मेडिटेशन से मन के साथ शरीर पर भी पड़ता है गहरा प्रभाव

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वैज्ञानिकों ने प्रमाणित किया है- जैसे हमारे विचार होते हैं वैसा हमारा शरीर भी बनने लगता है। विचार जीवन की सबसे बड़ी शक्ति है।
मेडिटेशन से सेल्स को मिलती है ऊर्जा, डेड सेल फिर से हो जाते हैं जागृत, इससे कई बीमारियों का इलाज सम्ंभव

मेडिटेशन न केवल हमारे मन को सुकून देता है बल्कि इसका प्रभाव हमारे शरीर की कोशिकाओं पर भी पड़ता है। जैसे हमारे विचार होते जाते उसी अनुसार हमारे शरीर का आकार भी होता जाता। यह बात वैज्ञानिकों ने अपने शोध में प्रमाणित कर दिखाई है। यही नहीं सिर्फ पांच मिनट का ध्यान हमारी कोशिकाओं को ऊर्जा से भर देता है। इसका केन्द्र प्राण वायु होती है जिसे हम आत्मा कहते हैं। आत्मा से जो संकेत मस्तिष्क को मिलता है वही संकेत पूरे शरीर को देता है। इसीलिए आत्मा को शक्तिशाली व सतोप्रधान बनाना आवश्यक है। अगर मन में उत्पन्न होने वाले विचार सही, श्रेष्ठ व शुभ हैं तो उसका शरीर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उसके विपरित अगर नकारात्मक विचार मन में उत्पन्न होते हैं तो उनका हमारे शरीर पर असर भी बुरा पड़ता है। इसीलिए मन मेें सकारात्मक संकल्पों का होना बहुत आवश्यक है। यदि हम प्रतिदिन एक निश्चित समय में किसी बीमारी को ठीक करने के लिए मेडिटेशन का प्रयोग करते हैं तो इससे हमारे निगेटिव सेल खत्म हो जाते हैं अर्थात् सेल पर से बुरा असर समाप्त हो जाता है और नये सेल का निर्माण होना शुरू हो जाता है। अगर मन से निकलने वाले निगेटिव विचारों का संकेत बारम्बार शरीर की कोशिकाओं को मिलता रहता है तो वही घातक बीमारियों के जि़म्मेवार होते हैं।
मेडिटेशन हमारी बीमारियों को न केवल ठीक करता है लेकिन साथ-साथ मन को शांत व स्थिर भी बनाता है। इससे सिर्फ मानसिक शांति ही नहीं मिलती बल्कि एलर्जी, उत्तेजना, अस्थमा, कैंसर, थकान, हृदय संबंधी रोग, हाई ब्लड प्रेशर, अनिद्रा, चिड़चिड़ापन आदि बीमारियों से निजात भी मिलती है।

योगाभ्यास कैसे किया जाये?
राजयोग मेडिटेशन मन की एक यात्रा है। जिसे हम किसी भी परिस्थिति में और समय पर कर सकते हैं। यह विचारों का एक प्रवाह है जो अनवरत हमारे अन्दर चलता रहता है। इसीलिए उसको कुदरत भी कहते हैं। इसके तहत हम रोज़ सुबह श्रेष्ठ विचार, स्वमान लेते हैं उसी के तहत सारे दिन अपने मन में संकल्प करते हैं। उस संकल्प का मन में चिंतन चलता है और उसके भावार्थ को भी महसूस करता है। इससे धीरे-धीरे उसी अनुसार हमारा स्वरूप बनता जाता है। जैसे आपने सुबह एक संकल्प लिया कि सफलता मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है। जब ये विचार आप सारे दिन में कई बार करेंगे तो आपको कुछ ही दिन में लगेगा कि आप जो भी कर्म करते हैं उसमें आपको सफलता मिलने लगी है। क्योंकि इस जीवन में सारा खेल विचारों का ही है। राजयोग हमें श्रेष्ठ और शुभ विचारों के लिए प्रेरित करता है। राजयोग का अभ्यास आप घर पर या ऑफिस में या रास्ते में चलते हुए या भीड़ भरे स्थान पर भी कर सकते हैं। ये एक मन की प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया को, सकारात्मक विचारों को बनाये रखने में राजयोग की अहम भूमिका है।

