मानसरोवर में चार दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन एवं राजयोग शिविर में देशभर से जुटे करीब 2,000 समाजसेवियों ने लिया सेवा, सद्भाव और आध्यात्मिक मूल्यों को जीवन में उतारने का संकल्प
सम्मेलन के प्रमुख संदेश
• सेवा ही मानवता का सच्चा धर्म — श्री प्रदीप बत्रा
• भारतीय संस्कारों और बुजुर्गों के सम्मान को बढ़ावा देने की आवश्यकता — श्री रणधीर पनिहार
• आंतरिक एवं आध्यात्मिक शक्ति से बुराइयों पर विजय — राजयोगिनी संतोष दीदी
• भारतीय संस्कृति और श्रेष्ठ संस्कार विश्व में भारत की पहचान — राजयोगी बी.के. करुणा भाई
• राजयोग, मनसा सेवा और सकारात्मक विचारों से विश्व परिवर्तन की दिशा में कदम
आबू रोड (मानसरोवर),राजस्थान। ब्रह्माकुमारीज़ के समाज सेवा प्रभाग (RERF) द्वारा मानसरोवर परिसर में आयोजित चार दिवसीय “आध्यात्मिक जागृति से विश्व परिवर्तन” विषयक राष्ट्रीय सम्मेलन एवं राजयोग शिविर का आध्यात्मिक ऊर्जा, सकारात्मक चिंतन और समाज सेवा के संकल्प के साथ सफलतापूर्वक समापन हुआ। देश के विभिन्न राज्यों से आए लगभग 2,000 समाजसेवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं सेवाधारियों ने सम्मेलन में भाग लेकर मानवीय मूल्यों, आध्यात्मिक सशक्तिकरण, सेवा, सद्भाव, युवा जागृति और बुजुर्गों के सम्मान जैसे विषयों पर गहन मंथन किया।

सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर उत्तराखंड सरकार के परिवहन एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री प्रदीप बत्रा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके साथ हरियाणा के नलवा विधानसभा क्षेत्र के विधायक श्री रणधीर पनिहार विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। ब्रह्माकुमारीज़ की संयुक्त मुख्य प्रशासिका एवं समाज सेवा प्रभाग की अध्यक्ष राजयोगिनी संतोष दीदी जी, महासचिव राजयोगी बी.के. करुणा भाई, राष्ट्रीय समन्वयक राजयोगी बी.के. अवतार भाई, उपाध्यक्ष बी.के. प्रेम भाई सहित समाज सेवा प्रभाग के वरिष्ठ पदाधिकारी एवं देशभर से आए समाजसेवी उपस्थित रहे।
“लोगों की सेवा करना ही मानवता का सच्चा धर्म” : प्रदीप बत्रा
सम्मेलन के मुख्य अतिथि उत्तराखंड सरकार के परिवहन एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री प्रदीप बत्रा ने समाज सेवा को मानवता का सबसे बड़ा धर्म बताते हुए कहा कि दुखी व्यक्ति को सुख मिले, भूखे को भोजन मिले और जरूरतमंद को समय पर सहायता मिले—यही सच्ची सेवा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समाज में भाईचारा और सहयोग की भावना को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने ब्रह्माकुमारीज़ के समाज सेवा प्रभाग द्वारा किए जा रहे सेवा कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि सेवा के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का यह प्रयास अत्यंत महत्वपूर्ण है।
श्री बत्रा ने जीवन की सफलता के लिए पांच ‘D’—Duty (कर्तव्य), Discipline (अनुशासन), Devotion (समर्पण) और Discrimination (सद्-विवेक) जैसे मूल्यों को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि केवल भौतिक एवं तकनीकी विकास से ही विकसित भारत का निर्माण नहीं होगा। इसके लिए तकनीकी प्रगति के साथ मानवीय संवेदनाओं, आध्यात्मिक मूल्यों और नैतिकता का विकास भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आने वाला समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक तकनीक का है, लेकिन यदि तकनीकी विकास के साथ मानवता और आध्यात्मिक मूल्यों का जुड़ाव नहीं होगा तो विकास अधूरा रहेगा।

