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दावणगेरे: स्वच्छ और स्वस्थ समाज के लिए आध्यात्मिक सशक्तिकरण – घोष वाक्य का शुभारंभ समारोह

दावणगेरे,कर्नाटक: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की ओर से शिवालय में 19. 5. 2024 के दिन स्वच्छ और स्वस्थ समाज के लिए आध्यात्मिक सशक्तिकरण – घोषवाक्य का शुभारंभ समारोह संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम का उद्घाटन सुप्रसिद्ध टीवी कलाकार, वैद्य, लेखक एवं क्विज मास्टर डॉक्टर ना सोमशेखर जी ने अपने कर कमल से संपन्न किया। उन्होंने बताया कि  महर्षि  सुश्रुत  जी ने स्वस्थ शब्द का अर्थ बहुत ही विशेष बताया है। सम चित् और सहज स्थिति को स्वस्थ बताया गया है। कठोपनिषद में यह कहा गया है कि हमारी देह रथ है, आत्मा सारथी है और पांच घोड़े हमारी इंद्रियां हैं ।  इंद्रियों को नियंत्रण में रखने वाला ही स्वच्छ और स्वस्थ रह सकता है।

इस कार्यक्रम में आध्यात्मिक क्षेत्र की ओर से बसव प्रभु स्वामी जी ने अपने वक्तव्य में कहा कि सात्विकता के लिए मोह को त्यागना पड़ेगा। अपने आप को जानना ही आध्यात्मिकता है। आध्यात्मिकता के लिए संन्यास की आवश्यकता नहीं है, जब हम इस संसार से विरक्त रहेंगे तभी हमें सात्विकता और सिद्धि प्राप्त हो सकती है।
चरण्तेश्वर स्वामी ने कहा कि  हमें सत्संग की राह पर चलना चाहिए। कुसंग से हमारा पतन होता है।
 मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित अध्यापक श्री मंजुनाथ जी ने कहा कि हमें अपने कर्म योग की तरफ ध्यान देना चाहिए। स्थूल गंगा स्नान से पाप नहीं धो सकते, ज्ञान गंगा से ही पाप धो सकते हैं।
कन्नड़ साहित्य परिषद के कार्यदर्शी श्री राम लिंग  ने कहा कि हर साल हजारों पुस्तकों का प्रकाशन होता है, अच्छी किताबें को पढ़ना हमें बरकरार रखना चाहिए।
शिवयोगी हीरेमठ ने कहा कि मन की शुद्धि और विकास के लिए सत्संग की आवश्यकता होती है।
सभा में उपस्थित केदार लिंग महास्वामी जी ने कहा कि हमें अंतरंग की शुद्धि करनी चाहिए, आजकल के साधन अंतरंग की शुद्धि नहीं कर रहे हैं। आध्यात्मिक शिक्षा को बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा के रूप में देनी चाहिए।
कार्यक्रम के अध्यक्ष बी.के अनसूया जी ने कहा कि शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य की आवश्यकता आजकल बहुत है। हमें मन का प्रदूषण रोकना चाहिए, तभी बाकी सब प्रदूषण अपने आप बंद हो जाएंगे। परमात्मा के साथ आत्मा का संबंध होना ही आध्यात्मिक सशक्तिकरण के लिए आवश्यक है।
 श्री नारायण स्वामी जी ने कहा कि उपवास करना ही चिकित्सा है।  जो साफ, स्वच्छ है वही स्वस्थ है। संपन्न और संपूर्ण बनने के लिए हमें कार्यरत रहना चाहिए।
ब्रह्माकुमारी लीला, सेवा केंद्र प्रभारी ने कहा कि ब्रह्माकुमारी संस्था किसी भी धर्म जाति और पंथ का भेदभाव नहीं करती है, सभी को आध्यात्मिक शिक्षा देने की सेवा कर रही है। देश और विदेश में 10000 सेवा केंद्रों  के द्वारा विशेष सेवा कर रही है।
इस संदर्भ में शिव प्रसाद के द्वारा लिखित प्रसाद वाणी पुस्तक का विमोचन भी किया गया।

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