मुख पृष्ठदादी जीदादी प्रकाशमणि जीकर्म बड़े या कर्म के खाते को भस्म करने वाला बड़ा… !!!

कर्म बड़े या कर्म के खाते को भस्म करने वाला बड़ा… !!!

हरेक के अनेक जन्मों के अनेक हिसाब-किताब हैं, अपने कर्मों को नहीं कूटो लेकिन एक तरफ रखो कर्म, एक तरफ बाबा फिर वर्णन करो भारी कौन? कर्म! कर्म बड़े या कर्म के खाते को भस्म करने वाला बड़ा! कर्मों से बचने वाले ने हमारी जवाबदारी स्वयं के हाथ में ले ली। उसने कहा तू मेरी ऊंगली पकड़ों मैं तुम्हारे सब पाप दग्ध कर दूँगा, यह जि़म्मेवारी उसने ली।

जब मैं किसी के मुख से सुनती हूँ कहते हैं बाबा आप शक्ति देना… मैं कहती शक्ति भी क्यों मांगते! क्या मेरे मांगने से वह देगा! हम मांगने वाले भक्त नहीं हम तो अधिकारी बच्चे हैं। अधिकारी बच्चों के मुख से जब ऐसे बोल निकलते तो मैं यह बोल कानों से सुनना नहीं चाहती। अरे लुटाने वाला कहता तू लूट… जितना चाहे उतना लूट। जितना लूटेंगे-लुटायेंगे उतना भरतू होते जायेंगे। वह सागर है, कोई तालाब नहीं जो सूख जायेगा। ऐसा निरन्तर खुद को स्वमान में रखो, नशे में रहो तो स्थिति कभी डगमग नहीं होगी। बाबा ने हम बच्चों पर चोटी से पाँव तक ऐसा वरदान का हाथ फेर दिया जो हमें कोई हिला नहीं सकता। सिर्फ दिल से गीत गाओ – मुझे तो मिल गया -कौन? प्यारा बाबा। जितने दिल से, जिगर से रूहरिहान कर सकते, खुशी में झूल सकते उतना झूलो – यही हमारे जीवन की लॉटरी है। कोई कहते मुझे यहाँ बहुत प्यार मिला, आनन्द मिला, अच्छा योग लगा… मैं कहती बस हम उसकी दिल को सच्चा नहीं मानती। अरे दिल, जिगर से यह बोल निकले कि मेरा बाबा मुझे मिल गया। आप नये-नये फूलों को तो बाबा कह उसके प्यार में डूब जाना चाहिए। एक भौंरा भी फूल के पीछे फिदा हो जाता, उसमें छिप जाता तो खुद से पूछो हमें फूल बनाने वाला बाप, उस पर मैं भौरे की तरह फिदा हूँ। दीवानी हूँ, मर गई हूँ, मिट गई हूँ या फिदा हूँ? हमारा बाबा है जादूगर… हमें उस जादूगर की जादूगरी पर फिदा हो जाना है। सचमुच उसने हमें अपना जादू लगा दिया… मैं कहती शल ऐसा जादू तो सबको लगे इससे कोई जुदा न रह जाए। यह जादू एक-एक पर लगे तो अहो भाग्य। भगवान का जादू लगे इनसे बड़ी दुनिया में कोई चीज़ नहीं। आप सब अपने पास एक तराजू रखो- उस तराजू में एक तरफ रखो बाबा, दूसरे तरफ अपने जन्मों का, कर्मों का बन्धन… हरेक के अनेक जन्मों के अनेक हिसाब-किताब हैं, अपने कर्मों को नहीं कूटो लेकिन एक तरफ रखो कर्म, एक तरफ बाबा फिर वर्णन करो भारी कौन? कर्म! कर्म बड़े या कर्म के खाते को भस्म करने वाला बड़ा! कर्मों से बचाने वाले ने हमारी जवाबदारी स्वयं के हाथ में ले ली। उसने कहा तू मेरी ऊंगली पकड़ों मैं तुम्हारे सब पाप दग्ध कर दूँगा, यह जि़म्मेवारी उसने ली। जब जि़म्मेवार ने हमारी जि़म्मेवारी ली तो हमारा दिल दिमाग, यह अंग सब शीतल हो गये। भगवान हम बच्चों से वायदा करता- वह अपना वायदा निभा रहा है फिर हम अपनी फुल जवाबदारी उसके हाथ में देकर हल्के क्यों नहीं होते! हल्के बनो तो फरिश्ते बनो।

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