मुख पृष्ठलेखमन की शक्ति:-स्वास्थ्य का अदृश्य उपचार

मन की शक्ति:-स्वास्थ्य का अदृश्य उपचार

मन के वायब्रेशन और शरीर की हीलिंग

आज विज्ञान और अध्यात्मदोनों इस सत्य को स्वीकार कर चुके हैं कि केवल दवाइयाँ ही हमें स्वस्थ नहीं बनातीं, बल्कि हमारी सोच, भावनाएँ और मन:स्थिति भी हमारे स्वास्थ्य को गहराई से प्रभावित करती हैं। कई बार एक ही बीमारी और एक ही इलाज होने के बावजूद दो लोगों के ठीक होने का समय अलग-अलग होता है। इसका कारण केवल शरीर नहीं, बल्कि मन की शक्ति होती है। यदि मन सकारात्मक, शान्त और आशावान हो, तो शरीर की उपचार प्रक्रिया तेज़ हो जाती है। यही कारण है कि आज पॉवर ऑफ माइंड केवल आध्यात्मिक विषय नहीं, बल्कि वैज्ञानिक शोध भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।

जब भी हम बीमार होते हैं, तो हमारा ध्यान सबसे पहले डॉक्टर, दवाइयों और खान-पान पर जाता है। नि:संदेह ये सब आवश्यक हैं, लेकिन स्वास्थ्य का एक और महत्वपूर्ण पक्ष है— हमारी मन:स्थिति। डॉक्टर और दवाइयाँ केवल आधा इलाज करती हैं, जबकि बाकी आधा उपचार हमारा मन करता है।
आज मेडिकल साइंस भी मानती है कि एक ही बीमारी और एक ही दवाई लेने वाले दो लोगों के स्वास्थ्य लाभ का समय अलग-अलग हो सकता है। इसका मुख्य कारण उनकी मानसिक स्थिति होती है। जो व्यक्ति आशावादी, शान्त और सकारात्मक रहता है, उसका शरीर जल्दी स्वस्थ होने लगता है। वहीं भय, तनाव, चिंता और नकारात्मक सोच शरीर की उपचार प्रक्रिया को धीमा कर देते हैं।
अक्सर देखा जाता है कि घर में जब कोई बीमार होता है, तो हम स्वयं भी बार-बार अपनी पीड़ा को दोहराते हैं— ”मैं बहुत दु:खी हूँ… मुझे बहुत दर्द हो रहा है…”। फिर परिवार के लोग भी चिंता और भय से भर जाते हैं। परिणामस्वरूप पूरे घर की ऊर्जा नकारात्मक हो जाती है। यह नकारात्मक ऊर्जा रोगी के शरीर पर प्रभाव डालती है और बीमारी लंबे समय तक बनी रहती है।
सच्चाई यह है कि शरीर पर मन का प्रभाव अत्यंत गहरा होता है। हमारा शरीर जड़ है, लेकिन मन ऊर्जा है। ऊर्जा का प्रभाव हमेशा पदार्थ पर पड़ता है। इसलिए यदि शरीर में दर्द हो, तब भी मन को दु:खी नहीं होने देना चाहिए। बल्कि मन की शक्ति और सकारात्मकता से शरीर को स्वस्थ करने का प्रयास करना चाहिए।
आज इंटरनेट और सोशल मीडिया के दौर में लोग दवाइयों के साइड इफेक्ट्स पढक़र पहले ही डर जाते हैं। कई बार दवा से अधिक भय नुकसान पहुँचाता है। वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि जिन लोगों को किसी दवा के संभावित दुष्प्रभावों का अत्यधिक डर होता है, उनमें वे लक्षण अधिक दिखाई देते हैं। जबकि सकारात्मक सोच रखने वाले लोगों पर वही दवा कम दुष्प्रभाव डालती है। यह मन की शक्ति का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

यदि हम प्रतिदिन यह संकल्प लें

‘यह दवा मुझे स्वस्थ कर रही है। इसका मुझ पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।’
तो धीरे-धीरे शरीर भी उसी दिशा में प्रतिक्रिया देने लगता है।

आज डॉक्टर क्रलाइफस्टाइल डिज़ीज़ञ्ज शब्द का प्रयोग करते हैं। सामान्यत: हम इसे केवल खान-पान और व्यायाम से जोड़ते हैं, लेकिन वास्तविक जीवनशैली हमारी सोच, भाषा और व्यवहार से बनती है। हमारी हर सोच एक वायब्रेशन है, जो सीधे हमारे शरीर तक पहुँचती है। यदि हम दिनभर तनाव, शिकायत, गुस्सा और दु:ख में जीते हैं, तो शरीर की ऊर्जा कमज़ोर होने लगती है।
कई बार लोग कहते हैं— ”जब रिपोट्र्स नॉर्मल हैं, फिर भी शरीर में दर्द है।” इसका कारण यह होता है कि दर्द पहले मन में जन्म लेता है। कोई अपमान, धोखा या असफलता हमें बीमार नहीं करती, बल्कि उन घटनाओं के बारे में हमारी लगातार नकारात्मक सोच हमें भीतर से कमज़ोर बनाती है।
इसलिए यदि हमें स्वस्थ और प्रसन्न रहना है, तो हमें अपनी सोच को बदलना होगा। परिस्थितियाँ हमेशा हमारे अनुसार नहीं होंगी, लोग भी हमेशा सही व्यवहार नहीं करेंगे, लेकिन हमारे मन की स्थिति का रिमोट कंट्रोल हमारे अपने हाथ में है।
जब हम दूसरों के प्रति अपनी सोच को थोड़ा सकारात्मक बनाते हैं, क्षमा और समझ विकसित करते हैं, तब उसका लाभ सबसे पहले हमें मिलता है। हमारा मन हल्का होता है, शरीर स्वस्थ होता है और घर का वातावरण भी सकारात्मक बनता है।
अंतत:, स्वस्थ जीवन का सबसे बड़ा रहस्य यही है— ”सकारात्मक संकल्प, शान्त मन और प्रेमपूर्ण दृष्टिकोण। क्योंकि सचमुच, क्रसंकल्प से सृष्टि बनती है।”

RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments