सोच का फर्क…

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एक बार एक लड़का एक खिलौने बेचने वाले के पास खड़ा था। उसी वक्त वहाँ से एक कार आकर रूकती है। उस कार में से एक आदमी निकलता है। वो आदमी देखता है कि वो खिलौने बेचने वाला निराश था और उसे लगता है कि उसको खिलौने खरीदने चाहिए। वो आदमी खिलौने खरीदता है और वापिस अपनी कार में बैठ जाता है।
कार में बैठने के बाद उसे वो लड़का दिखाई देता है जो खिलौने बेचने वाले के पास खड़ा था। वो आदमी देखता है कि वो लड़का उसकी कार की ओर गौर से देख रहा था।
वो आदमी कार से बाहर निकलता है और फिर उस लड़के को पूछता है कि क्या तुम इस कार में बैठना पसंद करोगे? वो लड़का जल्दी से हाँ बोलता है और फिर कार में बैठ जाता है।
कार में बैठने के बाद वो आदमी उस लड़के से पूछता है कि क्या तुम्हें मेरी कार बहुत पसंद आयी? लड़का बोलता है हाँ। फिर वो आदमी उस लड़के से पूछता है कि क्या तुम मेरे साथ इस कार में आगे तक चलोगे? वो लड़का कहता है, जी ज़रूर।
वो दोनों कार में साथ जा रहे थे तभी उस आदमी ने उस लड़के को कहा कि मुझे ये कार मेरे बड़े भाई ने गिफ्ट की थी। वो लड़का मुस्कुराता है।
अब वो आदमी उस लड़के को कहता है कि मुझे पता है कि तुम इस वक्त क्या सोच रहे हो। वो लड़का कहता है बताइये मैं क्या सोच रहा हूँ? वो आदमी कहता है कि तुम यही सोच रहे हो कि काश मेरा भी कोई बड़ा भाई ऐसा अमीर होता तो अच्छा होता।
तभी वो लड़का कहता है कि गलत, मैं वैसा नहीं सोच रहा हूँ। वो आदमी उसे पूछता है तो फिर तुम इस वक्त क्या सोच रहे हो? वो लड़का बोलता है कि मैं ये सोच रहा हूँ कि काश मैं एक अमीर आदमी होता जो अपने छोटे भाई को कार गिफ्ट करता। ये बात सुनकर वो आदमी सुन्न हो जाता है।

शिक्षा : इससे ये सीख मिलती है कि हमें हमेशा बड़ा ही सोचना चाहिए।

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