Homeलेखपरमात्म ऊर्जा - मन-बुद्धि का मस्तिष्क से अन्तर

परमात्म ऊर्जा – मन-बुद्धि का मस्तिष्क से अन्तर

अब तक हमने मन -बुद्धि और आत्मा के गुणों के बारे में जाना है। इस लेख में हम जानते है कि आत्मा कहाँ रहती है और मस्तिष्क क्या है। वैसे मस्तिष्क की सरंचना बहुत ही जटिल और सूक्ष्म है जिसका दुनियाभर में स्टडी , खोज हुई है और अंत में बायोलॉजिकल साइंस ने भी पाया कि ब्रेन के मध्य में एक ऊर्जा रहती है जो ब्रेन को भी चलाती है ।

जिज्ञासु— कई लोग कहते हैं कि मस्तिष्क अथवा ब्रेन (Brain) ही सोचता, इच्छा करता तथा शरीर द्वारा काम करता है। यह बात कहाँ तक ठीक है?

ब्रह्माकुमारी— ब्रेन अथवा मस्तिष्क आत्मा का कन्ट्रोल रूम (नियन्त्रणालय) है। जैसे मोटर-कार में एक स्थान पर बैठा ड्राइवर विभिन्न यन्त्रों द्वारा कार को चलाता, रोकता, उसकी रफ्तार को देखता, उसे मोड़ता, पीछे या सामने से आने वाले लोगों या गाड़ियों को देखता है, वैसे ही आत्मा भी मस्तिष्क द्वारा सारे शरीर पर नियन्त्रण करता तथा शरीर के किसी भी भाग को कार्य में लगाता है। जैसे बोलने के लिए मुख ही यन्त्र है, उसी प्रकार सोचने, याद करने, कर्मेन्द्रियों को निर्देशन देने या कर्मेन्द्रियों का सन्देश प्राप्त करने के लिए मस्तिष्क ही आत्मा के पास एक यन्त्र है। सारे शरीर के किसी भी भाग में हुए किसी भी संवेदन (Sensation) को नियन्त्रणालय (Control room) में पहुँचाने वाले जो स्नायु (Nerves) हैं, वे सभी मस्तिष्क में ही आकर मिलते हैं। आत्मा वहाँ मस्तिष्क में उन स्नायुओं द्वारा ही शरीर को काम में लगाती है और शरीर के किसी संवेदन (Sensation) अथवा दुःख-सुख को अनुभव करती है। परन्तु मस्तिष्क आत्मा से तो अलग चीज़ है, मस्तिष्क प्रकृतिकृत है, आत्मा चेतन है।

जिज्ञासु— आत्मा शरीर में कहाँ रहती है?

ब्रह्माकुमारी— आत्मा शरीर में भृकुटि में रहती है। इसलिए भृकुटि पर टीका लगाने की प्रथा है। वास्तव में तो हमें आत्मा के स्वरूप में टिकना चाहिए लेकिन भक्त लोग ‘टीका’ लगा देते हैं। माताओं में बिन्दी लगाने की प्रथा भी वास्तव में इसी रहस्य का परिचय देती है कि बिन्दु रूप आत्मा भृकुटि में रहती है।

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