुआत मीना प्रीथयानी द्वारा प्रेरणादायी गीत “कोमल है कमजोर नहीं” से हुई। इसके पश्चात कुमारी गरिमा ने “देश मेरा रंगीला” गीत पर सुंदर नृत्य प्रस्तुति दी।
ब्रह्माकुमारी यशवनी दीदी ने शब्द सुमनों के माध्यम से सभी अतिथियों एवं मातृशक्ति का स्वागत किया। इसके पश्चात सभी अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।
अतिथियों के प्रेरणादायी विचार
डॉ. राखी विश्नानी ने कहा कि महिलाओं को अपने स्वास्थ्य, आत्मविश्वास और आत्मबल को मजबूत बनाते हुए समाज में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए। स्वस्थ और सशक्त महिला ही परिवार और समाज की आधारशिला होती है।
बहन निकिता मूलचंदानी ने कहा कि आज की महिला हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा से पहचान बना रही है। परिवार और समाज के सहयोग से महिलाएँ नए अवसरों को प्राप्त कर देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
डॉ. आराधना सलूजा ने कहा कि महिलाओं को शिक्षा, संस्कार और आत्मविश्वास के माध्यम से अपने जीवन को सशक्त बनाना चाहिए। जब महिलाएँ जागरूक होती हैं तो परिवार और समाज में सकारात्मक परिवर्तन आता है।
कुमारी पल्लवी कारड़ा ने कहा कि आज महिलाएँ शिक्षा, व्यवसाय और प्रशासन सहित हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। आत्मनिर्भर बनकर वे समाज और राष्ट्र की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
श्रीमती चांदनी फुंदवानी ने कहा कि समाज में महिलाओं को सम्मान और समान अवसर मिलना अत्यंत आवश्यक है। संस्कारित और जागरूक महिला ही परिवार को मजबूत आधार प्रदान करती है।
डॉ. हीना सोनी नीमा ने कहा कि नारी केवल परिवार की शक्ति ही नहीं बल्कि समाज की दिशा और संस्कारों की वाहक भी है। जब महिलाएँ संस्कार और शिक्षा के साथ आगे बढ़ती हैं तो राष्ट्र का भविष्य उज्ज्वल बनता है।
ब्रह्माकुमारी बहनों के विचार
ब्रह्माकुमारी शारदा दीदी ने कहा कि आज की दुनिया में बाहरी प्रगति के साथ-साथ आंतरिक शक्ति और आध्यात्मिक मूल्यों को भी अपनाना आवश्यक है। आध्यात्मिकता के माध्यम से ही सच्चा सुख और शांति प्राप्त हो सकती है।
ब्रह्माकुमारी दामिनी दीदी ने सभी को राजयोग ध्यान की अनुभूति कराते हुए बताया कि ध्यान और सकारात्मक चिंतन से जीवन में शांति, संतुलन और आत्मबल प्राप्त होता है।
अध्यक्षीय उद्बोधन
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए ब्रह्माकुमारी शशी दीदी जी ने कहा कि
नारी प्रेम, शक्ति, धैर्य और त्याग का अद्भुत स्वरूप है। वह जीवन को संस्कार देती है, परिवार को स्नेह से भरती है और समाज को नई दिशा प्रदान करती है।
उन्होंने कहा कि जब महिलाएं अपने आत्मिक स्वरूप को पहचान कर आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाती हैं, तब वे स्वयं भी सशक्त बनती हैं और समाज में भी सकारात्मक परिवर्तन लाती हैं।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर कोमल सलूजा ने मधुर गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में उपस्थित सभी मातृशक्ति एवं अतिथि बहनों का तिलक, पुष्प, माला एवं सम्मान पट्टे द्वारा स्वागत एवं सम्मान किया गया।
अंत में आयोजकों ने सभी से आह्वान किया कि वे नारी सम्मान, सशक्तिकरण और आध्यात्मिक मूल्यों के इस संदेश को समाज में आगे बढ़ाएं, ताकि एक संस्कारित और सशक्त स्वर्णिम भारत का निर्माण हो सके।

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