मुख पृष्ठराज्यमध्य प्रदेश।अलीराजपुर: दादी जी केवल एक व्यक्तित्व नहीं थी बल्कि दिव्यता, समर्पण और...

अलीराजपुर: दादी जी केवल एक व्यक्तित्व नहीं थी बल्कि दिव्यता, समर्पण और परमात्म निष्ठा की साकार प्रतिमूर्ति थी

अलीराजपुर,मध्य प्रदेश। दादी जी केवल एक व्यक्तित्व नहीं थी बल्कि दिव्यता, समर्पण और परमात्म निष्ठा की साकार प्रतिमूर्ति थी। उनके जीवन का मूल आधार दिव्यता थी। चेहरे की मुस्कान, दृष्टि की पवित्रता और वाणी की मधुरता से सजी ईश्वरीय अनुभूति होती थी ।वह बोलती कम थी परंतु उनकी उपस्थिति ही आत्माओं को शांति और शक्ति प्रदान कर देती थी। यह दिव्यता किसी बाहरी आडंबर से नहीं बल्कि निरंतर परमात्मा स्मृति और पवित्र जीवन शैली से प्रकट हुई थी। यह विचार इंदौर से पधारे जीवन जीने की कला के विशेषज्ञ ब्रह्मा कुमार नारायण भाई ने संस्था की पूर्व मुख्य प्रशासिका दादी हृदय मोहिनी जी पांचवीं पुण्यतिथि के अवसर पर  श्रद्धांजलि कार्यक्रम में नगर वासियों को संबोधित किया। इस अवसर पर बेंगलुरु से पधारे ब्रह्माकुमारी अखिलाल बहन ने बताया कि दादी अपने जीवन में सदा निश्चित रहती थी। दादी जी का हर कदम परमात्मा के भरोसा  पर आधारित था। उन्हें भविष्य की चिंता नहीं थी क्योंकि उन्हें यह निश्चय था कि जो कराने वाला है वही संभालने वाला भी है ।यह अटूट विश्वास उनके चेहरे की सदा बनी रहने वाली शांति का रहस्य था ।सेवा केंद्र संचालीका ब्रह्माकुमारी माधुरी बहन ने बताया कि दादी सदा  चिंता मुक्त रहती थी और वह एक ट्रांस मैसेंजर ही नहीं बल्कि एक जीवित उदाहरण बनी कि कैसे आत्मा स्वयं को शून्य बनाकर परमात्मा को प्रकट करती है । उनकी पुण्यतिथि के अवसर पर उनके दिव्या गुणों को अपने जीवन में धारण कर हम भी सच्चे अर्थों में बाबा के निमित्त बने यही दादी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। कार्यक्रम के अंत में सभी भाई बहनों ने दादी जी के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की और सभी को भोग वितरित किया गया।

RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments