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हरिद्वार : दिव्य संत सम्मेलन में वर्तमान समय की चुनौतियो का हुआ आध्यात्मिक समाधान

दिव्य संत सम्मेलन में वर्तमान समय की चुनौतियो काआध्यात्मिक समाधान कार्यक्रम का दीप प्रजव्लित कर उद्घाटन करते हुए सन्त गण

हरिद्वार,उत्तराखंड: ब्रह्माकुमारीज धार्मिक प्रभाग की अध्यक्षा रही राजयोगिनी प्रेमलता बहन जी के 9 वें पुण्य स्मृति दिवस को हरिद्वार में दिव्य संत सम्मेलन के रूप में मनाया गया।सम्मेलन में बड़ी संख्या में पहुंचे संत-महात्मा प्रेम बहन जी को याद कर भावुक हो गए।

इस दिव्य संत सम्मेलन में ‘वर्तमान समय की चुनौतियो का आध्यात्मिक समाधान ‘विषय पर साधु-संतों ने खुलकर अपने विचार रखे।– वर्तमान समय की चुनौतियो का हुआ आध्यात्मिक समाधान!

श्री श्री 1008 आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी जागृत चेतना गिरी जी महाराज,महामंडलेश्वर स्वामी संतोषानन्द जी महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी प्रणव चैतन्य जी महाराज, 1008 महन्त कृष्णागिरी जी महाराज,महामंडलेश्वर स्वामी अखलानंद अक्रिय जी महाराज महामंडलेश्वर स्वामी राममुनी जी महाराज ,महामंडलेश्वर स्वामी स्वतंत्रता नन्द सरस्वती जी महाराज ,स्वामी योगराज आशुतोष जी महाराज ,स्वामी रवि प्रपन्नाचार्य शास्त्री जी महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी रामायणी जी महाराज , बी के शारदा दीदी , बी के मन्जू, बी के सुशील, महामंडलेश्वर स्वामी आनन्दचेतन सरस्वती जी महाराज , स्वामी श्री दिनेश फलाहारी बाबा जी,आचार्य सन्त रविदेव शास्त्री जी महाराज ने दीप प्रजव्लित कर वर्तमान समय की चुनौतियो का आध्यात्मिक समाधान कार्यक्रम का उद्घाटन किया

इस अवसर पर बोलते हुए श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर साध्वी मैत्रेयी जी महाराज ने कहा कि हम बदलेंगे जग बदलेगा,हम सुधरेंगे जग सुधरेगा इसी मूल मंत्र की आज आवश्यकता है।उन्होंने मोबाइल को आज की सबसे बड़ी बीमारी बताया व कहा कि ब्रह्माकुमारीज का अपने सम्मेलन में साधु संतों को बुलाना एक सुखद संकेत है।स्वामी अकमानन्द महाराज ने प्रेम दीदी की याद में राम नाम जाप कराया और ब्रह्माकुमारीज को विश्व कल्याण की संस्था बताया।

महामंडलेश्वर योगी कर्णपाल गिरी महाराज ने कहा कि सभी को अपने बच्चों को ब्रह्माकुमारीज की राजयोग कक्षाओं में भेजना चाहिए,ताकि आध्यात्म के साथ जीवन जीने की कला सीखी जा सके। रुड़की से आये शंकर मठ आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी दिनेशानंद भारती ने कहा कि संत ही वास्तव में दिशा है,जिनका दायित्व सत्य की ओर समाज को ले जाना है।उन्होंने ब्रह्माकुमारीज को चरित्र निर्माण की फैक्ट्री बताया। ब्रह्माकुमारीज नारी प्रधान संस्था है,जो भगवान शिव की नारी सम्मान सोच का प्रतीक है।

स्वामी हरिहरानंद जी महाराज ने ब्रह्माकुमारीज द्वारा संतो की मौजूदगी में की गई हरिचर्चा को सुखद बताया।उन्होंने स्वामी श्यामसुंदर दास द्वारा अपने जीवन काल मे संतो को ब्रह्माकुमारीज से जोड़ने के अभियान का भावपूर्ण स्मरण किया,साथ ही प्रेम बहन की संत सेवाओ को अनुकरणीय बताया। संत रवि देव शास्त्री ने दिव्य संत सम्मेलन को स्वेत क्रांति की संज्ञा दी।

सहारनपुर से आए आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कमल किशोर जी ने कहा कि आध्यात्म का अर्थ ही प्रेम है,ब्रह्माकुमारीज दादियों व बहनों ने सभी को प्रेम का संदेश दिया।उन्होंने कहा कि उन्हें क्रोध आता था,हमने ब्रह्माकुमारीज जाकर अपने क्रोध का दान कर दिया।

शिव योगी तरुण तपस्वी श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर स्वामी यमुना पुरी जी महाराज ने कहा कि प्रेम बहन का हरिद्वार के सभी महात्माओं से विशेष स्नेह था।उन्होंने महात्माओं को ज्ञान की चेतना का केंद्र बताया।ब्रह्माकुमारीज नारी प्रधान संस्था है,जो भगवान शिव की नारी सम्मान सोच का प्रतीक है।

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प्रेम बहन जी के 9 वें स्मृति दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित दिव्य संत सम्मेलन कार्यक्रम में मंचासीन (L-R) प्रथम पंक्ति -शंकर मठ आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी दिनेशानंद भारती,आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कमल किशोर जी,महामंडलेश्वर स्वामी अखलानंद अक्रिय जी, महामंडलेश्वर स्वामी स्वतंत्रता नन्द सरस्वती जी महाराज,महामंडलेश्वर स्वामी संतोष भारती जी महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी आनन्द चेतन जी जी महाराज, बी के शारदा दीदी जी,श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर साध्वी मैत्रेयी जी महाराज,श्री श्री 1008 आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी जागृत चेतना गिरी जी महाराज, साध्वी कमलेश्वरी जी, बी के मन्जू , स्वामी हरिहरानंद जी महाराज, बी के सुशील

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