आध्यात्मिकता मतलब जो सत्य है उसे उसी रूप में स्वीकार करना
आध्यात्मिकता हमें सिखाती है कि जो इस सृष्टि में सत्य है उसे उसी रूप में स्वीकार करना। इसके लिए हमें सबसे पहले सत्य ज्ञान को जानना होगा। जीवन में कुछ चीज़ें ऐसी होती हैं जिन्हें हम बदल नहीं सकते। अत: ऐसी स्थिति में हमारी उन बातों को और उन लोगों को स्वीकार कर लेने में ही भलाई है। जैसे आपकी शादी होती है और पत्नी के साथ आपके संस्कार नहीं मिलते तो ऐसी स्थिति में आपस में एक-दूसरे की कमी-कमज़ोरी को नज़र अंदाज कर, आपस में गुण देखते हुए जीवन आनंदमय तरीके से जीने में ही भलाई है। यदि आप हमेशा अवगुण देखते रहेंगे तो आपका परिवार युद्ध क्षेत्र बन जायेगा और आप जीवन के अनमोल आनंदमय क्षणों का आनंद नहीं ले सकेंगे। इसी तरह हमारे परिवार, समाज और नौकरी को स्वीकार कर पूर्ण मनोभाव के साथ, आनंद के साथ जीवन जीने में ही समझदारी है। हर स्थिति, परिस्थिति, समय, वस्तु, व्यक्ति, स्थान में सही और कल्याणकारी नतीजा दिखाने का कार्य आध्यात्मिकता सिखाती है। विकृत परिस्थितियों में भी स्वयं की स्थिति को शांत बनाये रखना आध्यात्मिकता सिखाती है।

ऐसे करें राजयोग मेडिटेशन की अनुभूति…
अनुभव करें कि आप एक सक्षम, सशक्त, सफल और खुश इंसान हैं… संकल्प करें कि आप अपने हर विचार एवं प्रतिक्रिया के प्रति जागरूक हैं और उसपर आपका पूर्ण अधिकार है… अनुभव करें कि मैं आत्मा परमपिता परमात्मा की संतान हूँ और सफलता मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है। मेरे प्रत्येक कर्म में सफलता समाई हुई है… ये वरदान मुझे स्वयं परमपिता परमात्मा ने दिया है… मैं बहुत ही खुश इंसान हूँ… परमात्मा की कृपा से मुझे इतना सुन्दर शरीर मिला है… इतना अच्छा दैवी परिवार मिला… उसके प्रति अपनी कृज्ञता व्यक्त करें… शुक्रिया अदा करें… मन में विचार करें कि मैं एक सफल इंसान हूँ… मुझ जैसा सुखी इस दुनिया में कोई नहीं है… मेरे सिर पर सदा परमात्मा की छत्रछाया है… परमात्मा का वरदानी हाथ सदा मेरे सिर पर है… अनुभव करें जीवन के सूक्ष्म क्षणों को और परमात्मा को इसके लिए धन्यवाद दें… अपनी सारी शक्तियां,जिम्मेवारी, समस्यायें, चिंता, और दु:ख परमात्मा को सौंप दें… अनुभव करें परमात्मा ने मुझे सर्व समस्याओं से मुक्त कर दिया है… मेरा जन्म संसार में श्रेष्ठ व महान कार्यों के लिए हुआ है… मुझे दिव्य और श्रेष्ठ कर्म करना है… धीरे-धीरे इसे अनुभव करें। इस तरह आप दिन में कोई भी निश्चित समय निर्धारित कर पाँच-दस मिनट शांत व स्वच्छ होकर बैठेंगे तो वो अनुभव आपको अवश्य होगा। और वो अनुभव आपके सोचने की प्रक्रिया को सकारात्मक और सबल बनायेगा। राजयोग मेडिटेशन के बारे में अधिक जानकारी और इसका अभ्यास सीखने के लिए अपने नज़दीकी स्थानीय ब्रह्माकुमारीज़ सेवाकेन्द्र पर संम्पर्क कर सकते हैं और मदद व लाभ ले सकते हैं।
वैज्ञानिकों ने शोध में पाया : विचारों का मन के साथ शरीर पर भी पड़ता है प्रभाव
नॉर्थ ईस्टर्न यूनिवर्सिटी, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अध्ययन में मेडिटेशन के प्रभाव को इंटरपर्सनल हॉर्मनी और उसके पैशन के रूप में वर्णन किया है। उन्होंने शोध में पाया कि मेडिटेशन का प्रभाव व्यक्ति के पूरे व्यवहार और उसकी जीवनशैली पर पड़ता है। शोध में शामिल प्रतिभागियों को आठ सप्ताह तक दो तरह के मेडिटेशन की ट्रेनिंग दी गई। इसके बाद उनका टेस्ट लिया गया जिसमें जिन लोगों ने टे्रनिंग ली थी उनमें दूसरों को सहयोग और दु:ख-दर्द को समझने की भावना 50 प्रतिशत तक पाई गई। जबकि जिन्हें टे्रनिंग नहीं दी गई उनमें यह भावना मात्र 15 प्रतिशत तक रही। उससे जर्नल साइकोलॉजी साइंस में प्रकाशित किया गया।

