रीवा,मध्य प्रदेश। 19 अप्रैल 2026 को UNICEF तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की संयुक्त पहल पर रीवा के प्रसिद्ध मोहन सभागार में एक अत्यंत महत्वपूर्ण संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जो वास्तव में एक सर्वधर्म सम्मेलन के रूप में विकसित हुआ। इस गरिमामय आयोजन की अध्यक्षता मध्य प्रदेश शासन के स्वास्थ्य मंत्री एवं उपमुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ला जी ने की। कार्यक्रम में यूनिसेफ के अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि विलियम हैनलन अपने प्रतिनिधिमंडल सहित विशेष रूप से उपस्थित रहे, जिससे आयोजन को वैश्विक दृष्टि और गंभीरता प्राप्त हुई।
इस संवाद का मुख्य उद्देश्य मातृ मृत्यु दर एवं शिशु मृत्यु दर जैसे संवेदनशील विषयों पर सामूहिक विचार-विमर्श करना तथा इनके प्रभावी समाधान के लिए बहुआयामी प्रयासों को एक मंच पर लाना था। शासन द्वारा विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं एवं जागरूकता अभियानों की जानकारी दी गई, वहीं ब्रह्मा कुमारीज़ विश्व विद्यालय के साथ, मुस्लिम, क्रिश्चियन, जैन, सिख, पारसी, गायत्री परिवार , निरहंकारी समाज, सहित विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों ने अपने अनुभव और सुझाव साझा किए। यह कार्यक्रम “एकता में शक्ति” का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया।
इसी क्रम में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की ओर से भी प्रभावशाली सहभागिता रही। संस्थान का प्रतिनिधित्व ब्रह्मा कुमारीज़ रीवा की संचालिका बीके लता बहन जी, बीके अंशिका (कन्या), बीके सुभाष भाई, बीके विजय देव भाई एवं बीके सतेंद्र भाई,बीके किशन भाई ने किया। संस्थान ने स्पष्ट किया कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य केवल शारीरिक चिकित्सा तक सीमित नहीं, बल्कि मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक संतुलन से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।
कार्यक्रम का सबसे विशेष और प्रेरणादायक क्षण तब आया जब उपमुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ला जी ने अपने उद्बोधन में ब्रह्माकुमारीज की सेवाओं की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि जब तक भौतिक विकास का आधार आध्यात्मिकता से नहीं जुड़ता, तब तक वह न तो सर्वांगीण होता है और न ही स्थायी।
इस अवसर पर ब्रह्माकुमारीज रीवा की ओर से बीके अंशिका बहन ने अत्यंत प्रभावशाली उद्बोधन दिया। सभा में सबसे कम आयु की होने के बावजूद उनके विचारों ने सभी को गहराई से प्रभावित किया। उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत, परमपिता सुप्रीम सर्जन निराकार शिव का अभिनंदन करते हुए की, तत्पश्चात उपमुख्यमंत्री सहित सभी उपस्थित अतिथियों का विशेषताओं सहित सम्मान किया।
जब बीके अंशिका बहन ( कन्या ) बोल रही थीं, तब पूरे सभागार में एक अलौकिक दिव्य अनुभूति का वातावरण बन गया। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वयं परमात्मा ही उनके माध्यम से संदेश दे रहे हों। उन्होंने अत्यंत सरल शब्दों में समझाया कि जैसे भोजन का प्रभाव शरीर पर पड़ता है, वैसे ही विचारों का प्रभाव मन और शरीर दोनों पर पड़ता है। गर्भवती मां के शुद्ध, सकारात्मक और संस्कारित विचार सीधे बच्चे के व्यक्तित्व को प्रभावित करते हैं।
उन्होंने महाभारत के अभिमन्यु का उदाहरण देते हुए बताया कि गर्भ में भी ज्ञान का प्रभाव पड़ता है। यदि मां जागरूक, सकारात्मक और आध्यात्मिक जीवनशैली अपनाती है—अच्छे विचार, श्रेष्ठ अध्ययन और ईश्वर स्मृति—तो यह मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी होता है।
बीके अंशिका बहन के इस गहन एवं आत्मस्पर्शी उद्बोधन को सुनकर स्वयं उपमुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ला जी भी अत्यंत प्रभावित हुए। उन्होंने अपने संबोधन में विशेष रूप से इसका उल्लेख करते हुए कहा—“ब्रह्माकुमारीज एक ऐसी संस्था है जो आत्मा का परमात्मा से मिलन कराती है, और यह वास्तव में बहुत बड़ी बात है।”
इस दौरान माननीय उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला जी ने अपने उद्बोधन में कई बार ब्रह्माकुमारी संस्था का विशेष उल्लेख करते हुए पूरी सभा का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने ‘आत्मा का परमात्मा से मिलन’ जैसे गूढ़ आध्यात्मिक विचार को सार्वजनिक रूप से व्यक्त कर यह सिद्ध कर दिया कि यह संस्था कितने उच्च और गहन स्तर पर समाज में कार्य कर रही है।
यह संवाद कार्यक्रम न केवल एक विचार-विमर्श का मंच रहा, बल्कि एक प्रेरणास्रोत भी बना, जिसमें यह स्पष्ट रूप से सामने आया कि जब शासन, अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं, सामाजिक संगठन और आध्यात्मिक संस्थाएं मिलकर कार्य करती हैं, तो समाज की जटिल समस्याओं का समाधान संभव हो जाता है। इस दिशा में ब्रह्माकुमारी संस्थान एक सशक्त सेतु के रूप में उभरकर सामने आया, जो भौतिक और आध्यात्मिक दोनों आयामों को जोड़ते हुए समाज के सर्वांगीण विकास की ओर अग्रसर है।







