HomeWingsReligious Wingहाथरस : प्रसिद्ध मेला श्री दाऊजी महाराज में हुआ सर्वश्री धर्म सम्मेलन

हाथरस : प्रसिद्ध मेला श्री दाऊजी महाराज में हुआ सर्वश्री धर्म सम्मेलन

4 महामण्डलेश्वरों सहित तमाम विद्वानों ,ब्रह्माकुमारी बहनों ने की सहभागिता
वक्ताओं धर्म, ध्यान धारणा पर एवं गौ रक्षा पर दिया जोर
धर्म केवल शरीर पर चंदन लगाने से नहीं हो जाता .. महामण्डलेश्वर स्वामी पूर्णानन्द गिरि

हाथरस, उत्तर प्रदेश। श्रीकृष्ण की बाललीलाभूमि ब्रज क्षेत्र की देहरी कहे जाने वाले में श्रीकृष्ण के बड़े भाई श्री दाऊजी महाराज के जन्मोत्सव पर आयोजित प्रसिद्ध लक्खीमेले में सर्वश्री धर्म सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें महामण्डलेश्वर स्वामी रूपेन्द्र प्रकाश, महामंडलेश्वर स्वामी पूर्णानन्द गिरि, महामण्डलेश्वर स्वामी देवस्वरूपानन्द सरस्वती, महामण्डलेश्वर स्वामी राधा प्रसाद जूदेव सहित कर्णि ब्रह्मानन्द बालयोगी, कल्पतरू पीठाधीश्वर बलरामाचार्य, कल्पतरूपीठाधीश्वर बलरामचार्या, फलाहारी दिनेश महाराज, साध्वी राधानन्द, केशवदास, अम्रतांशु महाराज, हरिदास अंकित कृष्ण महाराज, साध्वी श्यामागोपाल सहित तमाम दिग्गज धर्माचार्यों तथा विधायक अंजुला माहौर, जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा उपाध्याय, ब्लॉक प्रमुख रामेश्वर उपाध्याय की उपस्थिति में ब्रह्माकुमारी बहनों ने प्रथम पंक्ति में अपनी उपस्थिति का अहसास कराया।
ठाकुर राधाबल्लभ सेवा समिति के अध्यक्ष एवं कार्यक्रम संयोजक एवं भागवत आचार्य पंडित गणेश चन्द्र वशिष्ठ, सहसंयोजक भगवताचार्य मनोज द्विवेदी, भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं समाजसेवी पंडित दिनेश शर्मा, वेदभगवान सनातन धर्म सभा के अध्यक्ष पंडित जितेन्द्र स्वरूप शर्मा फौजी, समाजसेवी मुकेश दीक्षित के अलावा अनेकों विद्वान एवं राजनेता उपस्थित थे।

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के अलीगढ़ रोड स्थित शान्ति भवन, आनन्दपुरी केन्द्र की राजयोग शिक्षिका बी.के. शान्ता बहन , बी.के. श्वेता बहन, बी.के. गजेन्द्र भाई, बी.के. दिनेश भाई ने ब्रह्माकुमारीज संगठन की ओर से सहभागिता की।

बी.के. शान्ता बहन ने सभी आगन्तुक विद्वानों को ईश्वरीय साहित्य एवं छविचित्र सौगात में देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर वक्ताओं द्वारा सनातन धर्म संस्कृति धर्म, ध्यान और धारणा के विशेष बिन्दुओं पर प्रकाश डाला।

महामण्डलेश्वर स्वामी पूर्णानन्द गिरि महाराज ने कहा कि धर्म केवल माथे और सारे शरीर पर चंदन, भष्म लगाने का नाम नहीं है। धर्म की धारणा करना ही धर्म है। धर्म और धर्माचार्यों को हर हालत में अपने आचरण की शुद्धि कायम रखनी ही चाहिए तभी समाज और राष्ट्र में धर्म के प्रति विश्वास बढ़ेगा। भागवताचार्य पंडित गणेश वशिष्ठ ने कहा कि चरण भले गंदे हों लेकिन चरित्र गंदा नहीं होना चाहिए। सम्मेलन के सभी आगन्तुक विद्वानों को स्मृति चिन्ह, पीतवस्त्र, पुष्पाहार पहनाकर सम्मानित किया गया।

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