“भारतीय संस्कारों को मजबूत करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता” : रणधीर पनिहार
सम्मेलन के विशिष्ट अतिथि हरियाणा के नलवा विधानसभा क्षेत्र के विधायक श्री रणधीर पनिहार ने भारतीय संस्कृति एवं संस्कारों की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पश्चिमी सभ्यता के बढ़ते प्रभाव के बीच युवाओं में भारतीय संस्कारों को मजबूत करना और बुजुर्गों के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
उन्होंने कहा कि समाज को सही दिशा देने में आध्यात्मिक संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। युवाओं में अच्छे संस्कार और बुजुर्गों के प्रति सम्मान की भावना विकसित करने के लिए ऐसे प्रयास निरंतर होने चाहिए। उन्होंने ब्रह्माकुमारीज़ संस्था की कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि प्रातःकाल से ही आध्यात्मिक जीवन की शुरुआत कराने वाली यह संस्कृति भारत की प्राचीन आध्यात्मिक परंपरा की जीवंत झलक प्रस्तुत करती है।
“आध्यात्मिक जागृति से ही विश्व परिवर्तन संभव” : राजयोगिनी मोहिनी दीदी जी
संस्थान की मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी मोहिनी दीदी जी ने वीडियो संदेश के माध्यम से सम्मेलन में अपना आशीर्वचन देते हुए सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि आज के समय में विश्व को बाहरी साधनों के साथ-साथ आंतरिक शक्ति, शांति और आध्यात्मिक जागृति की आवश्यकता है। राजयोग के अभ्यास से व्यक्ति अपने मन को सकारात्मक दिशा देकर स्वयं में परिवर्तन ला सकता है और यही परिवर्तन परिवार, समाज तथा विश्व में शांति और सद्भाव का आधार बनता है। उन्होंने समाज सेवा प्रभाग द्वारा आयोजित इस राष्ट्रीय सम्मेलन की सराहना करते हुए सभी समाजसेवियों को निस्वार्थ सेवा, मानवीय मूल्यों और आध्यात्मिक जागृति के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रेरित किया तथा सम्मेलन की सफलता के लिए अपना आशीर्वाद एवं शुभकामनाएं प्रदान कीं।
“आंतरिक शक्ति से ही बुराइयों पर विजय संभव” : संतोष दीदी
ब्रह्माकुमारीज़ की संयुक्त मुख्य प्रशासिका एवं समाज सेवा प्रभाग की अध्यक्ष राजयोगिनी संतोष दीदी जी ने कहा कि आज मनुष्य के पास जानकारी बहुत है, लेकिन स्वयं की वास्तविक पहचान का ज्ञान कम है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपनी बुरी आदतों और कमजोरियों को छोड़ने के लिए केवल शारीरिक शक्ति की नहीं, बल्कि आंतरिक एवं आध्यात्मिक शक्ति की आवश्यकता होती है। उन्होंने राजयोग को आत्मिक शक्ति जागृत करने का प्रभावी माध्यम बताते हुए कहा कि निरंतर राजयोग अभ्यास से व्यक्ति अपने भीतर सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है। जब व्यक्ति के विचार और संस्कार बदलते हैं, तभी परिवार, समाज और विश्व में परिवर्तन की शुरुआत होती है।

“भारतीय संस्कृति और श्रेष्ठ संस्कार विश्व में भारत की पहचान” : करुणा भाई
ब्रह्माकुमारीज़ के महासचिव राजयोगी बी.के. करुणा भाई ने भारतीय संस्कृति एवं श्रेष्ठ संस्कारों को भारत की विशेष पहचान बताते हुए कहा कि भारत की आध्यात्मिक परंपरा पूरे विश्व को शांति और मानवीय मूल्यों का संदेश देने में सक्षम है। उन्होंने जीवन में संस्कारों को व्यवहार से जोड़ने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि आध्यात्मिकता केवल विचारों तक सीमित न रहे, बल्कि हमारे दैनिक जीवन और व्यवहार में दिखाई देनी चाहिए। उन्होंने युवाओं में भारतीय संस्कारों के विकास तथा समाज में सकारात्मक वातावरण निर्माण की आवश्यकता पर भी जोर दिया।





