मुख पृष्ठदादी जीदादी जानकी जीहमारे प्रश्न और दादी जी के उत्तर

हमारे प्रश्न और दादी जी के उत्तर

प्रश्न:- जो आत्मायें अभी-अभी ज्ञान में आई हैं वो ऊंच पद पा सकते हैं? वो 108, 16108 की माला में आ सकते हैं?
उत्तर:– मैं तो हमेशा कहती हूँ 8 में भी आ सकते हैं।16000 में आना हो तो मददगार रहो। 108 में आना हो तो विदेही होकर रहो। 8 में आना है तो पूज्यनीय लायक क्वालिटी बन जाओ। बाबा ने कहा है कि अभी तक माला तैयार नहीं हुई है। बाबा को सदा असम्भव को सम्भव कराना अच्छा लगता है। लोग समझेंगे यह सम्भव कैसे हो सकता है! 50 वर्ष वाले बैठे हैं, 50 दिन वाले कैसे आ सकते हैं! परन्तु सब कुछ हो सकता है। सिर्फ सच्चा बनो, अच्छा बनो, पक्का बनो, क्वालिटी वाला दाना बनो, बाबा से सच्चा स्नेह हो, अटूट निश्चय बुद्धि हो तो कोई बड़ी बात नहीं।

प्रश्न:- अभी तक तीन लाख आत्मायें ब्राह्मण बनी हैं, तो क्या ये सब सतयुग में आयेंगे?
उत्तर:- ज़रूर आयेंगे, जायेंगे कहाँ? सतयुग में 9 लाख चाहिए। तो आप सब तो आयेंगे ही। बाकी ऊंच पद सतयुग में कैसे पायें ये बात करो। सतयुग में तो आ ही जायेंगे।

प्रश्न:- 1. बाबा के बारे में सोचना, 2. बाबा की याद में फीलिंग, 3. अपने सामने बाबा का रूप लाना, 4. बाबा के साथ बातें करना- इन चारों में क्या अन्तर है? इसको कैसे कर सकते हैं?
उत्तर:– पहले जब ज्ञान मिलता है तो बाबा के बारे में अच्छी तरह से सोचते हैं, सोचकर पहचानते हैं, जब पहचानते हैं तो सम्बन्ध की फीलिंग आती है। बाबा के बारे में सोचो, बाबा कहता है एक-एक गुण को सोचो। ऐसे मुख से महिमा नहीं कहो- बाबा प्रेम का सागर है, क्षमा का सागर है, आनन्द का सागर है,….लेकिन इसका अनुभव करो। जब अनुभव करेंगे तो फीलिंग आयेगी। वो फीलिंग हमारी दूसरी सब फीलिंग को प्युअर बनाती जायेगी। फिर कोई भी कार्य सामने आयेगा तो उसमें क्या करना चाहिए। बाबा सामने आयेगा। मधुबन में बाबा से मिलते हैं तो घर बैठे भी कितना बारी बाबा याद आता होगा, दिखाई देता होगा। मैं बाबा के सामने बैठा हूँ, बाबा मुझे दृष्टि दे रहे हैं। बाबा से ली हुई भासना खींचती है, वो दृश्य सामने आता है।

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