मेरा सौभाग्य है कि परमात्मा मुझे यहाँ ले आया। हम सबके लिए एक धन्यता का अनुभव करता हूँ कि हम सब सतयुग लाने के लिए पुरुषार्थी हो रहे हैं। भगवान निमित्त बनाए इससे बड़ा सौभाग्य क्या हो सकता है! मुझे यहाँ अद्भुत ऊर्जा का अनुभव हुआ, मन में शुभ-भाव का उदय होने लगा। हम गहनता से आपस में विचार-विमर्श करेंगे और एक-दूसरे के कार्य को अच्छे से समझेंगे। भगवान ने जो कार्य तय किए हैं उन पर चलकर उन्हें पूर्ण करेंगे।। यहाँ के हर सदस्यों के मनोभाव में एकमुखी संकल्प है जो केवल परमात्मा की उपस्थिति से ही सम्भव होता है। –आलोक कुमार, अध्यक्ष, विश्वहिन्दू परिषद
यहाँ सबके बोल, चाल-चलन एकमुखी हैं, ऐसा परमात्म उपस्थिति से ही होता सम्भव
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