विशेष वक्ताओं ने साझा किए अनुभव और प्रेरक विचार
इस अवसर पर विभिन्न सत्रों में विशेष वक्ताओं एवं समाज सेवा प्रभाग के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने अपने अनुभव, प्रेरक विचार एवं आध्यात्मिक दृष्टिकोण साझा किए। इनमें प्रो. ई. वी. गिरीश भाई, मुंबई, अतिरिक्त राष्ट्रीय संयोजक, समाज सेवा प्रभाग; बी.के. दीपा बहन, मुंबई, अंतर्राष्ट्रीय प्रेरक वक्ता; बी.के. सीता बहन, जोनल कोऑर्डिनेटर, समाज सेवा प्रभाग, महाराष्ट्र; बी.के. सरिता बहन, क्षेत्रीय संयोजक, समाज सेवा प्रभाग, हरी नगर दिल्ली; बी.के. पूनम बहन, क्षेत्रीय संयोजिका, समाज सेवा प्रभाग, चंडीगढ़; बी.के. आशा बहन, दिल्ली, जोनल संयोजक, समाज सेवा प्रभाग, दिल्ली; बी.के. बीरेंद्र भाई, मुख्यालय संयोजक, समाज सेवा प्रभाग; बी.के. विजयलक्ष्मी बहन, अतिरिक्त जोनल संयोजक, समाज सेवा प्रभाग, राजस्थान, बी.के. विजया बहन, वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका एवं सबजोन इंचार्ज, गुलबर्गा; बी.के. डॉ. सचिन भाई, परामर्शदाता एवं चिकित्सक, ग्लोबल अस्पताल, माउंट आबू; तथा बी.के. डॉ. सविता बहन, नेशनल कोऑर्डिनेटर, महिला विंग सहित अनेक वरिष्ठ भाई-बहनों ने विभिन्न विषयों पर मार्गदर्शन दिया।
आध्यात्मिक जागृति को बनाया सामाजिक परिवर्तन का आधार
सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में यह संदेश प्रमुखता से सामने आया कि समाज में स्थायी परिवर्तन केवल बाहरी व्यवस्थाओं से नहीं, बल्कि व्यक्ति के विचारों, संस्कारों और चेतना में परिवर्तन से संभव है। राजयोग को आंतरिक शक्ति, मानसिक संतुलन और सकारात्मक जीवनशैली का माध्यम बताते हुए प्रतिभागियों को नियमित आध्यात्मिक अभ्यास के लिए प्रेरित किया गया।
“जागरूकता – विचार बदलें, दिशा बदलें”, “परिवर्तन – आंतरिक परिवर्तन, बाह्य प्रभाव”, “भावनात्मक संतुलन – संतुलित मन, बेहतर जीवन”, “सामंजस्य – सद्भाव से समरसता की ओर”, “संस्कारों से सामर्थ्य – संस्कारित युवा, सशक्त समाज”, “करुणामय कर्म”, “एकता – एकजुट समाज, सशक्त राष्ट्र” तथा “मनसा सेवा – श्रेष्ठ विचारों से विश्व की सेवा” जैसे विषयों पर आयोजित विभिन्न सत्रों में प्रतिभागियों ने जीवन में सकारात्मक विचारों, आत्मिक शक्ति, श्रेष्ठ संस्कारों, भावनात्मक संतुलन, करुणा, सेवा भावना और युवा शक्ति के माध्यम से समाज एवं राष्ट्र में सकारात्मक परिवर्तन लाने पर गहन चिंतन किया।
सामूहिक राजयोग मेडिटेशन से शांति और एकाग्रता का अनुभव
सम्मेलन में सामूहिक राजयोग अभ्यास के विशेष सत्र आयोजित किए गए। बड़ी संख्या में प्रतिभागियों ने सामूहिक ध्यान के माध्यम से आंतरिक शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव किया। कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों से आए वरिष्ठ राजयोग शिक्षकों एवं समाज सेवा प्रभाग के पदाधिकारियों ने प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया।
युवाओं के सशक्तिकरण और मानवीय मूल्यों पर जोर
“संस्कारों से सामर्थ्य – युवा सशक्तिकरण” विषयक Empowerment Session में युवाओं के चरित्र निर्माण, संस्कारों और सकारात्मक सोच को राष्ट्र निर्माण से जोड़ते हुए विचार रखे गए। सम्मेलन में यह भी रेखांकित किया गया कि आधुनिक तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में मानवीय संवेदनाओं, नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक चेतना को मजबूत करना आवश्यक है।
