अभी हम इतने घंटे सोते हैं, फिर भी सुबह उठने का मन नहीं करता। नींद पूरी नहीं होती। क्योंकि वो गहरी नींद नहीं थी। हमने मन को बहुत उत्तेजित कर दिया देख-देखकर, बातें सुन-सुनकर, फिर खबरें सुनकर, चीखना-चिल्लाना सुनकर। निंदा सुनकर कौन सोता है? सोने से पहले परमात्मा को याद करें।
रोज़ रात को सोने से पहले चेक करें – अगर आज के दिन आपका व्यवहार, शब्द, या सोच भी किसी के लिए ठीक नहीं थी, तो एक मिनट मौन में बैठकर उनसे क्षमा मांगें। बोलकर करने की ज़रूरत नहीं है, संकल्प में कर लें। अपने कर्मों के हिसाब-किताब को रात को सोने से पहले ठीक कर लें। अगर हम सुबह नहीं उठें तो हिसाब-किताब हमारे साथ चला जाएगा। तो क्या आप क्षमा मांग सकते हैं सोने से पहले? आज के दिन चेक करें कि क्या किसी के साथ थोड़ा भी ऊंची आवाज़ में बोला, क्या किसी के प्रति मन में सोचा कि ये ऐसे कैसे हैं, ऐसा कैसे करते हैं, गलत हैं ये? ये सोच भी हमारी शक्ति को घटाती है।
अगर रात को सोने से पहले मन को साफ नहीं किया तो वो कलुष गहरा चला जाएगा। इसीलिए कितनी पुरानी बातें हैं जो अभी तक भूलती नहीं हैं। क्योंकि हमने उनको क्षमा नहीं किया है। सुबह-सुबह अगर आप चाय पीते हैं बिस्तर पर बैठकर, अगर थोड़ी-सी चाय गिर जाती है तो तुरंत क्या करते हैं पहले? दिवाली के दिन साफ करेंगे, ऐसा करते हैं? नहीं। सबसे पहले हम चद्दर को झाड़ते हैं। क्योंकि 10 सेकंड के अंदर जो दाग चादर पर था, वो अंदर गद्दे में, मैट्रेस में चला जाएगा।
यही होता है मन के साथ भी। हमारे मन की जो ऊपर की लेयर है, वो चादर की तरह है। उसके ऊपर से दाग साफ करना आसान होता है। रात को जब हम सो जाते हैं, वो सारे दिन की बातें, सारे वो कर्म, सारी मेरी सोच, वो ऊपर की चादर तक नहीं रहती, वो अंदर चली जाती है। जिसको कहेंगे अवचेतन मन, मतलब वह डीपर लेयर में चला गया। उसके बाद वहाँ से साफ करना तो थोड़ा-सा मुश्किल होता है। इसीलिए दिन-दिन में ही साफ कर लेना चाहिए। अगर दिन में साफ नहीं हो तो रात को सोने से पहले अपने कर्म को अच्छे से चेक करके सोना ज़रूरी है।
दिन में लोग हमें कितना कुछ कह देते हैं, कोई बात अच्छी लगती है, कोई बुरी। सोने से पहले क्षमा कर दीजिए, दाग वहीं का वहीं खत्म हो जाएगा। सो गए तो दाग गया अंदर। इसलिए बचपन में सिखाते थे झगड़ा हो गया तो सोने से पहले झगड़े को खत्म करो। क्योंकि नींद में वो झगड़ा मन के बहुत गहरे में चला जाएगा। गांठें पड़ जाती हैं। पर हम तो आजकल सोने से पहले झगड़े देखकर सोते हैं।
क्षमा करना, क्षमा मांगना, किसी को दुआएं देना,शुभ-भावना देना, अपनी सोच को चेक करना कि मैंने क्यों उनके बारे में ऐसा सोचा। ऐसा भी तो सोच सकते थे। कहीं से सराहना भी अगर मिली है तो उसे भी गहरा अंदर नहीं जाने देना। उसको भी समर्पण कर देना सोने से पहले कि परमात्मा शुक्रिया, जो आपने मुझे निमित्त बना लिया इस कार्य के लिए। अगर हम सराहना को भी स्वीकार करते हैं तो उससे हमारा अहंकार ही धीरे-धीरे बढ़ता जाता है, और अहंकार का बढऩा मतलब हमारी आत्मा की शक्ति घटना।

