पानीपत,हरियाणा: ज्ञान मानसरोवर रिट्रीट सेंटर के दादी चंद्रमणि यूनिवर्सल पीस ऑडिटोरियम में एक विराट संत सम्मेलन एवं साइंटिस्ट एंगिनीर्स एंड आर्चीटेक्ट्स विंग की और से पर्यावरण संरक्षण और आपदा प्रबंधन अभियान का शुभारम्भ किया गया। विराट संत सम्मेलन का विषय “सामाजिक उत्थान में साधु-संतों की भूमिका” विषय पर आयोजित विराट संत सम्मेलन एवं कैंपेन का लॉन्चिंग अत्यंत गरिमामय वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में शहर के गणमान्य नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
पर्यावरण संरक्षण और आपदा प्रबंधन अभियान एवं “सामाजिक उत्थान में साधु-संतों की भूमिका” कार्यक्रम की शोभा बड़ाने के लिए मधुबन भूमि से भ्राता मोहन सिंघल, चेयरपर्सन साइंटिस्ट इंगिनीर्स एंड आर्चीटेक्ट्स विंग, राजयोगिनी मनोरमा दीदी, अध्यक्षा धार्मिक प्रभाग , प्रयागराज से पधारे। भ्राता मुकेश शर्मा, हेड HR, एडमिनिस्ट्रेशन, इंडियन सिंथेटिक रबर प्राइवेट लिमिटेड, पानीपत रिफाइनरी से पधारें। साथ – साथ मुख्य अतिथि के रूम में जगतगुरु स्वामी सतीश आचार्य महाराज, नॉएडा, अतिथि विशेष के रूम में महामंडलेश्वर गोस्वामी सुशील महाराज, दिल्ली से एवं आचार्य महामंडलेश्वर कमल किशोर, सहारनपुर से पहुंचकर कार्यक्रम की शोभा बड़ाने के लिए पहुंचे। सभी मंचासीन एवं राजयोगिनी सरला दीदी, सर्कल इंचार्ज, पानीपत , भ्राता भूषण जी, नेशनल कोऑर्डिनेटर, SEA विंग, बी के पीयूष भाई, जोनल कोऑर्डिनेटर SEA, विंग,दिल्ली जोन, ने मिलकर प्रज्वलित कर विधिवत तरीके से इस सम्मेलन का शुभारंभ किया।
विभिन्न क्षेत्रों से पधारे संत-महात्माओं एवं विशिष्ट अतिथियों ने समाज में पर्यावरण संरक्षण और आपदा प्रबंधन अभियान, नैतिक मूल्यों की स्थापना और आध्यात्मिक जागृति की आवश्यकता पर अपने प्रेरणादायक विचार व्यक्त किए।
इस अवसर पर प्रयागराज से पधारे राजयोगिनी मनोरमा दीदी, अध्यक्षा धार्मिक प्रभाग ने कहा कि आध्यात्मिक चेतना ही विश्व शांति की सच्ची आधारशिला है। सर्व मनुष्य आत्माओं के निराकार पिता परमात्मा एक शिव है। उनके सत्य स्वरूप को पहचान कर जो उनकी याद में रहते हैं उन्हें असीम शांति व सुख की प्राप्ति होती है।
सम्मेलन में विशिष्ट अतिथि के रूप में पधारे जगतगुरु स्वामी सतीश आचार्य ने कहा कि संत समाज सदैव मानवता को धर्म, सेवा और सदाचार का मार्ग दिखाता आया है। उन्होंने नैतिक शिक्षा और आत्मसंयम को सामाजिक उत्थान का मूल बताया।
माउंट आबू से पधारे राजयोगी मोहन सिंगल, चेयरपर्सन साइंटिस्ट इंगिनीर्स एंड आर्चीटेक्ट्स विंग, ने अपने विचार व्यक्त करते हुए बताया कि आध्यात्मिक जागरूकता ही मानव जीवन को श्रेष्ठ दिशा प्रदान करती है और समाज में नैतिकता का संचार करती है।
आचार्य महामंडलेश्वर कमल किशोर जी सहारनपुर ने संतों की भूमिका को समाज में सद्भाव और नैतिकता का बहुत योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
महामंडलेश्वर गोस्वामी सुशील महाराज ने कहा कि चरित्र निर्माण ही राष्ट्र निर्माण का आधार है और इसमें संत समाज की भूमिका अत्यंत प्रेरणादायक है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता राजयोगिनी सरला दीदी ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मानव जीवन में आध्यात्मिक मूल्यों का समावेश ही स्थायी शांति और सामाजिक समरसता का आधार बन सकता है।
राजयोगी भारत भूषण ने कहा कि राजयोग ध्यान के माध्यम से व्यक्ति अपने भीतर सकारात्मक परिवर्तन लाकर परिवार और समाज के उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
बी के पियूष भाई, जोनल कोऑर्डिनेटर SEA, विंग,दिल्ली जोन, ने अभियान की जानकारी देते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण और आपदा प्रबंधन अभियान पानीपत से 19 अप्रैल से लेकर 3 मई 2026 को श्रीनगर में सम्पन होगा । यह अभियान हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़ एवं जम्मू कश्मीर के विभिन्न शहरों से होता हुआ श्रीनगर में जाकर सम्पन होगा।
अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया और ईश्वरीय सौगात भेंट की। कार्यक्रम में सभी को पर्यावरण संरक्षण के प्रति शपथ बी के शैली बहन, एग्जीक्यूटिव मेंबर, SEA, अम्बाला ने कराई।
मंच का कुशल संचालन बी के माधुरी बहन, एग्जीक्यूटिव मेंबर, SEA, भिलाई ने किया। कुमारी धरा ने स्वागत नृत्य किया। कार्यक्रम के पश्चात सभी आगंतुकों ने ब्रह्मा भोजन ग्रहण किया।











