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रीवा: विश्व कला दिवस पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित “अलौकिक स्नेह मिलन एवं कला सम्मान समारोह”

रीवा,मध्य प्रदेश। विश्व कला दिवस के पावन अवसर पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, रीवा द्वारा आयोजित “अलौकिक स्नेह मिलन एवं कला सम्मान समारोह” एक ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत प्रेरणादायक आयोजन सिद्ध हुआ।

यह कार्यक्रम ब्रह्मा कुमारीज़ भोपाल जोन की डायरेक्टर एवं कला एवं संस्कृति प्रभाग की जोनल कोऑर्डिनेटर राजयोगिनी बीके निर्मला बहन जी के निर्देशन में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता ब्रह्माकुमारीज़ रीवा की संचालिका बीके लता बहन जी ने की।

मुख्य अतिथि के रूप में राम लखन सिंह महागना (जनपद उपाध्यक्ष, रायपुर कर्चुलियान) उपस्थित रहे।

विशिष्ट अतिथियों में वरिष्ठ कवि नारायण डिगवानी, इंदिरानगर सेवाकेंद्र इंचार्ज बीके नम्रता बहन जी, प्रमोद कुमार गुप्ता (जिला अध्यक्ष, अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत), रीवा डांस महागुरू राकेश वर्मा,कवि नागेंद्र मिश्रा मणि, कवि हसरत रिवानी, कवि अवधेश श्रीवास्तव, कवि रामसुंदर द्विवेदी, सुशील खरे (कायस्थ समाज), कवि आशीष खरे, कवि अमित दुबेदी,शिक्षक सतेन्द्र जी तथा कवित्री पिंशु दुबे ने गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई।

संगीत एवं कला क्षेत्र में गायिका नम्रता शुक्ला, कामनी वर्मा, ललिता पाण्डेय, अर्पणा मिश्रा, किरण सिंह, अन्नपूर्णा सिंह, भारती सोनी, रचना गुप्ता, दिलीप ठारवानी, अखिल यादव, नितिन श्रीवास्तव, अनंत गुप्ता, सुलेखा पटेल, वंदना सिंह एवं आरती सिंह ने अपनी उत्कृष्ट प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

कार्यक्रम के सुप्रसिद्ध मंच संचालक एवं गायक नीलेश श्रीवास्तव जी ने अपने प्रभावशाली संचालन एवं मधुर गीतों से पूरे आयोजन को विशेष ऊँचाई प्रदान की।

इस भव्य कार्यक्रम में प्रस्तुत की गई आध्यात्मिक नाट्य प्रस्तुति ने यह सशक्त संदेश दिया कि यह सम्पूर्ण सृष्टि एक रंगमंच है, और इसके सर्वश्रेष्ठ निर्देशक एवं परम कलाकार निराकार परमात्मा शिव बाबा हैं। हम सभी आत्माएँ उनकी रचनाएँ हैं, जो इस विश्व रूपी मंच पर छोटे-छोटे कलाकार बनकर अपने-अपने पात्र का अभिनय कर रही हैं।

नाटक को विभिन्न प्रेरणादायक दृश्यों एवं एपिसोड्स के माध्यम से प्रस्तुत किया गया, जिनमें आत्मा, परमात्मा, सृष्टि चक्र, जीवन का वास्तविक उद्देश्य एवं सत्य का स्वरूप अत्यंत सरल एवं प्रभावशाली ढंग से समझाया गया। इसमें वर्तमान कलयुग की स्थिति तथा आने वाले दिव्य युग का सुंदर चित्रण भी किया गया। विशेष रूप से यह दर्शाया गया कि श्री लक्ष्मी एवं श्री नारायण जैसे देवी-देवता एक पवित्र एवं दिव्य संसार के निवासी हैं तथा आदि सनातन देवी-देवता धर्म की स्थापना स्वयं परमात्मा शिव द्वारा की गई है।

नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया कि सभी शक्तियों का स्रोत एकमात्र परमात्मा शिव ही हैं, और वही सम्पूर्ण सृष्टि के सच्चे रचयिता एवं निर्देशक हैं। साथ ही यह भी बताया गया कि विभिन्न धर्मों में परमात्मा को अलग-अलग नामों से पुकारा जाता है—कोई शिव, कोई अल्लाह, कोई गॉड, तो कोई एक ओंकार कहता है—परंतु सत्य एक ही है:

“सबका मालिक एक है, हम सब एक हैं, विश्व एक परिवार है।”

यह नाट्य प्रस्तुति केवल एक मंचन नहीं, बल्कि एक गहन आध्यात्मिक अनुभूति थी, जिसने दर्शकों के हृदय को गहराई से स्पर्श किया और जीवन में शांति, प्रेम, आनंद एवं सकारात्मक परिवर्तन का संचार किया।

नाट्य कलाकारों में बीके अंशिका बहन, बीके रितिका बहन, बीके नेहा बहन, बीके राखी बहन, बीके पीहू बहन, बीके बिंदु बहन, बीके सतेंद्र भाई एवं बीके सुभाष भाई ने अत्यंत सराहनीय अभिनय प्रस्तुत किया।

“फरिश्तों की सभा” दृश्य में कलाकारों ने ऐसा भावपूर्ण वातावरण निर्मित किया कि दर्शकों को परमपिता परमात्मा से साक्षात्कार का अनुभव हुआ।

विशेष आकर्षण के रूप में कार्यक्रम में उपस्थित सभी कलाकारों एवं प्रतिभागियों को परम कलाकार निराकार शिव बाबा की स्मृति में सम्मान पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।

विश्व कला दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम इस बात का जीवंत उदाहरण बना कि प्रजापिता ब्रह्माकुमारी संस्था विश्व में शांति, प्रेम और एकता का दिव्य संदेश फैलाने में निरंतर अग्रणी भूमिका निभा रही है। यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक दिव्य प्रेरणा, एक आध्यात्मिक जागरण और सम्पूर्ण विश्व को एक परिवार के रूप में देखने की दिशा में एक सार्थक प्रयास सिद्ध हुआ।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर सभी अतिथियों, कलाकारों एवं उपस्थित जनसमूह के साथ एक भव्य एवं भावनात्मक ग्रुप फोटो लिया गया, जो इस दिव्य संगम की मधुर स्मृतियों का प्रतीक बना।

साथ ही उपस्थित सभी को नशा मुक्ति का संकल्प दिलाया गया तथा जीवन को श्रेष्ठ बनाने हेतु प्रेरित किया गया। इस अवसर पर सभी को प्रेम, शांति एवं सद्भावना का दिव्य संदेश देते हुए समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का आह्वान किया गया।

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