सोनीपत,हरियाणा: विश्व कल्याण सरोवर में आदरणीय जगदीश भाईसाहब की पावन स्मृति में 25 वाँ दिव्य प्रेरणा दिवस पर विशेष कार्यक्रम का आयोजनब्रह्मा कुमारीज के प्रथम महासचिव आदरणीय जगदीश भाई साहब की पावन स्मृति में 25 वाँ दिव्य प्रेरणा दिवस “लेखनी का वरदान प्राप्त – अनोखा साहित्यकार” कार्यक्रम का आयोजन विश्व कल्याण सरोवर सोनीपत (दिल्ली जोन) में किया गया।

दिल्ली हरिनगर सेवाकेंद्र से पधारीं राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी आदरणीय शुक्ला दीदी जी ने कार्यक्रम की शुरुआत मुरलीधर की मुरली से किया व बीच-बीच में भाई साहब के साथ के अनेक अनुभव साझा किये।

दिल्ली शक्तिनगर सेवाकेन्द्र की आदरणीय चक्रधारी दीदी जी ने भाई साहब के साथ का अनुभव सुनाते हुए कहा कि मैं लगभग 40 वर्षों तक भाई साहब के साथ सेवा में रही। बाबा के वचन “मेरे बच्चों को मेरा संदेश जन जन तक पहुंचा दो जिससे कोई भी ईश्वरीय वरदान से वंचित न रह जाए” को सार्थक करते हुए उत्कृष्ट साहित्य की रचना की। भाई जी की आश थी कि सोनीपत की धरती से जन जन तक बाबा का संदेश पहुंचे। यह सोनीपत की धरती जगदीश भाई के संकल्पों की धरती है। बाबा उनको गणेश कहते थे, गणेश अर्थात विघ्न विनाशक तो यह धरती भी विघ्नों से मुक्त होकर सेवा का उदाहरण बनेगी। भाई जी ने ही संस्था का चार्टर और बहनों के ट्रेनिंग के लिए विशेष व्यवस्था की, विंग्स की रूपरेखा उन्हीं की देन है। भाई साहब ने हिन्दी अंग्रेजी पंजाबी में अनेक किताबें लिखी थी। दीदी जी ने बताया कि कैसे जगदीश भाई ज्ञान में आए उस पर विस्तृत प्रकाश डाला।
दिल्ली करोलबाग स्थित पांडव भवन की राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी आदरणीय पुष्पा दीदी जी ने अपने सम्बोधन में कहा कि उनसे मिलकर ऐसा लगता था कि वो जैसे हमारे रीयल भाई हैं। उनसे मिलकर कभी ऐसा नहीं लगा कि हम किसी गैर से मिल रहे हैं। वो बहनों को सदा आगे बढ़ाते थे। मुझे योग शिविर कराने की प्रेरणा भाई साहब ने ही दी।

ओआरसी की डाइरेक्टर राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी आदरणीय आशा दीदी जी ने कहा कि मुझे कानपुर से ज्ञान मिला। भाई साहब से जब मिलना हुआ तो उन्होंने पूछा कि आप बड़े होकर क्या बनोगे तो मैंने कहा कि मैं डाक्टर बनूँगी। तो भाई साहब ने कहा कि तुम रूहानी डाक्टर भी बनना। दीदी ने बताया कि बाबा कहते थे कि इस बच्चे की बुद्धि सात फुट की है। बाबा ने भाई साहब को टू व्हीलर पर बैठने और चलाने के लिए मना किया हुआ था। भाई साहब सेवा के प्रथम साथी थे। भाई साहब जब समर्पित हुए तो, मन बुद्धि से समर्पित हो गए। भाई साहब जब समर्पित हुए तो अंतिम एडीटोरियल के लिए उनकी लौकिक संस्था ने कहा तो भाई साहब ने कहा कि अब यह लेखनी प्रभु को समर्पित हो गई है अब यह प्रभु के लिए ही लिखेगी। जहाँ भी बवाल होता बाबा वहाँ भाई साहब को ही भेजते थे। भाई साहब के क्लासेज, लेक्चर्स मुझे बेहद पसंद थे। मैं कैसे भी करके उसे सुना जरूर करती थी और उससे नोट्स बना लिया करती थी।
बाबा ने उन्हें कह रखा था कि तुम्हें अपने लेख को किसी से भी अप्रूव कराने की कोई जरूरत नहीं है। संयुक्त राष्ट्र संघ में संस्था का रिप्रजेंटेशन का कार्य भी भाई साहब के बुद्धि की उपज थी। देश विदेश की बहनों की ट्रेनिंग कराने की प्रेरणा भाई साहब की ही थी। जिम्मेवारी क्या होती है अगर वो सीखना है तो भाई साहब से सीखना चाहिए। बहनों से उनका विशेष अनुराग था। सोनीपत की धरनी उन्हीं की संकल्पों की धरनी है।
विश्व कल्याण सरोवर के प्रबंधक ब्रह्माकुमार सतीश भाई ने सभी आमंत्रित विशेष अतिथियों व अन्य स्थानों आए सभी भाई बहनों का हृदय से स्वागत किया व धन्यवाद ज्ञापित किया।
ब्रह्माकुमारी रीना बहन जी ने अपने गीतों से सभा को योग की गहराइयों का अनुभव कराया।
लगभग 1700 भाई – बहनों प्रोग्राम का लाभ उठाया।
ब्रह्माकुमारी लता दीदी जी ने कुशलतापूर्वक मंच का संचालन किया।
अंत में उपस्थित सभी ब्रह्मा वत्सों को टोली व सौगात दिया गया। तथा सभी भाई बहनों ने ब्रह्माभोजन स्वीकार किया।







