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कोलकाता:अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस का आयोजन

कोलकाता, पश्चिम बंगाल। भारतीय संग्रहालय, कोलकाता (Indian Museum, Kolkata) में अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस (International Museum Day) का भव्य आयोजन: अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस के अवसर पर Indian Museum में “नमामि भारतम् – Many Forms : One Truth” विशेष प्रदर्शनी का भव्य उद्घाटन किया गया। इस गरिमामय अवसर पर कला, संस्कृति, अध्यात्म और भारतीय विरासत का सुंदर संगम देखने को मिला। कार्यक्रम में “150 Years of Vande Mataram” का विशेष उत्सव भी मनाया गया, जिसके अंतर्गत देशभक्ति एवं भारतीय संस्कृति पर आधारित आकर्षक नृत्य एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी गईं। कलाकारों की प्रस्तुतियों ने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पश्चिम बंगाल विधानसभा के माननीय सदस्य श्री अरिजीत बक्शी उपस्थित थे। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि बचपन से वे इंडियन म्यूजियम आते रहे हैं और उस समय लोग इसे प्रेमपूर्वक “जादूघर” कहा करते थे। उन्होंने कहा कि इंडियन म्यूजियम केवल पुरातात्विक वस्तुओं का संग्रह नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन सभ्यता, कला और ज्ञान परंपरा का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि ऐसे संग्रहालय नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और संस्कृति से जोड़ने का कार्य करते हैं।
इस विशेष अवसर पर Brahma Kumaris, कोलकाता म्यूजियम को भी विशेष निमंत्रण दिया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ राजयोग मेडिटेशन से हुआ, जिसका अभ्यास बीके सुप्रिया बहन ने कराया। मेडिटेशन के माध्यम से उपस्थित सभी अतिथियों को कुछ क्षणों के लिए आंतरिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आत्मिक स्थिरता का अनुभव कराया गया।
कार्यक्रम में प्रो. स्वपन कुमार प्रमाणिक, वाइस-चेयरमैन, बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज़, इंडियन म्यूजियम, कोलकाता ने कहा कि संग्रहालय समाज की सांस्कृतिक चेतना को जीवित रखते हैं। यहां सुरक्षित धरोहरें केवल इतिहास नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा हैं।
डॉ. शतरूपा, एस्टीम्ड मेंबर, बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज़, इंडियन म्यूजियम, कोलकाता ने कहा कि भारतीय संस्कृति की आत्मा उसके संस्कारों और आध्यात्मिक मूल्यों में निहित है। उन्होंने कहा कि संस्कृति का निर्माण संस्कारों से होता है और जब व्यक्ति श्रेष्ठ विचारों को अपनाता है, तभी समाज और राष्ट्र सशक्त बनते हैं।
श्री आलोक कुमार घोष, एस्टीम्ड मेंबर, बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज़, इंडियन म्यूजियम, कोलकाता ने कहा कि भारतीय संग्रहालय हमारी राष्ट्रीय पहचान और गौरव का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि संग्रहालय केवल अतीत को संरक्षित नहीं करते, बल्कि वर्तमान और भविष्य को भी दिशा देते हैं।
प्रो. फल्गुनी मुखोपाध्याय, चांसलर, ब्रेनवेयर यूनिवर्सिटी ने अपने उद्बोधन में कहा कि शिक्षा और संस्कृति का संबंध अत्यंत गहरा है। यदि शिक्षा के साथ मूल्य और संस्कृति जुड़ जाएँ, तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन संभव है।
कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों ने संग्रहालयों को भारतीय संस्कृति, विरासत और मानवीय मूल्यों को जोड़ने वाला सशक्त माध्यम बताते हुए ऐसे आयोजनों की सराहना की। इस विशेष आयोजन में लगभग 400 लोगों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की और कार्यक्रम की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक प्रस्तुतियों का आनंद लिया।
कार्यक्रम से पहले बीके सुप्रिया बहन से एक विशेष संदेश भी लिया गया, जिसे सोशल मीडिया एवं फेसबुक पर साझा किया गया।  https://www.facebook.com/share/v/16xnmtNvys/

