मुख पृष्ठदादी जीदादी जानकी जीबाबा ने हमें तीनों कालों की दृष्टि से देखा

बाबा ने हमें तीनों कालों की दृष्टि से देखा

जो मंथन करना नहीं जानता, चिंतन करना नहीं जानता उसको पता नहीं मुरली में कितना रस, कितनी शक्ति भरी है। वह अपने साथियों में वह शक्ति नहीं भर सकता। उडऩे नहीं देगा। ज्ञान का कायदा ही ऐसा है। बाबा ने गुप्त अपनी भावना, स्नेह की शक्ति से पढ़ाया है, पालना दी है।
कभी भूल हुई हो तो बाबा कहते हैं सच बतायेंगे तो हल्के हो जायेंगे। हम किसी को उल्हना नहीं दे सकते हैं। बाबा ने सिखाया है सबको आत्म दृष्टि से देखो। बाबा ने हमारी आत्मा को जागृत करने के लिए हमें तीनों कालों की दृष्टि से देखा है। न सिर्फ यह कहा कि तुम आत्मा शरीर से न्यारी हो लेकिन तुम कल्प पहले वाली हो और सम्पूर्ण बनने वाली आत्मा हो, सतयुग में आने वाली आत्मा हो।
बाबा आज की दृष्टि से नहीं देखता। बाबा ऐसे देखता है जो हमको डर नहीं रहता। हमारे में उम्मीद पैदा होती है। इसलिए कहता है अच्छा पुरूषार्थ करना है तो बीती को भूलो। बीती को भूलो तो आगे पुरूषार्थ करने की शक्ति आती है। ज्ञान भूलना, शिक्षा को भूलना, अच्छी बात को भूलना इससे कमज़ोरी आती है। बीती बातों को भूलने से शक्ति आती है। तो किसको भूलना है किसको याद रखना है – यह है अक्लमंद की निशानी। कोई बात हो गई तो एक बार सुनाकर खत्म कर दो। बार-बार भी नहीं सुनाओ। बार-बार सुनाने से वह पक्की हो जाती है। एक बार सुनाने से बाबा शक्ति देकर खत्म करता है। हमें हमारी भूल याद नहीं दिलाता। हम अपनी भूल याद न करें, दूसरों की भी याद न करें। हमारे अन्दर से स्नेह और रहम सूख न जाये। चलते-चलते स्नेह और रहम जैसे सूख जाता है। नदी सूख जाती है तो नहाने कौन जायेगा? नज़दीक कौन जायेगा। अच्छी बहती हुई होगी, क्लीन होगी तो नहाने, जल पीने को दिल करेगा। तो स्नेह और रहम सूख न जायें। हम कोई ऐसी बातें न कर दें जो हमारे लिए नुकसानदायक हो। अगर स्नेह और रहम मेरे पास होगा तो हम बाबा के कार्य अर्थ, सेवा अर्थ सच्ची दिल से लगा सकते हैं। बाबा ने स्नेह और रहम भावना से हमको जैसे पानी दिया है। अभी भी दे रहा है। अगर बाबा थोड़ा स्नेह से न देखे तो हम मुरझा जायें। मुर्दा बन जायें। अक्ल न हो, सयाने न हों फिर भी बाबा रहम करता है। बाबा ने हम आइरन एजड आत्माओं को पिघलाया है। तो इस अव्यक्त वर्ष में हमको अन्दर ही अन्दर बहुत पुरूषार्थ करना है। खाद निकल जानी चाहिए। बाबा के और भी जो लाडले सिकीलधे बच्चे हैं, उनको देवें। ऐसा वायुमण्डल इतना श्रेष्ठ फुर्ती वाला हल्का हो।

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