हाइडलबर्ग में एसोसिएशन फॉर बायोलॉजिकल रेसिसटेंस टू कैंसर की निर्देशक यॉर्गी इर्र्मी ने शोध में पाया कि कैंसर की बीमारी आवेग से जुड़ी होती है। इसके लिए वे मरीजों को मेडिटेशन करने की सलाह देती हैं। बीमारी ठीक होने की प्रक्रिया में मरीज का रवैया बहुत महत्व रखता है। उन्हें यह विश्वास है कि इस तरह के शोध करके और भी अनेक बीमारियों का इलाज मेडिटेशन के द्वारा किया जा सकता है।

एपिजेनेटिक्स के मशहूर वैज्ञानिक ब्रूस लिप्टन का मानना है कि हम अपने आपको आत्म विश्वास और अपने रवैये से बहुत-सी बीमारियों को ठीक कर सकते हैं। दिमाग जो देखता है उसे रसायन में परिवर्तन कर देता है। रसायन शरीर की कोशिकाओं तक पहुंचता है। और एपिजेनेटिक्स के लिए जि़म्मेदार होते हैं। सेहत का ख्याल रखना जीवनशैली से जुड़ा हुआ है और जीवनशैली बदलना हमारे हाथ में है।

डीआरडीओ भारत सरकार व ब्रह्माकुमारीज़ के रिसर्च में हार्ट के कोरोनरी आर्टरी के मरीजों पर शोध में पाया गया कि व्यक्ति के रवैये और उसके व्यवहार में सकारात्मक व मधुर रेस्पॉन्ड करने पर तथा मेडिटेशन नियमित श्रेष्ठ व मंगलकारी संकल्पों के साथ करने पर उनकी आर्टरीज़ ब्लॉकेज धीरे-धीरे खुल गईं। मेडिटेशन एक कारगर टूल व दवाई की तरह बीमारियों पर स्टीक इलाज करता है, ये शोध में पाया गया। तो व्यक्ति के रवैये का असर शरीर की हर कोशिकाओं पर पड़ता है और मेडिटेशन उसे हील करने की ताकत देता है।
मेडिटेशन से कर सकते हैं जिन्स को नियंत्रित
स्पेन, फ्रांस, और अमेरिकी वैज्ञानिकों के द्वारा किये गए शोध में यह बात समझ में आई कि मेडिटेशन की मदद से इंसान के शरीर में उन जिन्स को दबाया जा सकता है जो आवेश पैदा करते हैं। ये जिन्स आरआईपीके-2 और सीओएक्स-2 हैं। इनके अलावा हिस्टोन डिएक्टिलेज जिन्स भी हैं जिनकी सक्रियता पर ध्यान करने से असर पड़ता है। मेडिटेशन से हम अपने शरीर में जेनेटिक गतिविधियों को नियंत्रित कर सकते हैं। जिसमें गुस्से को काबू करना, सोच, आदतें या सेहत को सुधारना भी शामिल है। इस शोध का मॉलिक्यूलर बायोलॉजी के क्षेत्र एपिजेनेटिक्स से भी सीधा सम्बन्ध है। जिसके अनुसार आस-पास के माहौल का जिन के मॉलिक्यूलर स्तर पर स्थायी प्रभाव पड़ सकता है। वर्ष 1990 में जब एपिजेनेटिक्स मॉलिक्यूलर बायोलॉजी एक क्षेत्र के रूप में उभरकर सामने आई तो उसने उन मान्यताओं को हिला दिया जिनके अनुसार मनुष्य के जिन्स उनका भाग्य निर्धारित करते हैं। कोशिका नाभिक में मौजूद अणुओं की जांच कर एपिजेनेटिक्स में पाया कि डीनए सीक्वेंस में परिवर्तन किए बगैर भी जिन्स को दबाया या उत्तेजित किया जा सकता है।

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