अपने संबोधन में बीके सुप्रिया बहन ने कहा —

“कोलकाता का इंडियन म्यूजियम सिर्फ भारत का सबसे पुराना म्यूजियम नहीं, बल्कि हमारी knowledge, art, history और civilization का एक जीवंत खजाना है।

और विक्टोरिया मेमोरियल केवल एक monument नहीं…
यह history, beauty और cultural legacy का एक प्रेरणा-स्थल है।

ये दोनों संस्थान हमें याद दिलाते हैं कि किसी भी समाज की असली पहचान उसकी संस्कृति होती है।

और संस्कृति बनती है संस्कारों से…और संस्कार बनते हैं संकल्पों से। इसीलिए कहा गया है —

‘संकल्प से संस्कार बनते हैं…संस्कार से संस्कृति बनती है…
और संस्कृति से सृष्टि बदल जाती है।’

बीके सुप्रिया बहन के इन प्रेरणादायी विचारों को सोशल मीडिया एवं फेसबुक पर भी साझा किया गया, जिन्हें लोगों द्वारा अत्यंत सराहा गया।

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विक्टोरिया मेमोरियल हॉल, कोलकाता में अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस समारोह: अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस के उपलक्ष्य में Victoria Memorial Hall में विशेष कार्यक्रम एवं प्रदर्शनी नमामि भारतम् – Many Forms : One Truth” का आयोजन किया गया। इस भव्य समारोह में देश-विदेश के 500 से अधिक eminent VIP guests, कलाकार, शिक्षाविद्, संस्कृति प्रेमी एवं गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

कार्यक्रम का स्वागत संबोधन डॉ. सायन भट्टाचार्य, डायरेक्टर, Indian Museum एवं क्यूरेटर, Victoria Memorial Hall द्वारा किया गया। उन्होंने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि संग्रहालय केवल ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षित करने का स्थान नहीं, बल्कि समाज को उसकी सांस्कृतिक जड़ों और राष्ट्रीय चेतना से जोड़ने वाला सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि “नमामि भारतम्” प्रदर्शनी भारत की विविधता में एकता और सांस्कृतिक समृद्धि का सुंदर उदाहरण है।

इस अवसर पर पश्चिम बंगाल विधानसभा की माननीय सदस्य श्रीमती रूपा गांगुली मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता उसकी आध्यात्मिकता, संवेदनशीलता और विविधता है। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, कला और इतिहास से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कलाकारों की प्रस्तुतियों एवं प्रदर्शनी की विशेष सराहना भी की।

इस विशेष समारोह में Brahma Kumaris, कोलकाता म्यूजियम को भी विशेष निमंत्रण दिया गया। कार्यक्रम की शुरुआत राजयोग मेडिटेशन से हुई, जिसका अभ्यास बीके सुप्रिया बहन ने कराया। 

इस अवसर पर भारतीय संग्रहालय की ट्रस्टी डॉ. शतरूपा ने कहा कि भारतीय संस्कृति की आत्मा उसके संस्कारों और मानवीय मूल्यों में बसती है। उन्होंने कहा कि संग्रहालय हमारी सभ्यता और आध्यात्मिक चेतना को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं।

फ्रांस के कॉन्सुल जनरल श्री थिएरी मोरेल ने अपने संबोधन में भारत की सांस्कृतिक विविधता और ऐतिहासिक विरासत की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत की कला, संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराएँ विश्वभर के लोगों को प्रेरित करती हैं और ऐसे आयोजन अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक संवाद को और सशक्त बनाते हैं।

 पूरे कार्यक्रम में संस्कृति और अध्यात्म का सुंदर संगम देखने को मिला, जिसने उपस्थित सभी लोगों के मन पर विशेष छाप छोड़ी

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