मुख पृष्ठWingsEducation Wingमेहसाणा: ‘मूल्य शिक्षा के बिना सर्वांगीण शिक्षा संभव नहीं’

मेहसाणा: ‘मूल्य शिक्षा के बिना सर्वांगीण शिक्षा संभव नहीं’

ब्रह्माकुमारीज़ मेहसाणा द्वारा प्राचार्यों एवं शिक्षकों के लिए ‘मूल्य शिक्षा’ विषय पर शैक्षणिक सेमिनार आयोजित

‘Mental and Digital Wellness’ तथा ‘मूल्य शिक्षा की चुनौतियाँ’ विषयों पर विशेषज्ञों ने किया मार्गदर्शन • जिले के 34 प्राचार्यों एवं शिक्षकों ने लिया भाग

मेहसाणा, गुजरात। वर्तमान समय में शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में संस्कार, नैतिकता, मानसिक संतुलन एवं आध्यात्मिक मूल्यों का विकास करना भी है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए ब्रह्माकुमारीज़ के राजयोग एज्यूकेशन एण्ड रीसर्च फाउण्डेशन के शिक्षा प्रभाग, मेहसाणा द्वारा गॉडली पैलेस में जिले के प्राचार्यों एवं शिक्षकों के लिए ‘मूल्य शिक्षा’ विषय पर एक शैक्षणिक सेमिनार का आयोजन किया गया। शनिवार प्रातः 10:00 बजे से 12:30 बजे तक आयोजित इस सेमिनार में ‘Mental and Digital Wellness’ तथा ‘मूल्य शिक्षा की चुनौतियाँ’ विषयों पर विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया गया।

सेमिनार के उद्घाटन सत्र में मेहसाणा जिले के एजुकेशन इंस्पेक्टर श्री विकेशभाई डामोर ने कहा कि “मूल्य शिक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों में व्यक्ति, परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति सद्भावना, सहिष्णुता, उत्तरदायित्व तथा मानवीय मूल्यों का विकास करना है।” उन्होंने ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे मूल्यनिष्ठ कार्यों की सराहना करते हुए शुभकामनाएँ दीं।

कार्यक्रम की प्रेरणास्रोत एवं आयोजक ब्रह्माकुमारीज़ मेहसाणा सबज़ोन की निदेशिका राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी सरला दीदी ने अपने आशीर्वचन में कहा, “शिक्षा वह माध्यम है जो व्यक्ति की सुषुप्त शक्तियों को जागृत कर उसे श्रेष्ठ बनाती है। आज नैतिक शिक्षा और आध्यात्मिक शिक्षा का समन्वय ही विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का आधार है।” उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज के भविष्य के निर्माता हैं और उनके माध्यम से ही मूल्यनिष्ठ भारत का निर्माण संभव है।

मेहसाणा जिला स्कूल संचालक मंडल के अध्यक्ष श्री जेठाभाई पटेल ने कहा कि कक्षा 1 से 12 तक के पाठ्यक्रम में हजारों पृष्ठों की जानकारी होने के बावजूद मूल्य शिक्षा का प्रतिशत अत्यंत कम है। उन्होंने कहा कि ब्रह्माकुमारीज़ संस्था मूल्य शिक्षा, चरित्र निर्माण तथा सामाजिक समरसता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दे रही है।

दीप प्रज्वलन के साथ सेमिनार का शुभारंभ हुआ। प्रारंभ में ब्रह्माकुमारी कुसुम बहन ने सभी अतिथियों का स्वागत किया तथा ब्रह्माकुमारी बहनों ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका सम्मान किया।

माउंट आबू से पधारी वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी अदिति बहन ने ‘Mental and Digital Wellness’ विषय पर संबोधित करते हुए कहा, “शिक्षक केवल शिक्षा नहीं देता, बल्कि अपने व्यक्तित्व और आचरण से विद्यार्थियों का भविष्य भी गढ़ता है।” उन्होंने परम शिक्षक परमपिता शिव परमात्मा के महावाक्य “Teachers create the Future through their Features” का उल्लेख करते हुए मोबाइल एवं सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग से होने वाले मानसिक दुष्प्रभावों की जानकारी दी तथा राजयोग मेडिटेशन के माध्यम से डिजिटल संतुलन एवं मानसिक शांति बनाए रखने के व्यावहारिक उपाय बताए।

अहमदाबाद स्थित विवेकानंद कॉलेज ऑफ आर्ट्स की प्राचार्या ब्रह्माकुमारी डॉ. ममता शर्मा ने ‘मूल्य शिक्षा की चुनौतियाँ’ विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि मूल्य शिक्षा के मार्ग में आंतरिक, बाह्य, सांस्कृतिक, सामाजिक, धार्मिक, बौद्धिक तथा व्यक्तिगत—इन सात प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने इन सभी चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करते हुए बताया कि प्रेम, संवाद, आदर्श आचरण तथा आध्यात्मिक दृष्टिकोण के माध्यम से विद्यार्थियों में जीवन-मूल्यों का प्रभावी विकास किया जा सकता है।

कार्यक्रम के समापन पर मेहसाणा जिले से उपस्थित 34 प्राचार्यों एवं शिक्षकों को राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी सरला दीदी द्वारा प्रभु प्रसाद तथा ब्रह्माकुमारी अदिति बहन द्वारा ब्लेसिंग कार्ड प्रदान किए गए।

सेमिनार ने शिक्षा में मूल्य, आध्यात्मिकता, मानसिक स्वास्थ्य एवं डिजिटल अनुशासन के महत्व को रेखांकित करते हुए उपस्थित शिक्षकों को नई दिशा, प्रेरणा और सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान किया।

RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments