मुख पृष्ठकथा सरिताअपने लक्ष्य की ओर बढ़ते जायें…

अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते जायें…

अंकुर को क्रिकेट खेलने का बहुत शौक था। जब भी उसके दोस्तों का ग्रुप मैदान में जाता, वो भी अपने बल्ले और गेंद के साथ वहाँ पहुंच जाता। उसका बैटिंग स्टाइल देखकर लोग अक्सर तारीफ किया करते थे। पर खेल-कूद के साथ-साथ उसकी प्राथमिकता हमेशा पढ़ाई रही। अंकुर के दोस्त उसके पढ़ाई में तेज होने के साथ ही उसकी मदद के लिए हमेशा तैयार रहते। हालांकि, वो अपनी कक्षाओं में सबसे आगे होता, लेकिन उसका दिल कुछ और करना चाहता था।
वो इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने निकला। बड़े शहर में जाकर उसने इंजीनियरिंग की जहाँ उसका संघर्ष और भी बड़ा हो गया। नए माहौल में कदम रखते ही उसने खुद को निखारने का काम शुरू कर दिया। वो अपने सपनों की उड़ान के लिए खुद को तैयार कर रहा था। लेकिन उसके दिल में हमेशा से एक खलिश(कसक) थी वो सिर्फ पैसे कमाने के लिए नहीं, बल्कि समाज के लिए कुछ करना चाहता था।
इंजीनियरिंग के बाद उसे एक अच्छी कंपनी में नौकरी मिल गई, लेकिन वो खुश नहीं था। दिन ब दिन वो अपने मन की आवाज़ सुनता रहा। अंकुर का स्वभाव भावुक और संवेदनशील था और जब समाज में होने वाली नाइंसाफी को देखता, तो उसे बेचैनी महसूस होती। वो कुछ बड़ा करना चाहता था, जिससे समाज में बदलाव आ सके। अंकुर के जीवन में एक दिन ऐसा आया जब उसने ठान लिया कि उसे कुछ अलग करना है। एक दिन उसने अपने पिता से कहा, ”पापा, मैंने इंजीनियरिंग की है, पर मेरा मन किसी और काम में लगता है। मैं देश की सेवा करना चाहता हूँ। मैं पुलिस अफसर बनना चाहता हूँ।” पिता पहले तो चौंके, लेकिन अंकुर के आत्मविश्वास को देखकर उन्होंने उसका हौसला बढ़ाया।

शारीरिक और मानसिक रूप से खुद को तैयार करना
फिर शुरू हुआ अंकुर का असली संघर्ष। पुलिस अफसर बनने की राह आसान नहीं थी। अंकुर ने दिन-रात पढ़ाई की, शारीरिक और मानसिक रूप से खुद को तैयार किया। उसके जीवन में कई उतार-चढ़ाव आए, कई बार वो हताश हुआ, लेकिन हर बार उसके भीतर का जुनून उसे आगे बढ़ाता रहा। अंकुर की यह जि़द्द थी कि वो हार मानने वालों में से नहीं था।
आखिरकार, अंकुर का वो दिन आया जब उसकी मेहनत रंग लाई। वो एक बड़े पुलिस अफसर के रूप में चयनित हुआ। अब अंकुर सिर्फ एक इंजीनियर नहीं था, बल्कि समाज का रक्षक बन चुका था। अब वो अपने लोगों की सेवा करता था, अन्याय के खिलाफ खड़ा होता था और अपनी निष्ठा और ईमानदारी से लोगों का दिल जीतता था।
अंकुर का सफर आज भी जारी है। उसने अपने सपनों को साकार करने के लिए संघर्ष किया, अपनी कमज़ोरियों को ताकत में बदला और अपनी संवेदनशीलता को अपने काम की शक्ति बना दिया। उसकी मेहनत अब भी जारी है, क्योंकि अंकुर मानता है कि असली सफलता तब है जब आप खुद से संतुष्ट हों और वो संतुष्टि अभी बाकी थी।

सीख : अगर दिल में सच्चे इरादे हों और मेहनत से डरे बिना अपने लक्ष्यों की ओर बढ़ा जाए तो कोई भी सपना असंभव नहीं होता।

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