सेवा को बनाया जीवन का आधार
सम्मेलन के दौरान समाज सेवा को केवल किसी विशेष अवसर का कार्य न मानकर जीवन जीने की संस्कृति के रूप में अपनाने का आह्वान किया गया। प्रतिभागियों ने जरूरतमंदों की सहायता, समाज में सद्भाव बढ़ाने, बुजुर्गों के सम्मान एवं देखभाल तथा सकारात्मक जीवन मूल्यों के प्रसार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
सम्मेलन में संगम प्रतिज्ञा भी कराया गया, जिसमें समाज और विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान एवं देखभाल की दिशा में सामूहिक संकल्प लिया गया। उद्घाटन कार्यक्रम के निर्धारित क्रम में संगम प्रतिज्ञा को भी प्रमुख स्थान दिया गया था।
देश की विविधता बनी सांस्कृतिक एकता का संदेश
राष्ट्रीय सम्मेलन में विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने “विविधता में एकता” की भावना को जीवंत किया। अमरावती के सांस्कृतिक समूह तथा शांतिवन के मधुरवाणी समूह द्वारा स्वागत प्रस्तुतियां दी गईं। सम्मेलन की सांस्कृतिक संध्या में अमरावती कल्चरल ग्रुप ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों का सुंदर संगम प्रस्तुत किया।
समाजसेवियों के सम्मान ने बढ़ाया उत्साह
सम्मेलन के दौरान समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले सभी अतिथियों एवं समाजसेवियों के सम्मान का कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। इस अवसर पर समाज सेवा के क्षेत्र में कार्यरत लोगों के योगदान को सराहा गया और उन्हें आगे भी निस्वार्थ भाव से सेवा कार्यों को गति देने के लिए प्रेरित किया गया। उद्घाटन दिवस के कार्यक्रम में अतिथियों के लिए विशेष समजसेवियों का सम्मान समारोह भी निर्धारित थी।
“आंतरिक परिवर्तन से ही बाहरी परिवर्तन संभव”
सम्मेलन के समापन अवसर पर प्रतिभागियों ने अनुभव साझा करते हुए कहा कि चार दिनों के इस आयोजन ने उन्हें केवल आध्यात्मिक ज्ञान ही नहीं दिया, बल्कि अपने विचारों, व्यवहार और सेवा कार्यों को अधिक सकारात्मक बनाने की प्रेरणा भी दी। समापन सत्र का मूल संदेश रहा कि व्यक्ति के भीतर सकारात्मक परिवर्तन ही परिवार, समाज और राष्ट्र में स्थायी परिवर्तन का आधार बन सकता है। राजयोग के माध्यम से आत्मिक शक्ति को जागृत कर सेवा, सद्भाव, करुणा और मानवीय मूल्यों को जीवन में उतारना ही विश्व परिवर्तन की दिशा में सार्थक कदम है।
नई ऊर्जा और संकल्प के साथ लौटे समाजसेवी
चार दिवसीय सम्मेलन के अंतिम दिन प्रतिभागियों ने एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हुए अपने-अपने सेवा क्षेत्रों की ओर प्रस्थान किया। विदाई सत्र में यह भाव विशेष रूप से उभरा कि यह विदाई किसी कार्यक्रम का अंत नहीं, बल्कि नई सोच, नई ऊर्जा और नई जिम्मेदारी के साथ समाज सेवा के एक नए अध्याय की शुरुआत है।
समाज सेवा प्रभाग की ओर से सभी अतिथियों, समाजसेवियों, राजयोग शिक्षकों, सेवाधारियों, सांस्कृतिक दलों एवं आयोजन से जुड़े सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। सम्मेलन ने आध्यात्मिक जागृति, सामाजिक उत्तरदायित्व और निस्वार्थ सेवा के संदेश को व्यापक रूप से जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प दोहराते हुए सफलतापूर्वक विराम लिया।
“आध्यात्मिक जागृति से विश्व परिवर्तन” का संदेश लेकर लौटे करीब 2,000 समाजसेवी अब अपने-अपने क्षेत्रों में शांति, सद्भाव, सेवा और मानवीय मूल्यों की ज्योति को आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ रवाना हुए।
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