मुख पृष्ठलेखहम भी अपने परमपिता परमात्मा से मिल सकते है

हम भी अपने परमपिता परमात्मा से मिल सकते है

एक मान्यता चली आ रही है कि कुछ ऐसे लोग ही परमात्मा से मिल सकते हैं या उनके नज़दीक जा सकते हैं जिन्होंने धर्म, अध्यात्म के आधार से कुछ जीवन जीया है या सन्यास धर्म को धारण करके उसकी खेाज में गए हैं, या बहुत गहन तपस्या की है जिसके आधार से परमात्मा उनसे प्रसन्न होकर उनको दर्शन देंगे। यही कुछ गहरी मान्यताओं ने मानव को डरा दिया। और कहा कि कहाँ! हम मिल सकते हैं उनसे। लेकिन आज ये बिल्कुल भी अमान्य भी है और बिल्कुल सम्भव भी है कि परमात्मा हमारा है और हमसे मिलता भी है। क्योंकि हम कहते हैं परमात्मा हमारा पिता है तो अपने बच्चों से मिलना लाज़मी है।

परमात्मा को दुनिया में गरीब निवाज़ कहते हैं और गरीब निवाज़ का अर्थ है- वो जो भावना वाले हैं, जिनका दिल शुद्ध है, पवित्र है उनको परमात्मा नवाज़ता है। उनको एक जागीर तक देता है। परमात्मा से मिलने का आधार शुभ और सात्विक कर्म हैं न कि शास्त्रित अध्ययन और न ही सन्यास। परमात्मा विकारों से सन्यास कराते और देह से न्यारा होने का अभ्यास कराते। ये दो ही ऐसे मुख्य कार्य हैं जो हमको परमात्मा के नज़दीक ले जाते हैं। कुछ लोगों ने उसको उल्टी गंगा के रूप में बहाया कि आपको विकारों के सन्यास की जगह संसार छुड़ा दिया और देह से न्यारा होने की जगह कर्म और सम्बन्ध से न्यारा होना सिखा दिया। बस यहीं से गलती हो गई और इसी से हम दूर होते गए। परमात्मा तो सभी का है ना! अगर हम कर्म और सम्बन्ध से न्यारा हो जाएंगे तो परमात्मा को कोई पसंद नहीं करेगा ना! इसीलिए उससे मिलना आसान है केवल देह भान से न्यारा होना उसके नज़दीक पहुंचने का आधार है।

आज पिछले नौ दशकों से परमात्मा का दिव्य अवतरण केवल हमारे लिए ही हो रहा है। लेकिन हमारे मिलन की तैयारी का आधार जब तक नहीं होगा तब तक उससे मिलकर भी हम उसको समझ नहीं पाएंगे। क्योंकि वो शरीर से न्यारा है, परमधाम निवासी है। हमें उसको जानने के लिए वैसे देह भान से न्यारा बनना पड़ता है। आज भी उसकी उपस्थिति माउंट आबू में स्थित परमात्मा के घर में होती रहती है और वो उतने समय से लोग अनुभव कर-करके सुनाते रहते हैं कि परमात्मा हैं तो यहीं हैं और कहीं नहीं है। ये एक साधारण माता से लेकर एक वैज्ञानिक तक को तब अनुभव होगा जब वो सत्य साफ मन से, अपने मूल आत्मिक स्वरूप में आएंगे और वो ही मूल स्वरूप हमें उससे मिलवाएगा। तो चलो मूल स्वरूप में आएं और परमात्मा से मिलन का आनंद उठाएं।

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