मुख पृष्ठदादी जीदादी जानकी जीजितना न्यारा रहेंगे उतना प्यारा रहना सहज हो जाएगा

जितना न्यारा रहेंगे उतना प्यारा रहना सहज हो जाएगा

बाबा हमारी महिमा करके हमें महिमा योग्य बना रहा है। हम अपने मुख से अपनी महिमा नहीं करेंगे, पर बाबा ऐसा योग्य योगी बना रहा है। तो ऐसे मीठे बाबा की किन शब्दों में महिमा करें, शब्द ही नहीं।
अतीन्द्रिय सुख में रहना और स्वीट साइलेंस में रहना, इसमें पहले कौन-सा? जो थोड़ा उथल-पाथल में होता है वो अतीन्द्रिय सुख में नहीं रह सकता है। कभी सुख रहता है, कभी थोड़ा दु:ख की फीलिंग में आ जाता है तो वो स्वीट साइलेंस में कैसे जा सकता है! इसके लिए बाबा कहते राजयोगी का कोई भी देहधारियों से सम्बन्ध नहीं होना चाहिए। जितना न्यारा रहेंगे उतना प्यारा रहना सहज होगा। न्यारे रहने की विधि यथार्थ है तो अपने लिए और परिवार के लिए प्यार स्वत: होगा। बाहर वाले कहते छोटा परिवार सुखी परिवार और बाबा कहते हैं जितना बड़ा परिवार उतना सुखी परिवार है। हमारे इतने बड़े परिवार का संगठन देख दुनिया वाले खुश होते हैं।
हम सब भगवान के बच्चे हैं, एक परिवार है। आपस में मिलकर रहने वाला परिवार है। हरेक स्वतंत्र है, अपने पैर पर खड़ा है इसलिए इतना बड़ा परिवार होते भी किसी पर कोई बोझा नहीं है। तो हम किसके हैं और हमारा कौन है? यह नशा हम सबको है। हम यहाँ सब धर्म, जाति, रंग, भाषा से परे रहने की, भेदभाव को मिटाने की सेवा कर रहे हैं। एक बाप की श्रीमत पर चलने से कितना हम सुधर रहे हैं, सम्पूर्ण बने नहीं हैं परन्तु सम्पूर्ण बनने के बिगर और कुछ करना ही नहीं है। समय अनुसार हम बनेंगे तो और बनेंगे। हम सुधर रहे हैं तो दुनिया भी सुधर रही है। तो हमारी तात, लात और बात यही है, सेवा भी यही है। अपनी स्थिति ऐसी बनाकर रखने की तात है, औरों को सुनाने की लात(लत-आदत) है और कोई बात है ही नहीं।
कई भाई-बहनें बाबा का नाम लेकर अपना काम उतार देते हैं क्योंकि वो अपनी बुद्धि से काम लेते हैं तो ऐसी आत्माएं बाबा से शक्ति नहीं खींच सकती हैं। अभिमान वाली बुद्धि होने के कारण बाबा की उतनी ऊंची मीठी बातें बुद्धि में ग्रहण नहीं होती। अनेक बातों में जहाँ ज़रूरत नहीं वहाँ भी अपनी बुद्धि चला लेते हैं। नेचर और किसकी, बुद्धि अपनी चला देते हैं। उस घड़ी ये नहीं समझते हैं कि यह व्यर्थ है। थोड़ा भी अन्दर व्यर्थ है तो समर्थ संकल्प रह नहीं सकता। व्यर्थ, बाबा की शक्ति से वंचित कर देता है। एक ही टाइम पढ़ाई भी हो, कमाई भी हो और दान भी करो। पढ़ाई में कमाई नहीं की, पढ़ाई का फायदा नहीं लिया। पढ़ाई पढक़े टीचर बना तो क्या बड़ी बात की? टीचर का जॉब क्या होता है? इतना ऊंचा बाबा हमको पढ़ाता और हम भी केवल टीचर ही बने तो क्या बड़ी बात की! बाबा खुश किसमें होगा? जिसको ऊंच पद पाने की धुन लगी हुई है, बाबा उनको अन्दर से बहुत प्यार करता है। टीचर भी समझता है कि होमवर्क अच्छा करता है, औरों को भी मदद करता है। कोई पढ़ाई में आगे जाता है तो उसको जेलसी नहीं होती है, खुशी होती है, हम मिल करके पढ़ रहे हैं। तो खुद पढ़ाई में होशियार बन अन्य साथियों को भी सहयोग दे उनको आप समान लायक बनाना है। हमारे अन्दर पढ़ाई की वैल्यू है तो कमाई स्वत: होती है और जिसकी कमाई अच्छी होती है वो दानी, महादानी, वरदानी बन जाता है।

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