रायपुर, छत्तीसगढ़। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा चौबे कालोनी में आयोजित प्रेरणा समर कैम्प में नृत्य स्पर्धा (डांस काम्पीटिशन) के अन्तर्गत स्कूली बच्चों ने शानदार प्रस्तुति देकर मन मोह लिया।
आज सभा में बच्चे नृत्य स्पर्धा में भाग लेने रंग-बिरंगे ड्रेस में सज-धजकर उपस्थित हुए थे। वह लोग अपनी वेशभूषा से लोगों को आकर्षित तो कर ही रहे थे साथ ही सभागृह की शोभा को भी बढ़ा रहे थे। विशेष बात यह रही कि डांस के स्टेप बच्चों ने खुद तैयार किए थे। नृत्य स्पर्धा के निर्णायक के रूप में ब्रह्माकुमारी रश्मि दीदी और स्नेहा दीदी उपस्थित थीं।
सबसे पहले कु. अमृता खत्री और स्वरा बेलानी ने पंजाबी गीत रंग दे बसन्ती पर पर शानदार नृत्य प्रस्तुत कर सबको ताली बजाने पर मजबूर कर दिया। उनके नृत्य की लय, ताल और उत्साह ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
उसके बाद कु. सिया साहू ने धार्मिक भजन वाह रे मेरे बाबा…गीत पर नृत्य कर खूब वाहवाही लूटी।
कु. कु. नूर फातिमा और कु. अतिफा फातिमा ने कंधों से कंधे मिलते हैं… गीत पर सधे हुए अन्दाज में नृत्य पेश किया।
कु. परीणिता साहू ने भी देशभक्ति पर आधारित गीत पर सुन्दर नृत्य प्रदर्शित कर सबको भाव विभोर कर दिया।
इसके पहले सत्र में ब्रह्माकुमारी सिमरन दीदी ने अपने प्रेरक उद्बोधन में बच्चों को रचनात्मक बनने, अच्छे संस्कार अपनाने और आत्म विकास की दिशा में आगे बढऩे के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि हमारे विचार, हमारा स्वभाव और व्यवहार हमारे संस्कारों का निर्माण करते हैं। सकारात्मक सोच और अच्छे विचारों का चयन ही हमारे उज्जवल भविष्य की नींव रखता है। गुस्सा करना, तुलना करना और आलोचना करना जैसे नकारात्मक संस्कार धीरे-धीरे हमारे व्यक्तित्व को कमजोर बना देते हैं।
ब्रह्माकुमारी सिमरन ने बतलाया कि हमारा मस्तिष्क एक लाईब्रेरी की तरह है जिसमें वही जानकारी संग्रहित होती है जो कि हम देखते, सुनते और पढ़ते हैं। वर्तमान संचार क्रान्ति के युग में हम स्वयं को डिजिटल वल्र्ड से दूर नहीं रख सकते हैं। आजकल स्कूलों में शिक्षा भी स्क्र ीन के माध्यम से दी जा रही है। इसलिए अगर हम स्क्रीन से अपने को दूर रखेंगे तो जमाने के साथ चल नहीं सकेंगे। लेकिन आज स्क्रीन टाईम मैनेजमेन्ट सीखने की आवश्यकता है। रातों को नींद नहीं आना, जल्दी नाराज हो जाना, एकाग्रता की कमी आदि सभी समस्याएं स्क्रीन में ज्यादा समय देने के कारण पैदा हो रही हैं। बच्चे अवसाद का जल्दी शिकार हो रहे हैं। उनका आत्मविश्वास कम हो रहा है।
उन्होंने स्क्रीन टाईम मैनेजमेन्ट के लिए बच्चों को खेलकूद या अन्य रूचिकर बातों में अपना समय बिताने की प्रेरणा दी। लगातार स्क्रीन में समय न देकर बीच-बीच में थोड़ा विराम देना चाहिए। जब बोरियत महसूस हो तो कुछ नया करने का प्रयास करना चाहिए। पुस्तक को अपना दोस्त बना लें। इससे नयी-नयी जानकारियाँ मिल सकेंगी।








