किसी की पहचान या परिचय किसी न किसी के साथ जोड़कर दिया जाता है, तो वो परिचय सही नहीं माना जाता। जैसे अगर व्यक्ति के साथ वस्तु को हटा दें तो वस्तु अलग है, व्यक्ति अलग है, दोनों का अस्तित्व अलग है, दोनों का प्रयोग अलग है। वैसे ही परमात्मा की पहचान और उसको पहचानने का आधार दोनों ही अलग हैं। सबने प्रयास किया लेकिन अपने अपने आधार से। सबने कहा कि परमात्मा सबका एक है लेकिन व्याख्या अलग-अलग की। सभी धर्म ने अलग कर दिया, सभी वर्ग ने अलग कर दिया सभी असमंजस की स्थिति में आ गए कि किसको माने या किसको ना मानें! इस ऊहापोह की स्थिति से निकलने के लिए परमात्मा के पहचानने की पाँच कसौटी जो मान्यता प्राप्त है, वो आपके सामने रख रहे हैं, आप देखें, निहारें अपने परमपिता को और सोचे।
जो सर्वमान्य हो – कहा जाता है कि जिसको सभी एक आवाज़ में स्वीकार करें वो परमात्मा हो सकता है। लेकिन अन्य अनेक धर्मों में जो भी देवी-देवता या धर्म पिता या महान आत्मा हैं उसको एक विशेष वर्ग ने अपनाया, सभी ने मान्यता नहीं दी। अगर उसे सभी मान्यता दें तो भगवान हो सकता है।
जो जन्म-मरण के चक्र से हो न्यारा – कहा जाता है जिसका जन्म होता है उसकी मृत्यु भी होती है। तो जिसका जन्म और मृत्यु हो वो कर्म भी करेगा और उसके कर्म का खाता भी बनेगा और उसे चुकाना भी होगा। अगर भगवान भी ये सबकुछ करेगा तो हमको निकालेगा कौन? इसलिए जो न्यारा है उसी को तो हम पुकारते हैं। तो जो जन्म-मरण में आये तो वो भगवान तो नहीं हो सकता।
जो सर्वाेच्च हो – इस दुनिया में सबके माता-पिता, बंधु-सखा सब दिखाए जाते हैं। लेकिन परमात्मा ऊंचे ते ऊंचा है जिसकी न माता है, न पिता है, न बंधु है, न सखा है इसलिए वो भगवान के वर्ग में आ सकता है।
जो सर्वज्ञ हो – शास्त्रों में दिखाते हैं कि सभी देवता, ऋषि-मुनी किसी न किसी के पास अपने प्रश्न का उत्तर लेने जाते थे। लेकिन परमात्मा सर्वज्ञ सबकुछ जानता है, उसे किसी के पास जाने की आवश्यकता नहीं। जो सर्वज्ञ है वो ही परमात्मा है।
जो गुणों में अनंत हो – परमात्मा के गुणों को सबके साथ जोड़ा जाता है। सागर के साथ जोड़ा जाता है। भक्ति में जितने भी श्रेष्ठ से श्रेष्ठ, महिमावान चीज़ें हैं उनके साथ परमात्मा की तुलना की जाती है। फिर भी कहते हैं कि ये तो उसके सामने कुछ भी नहीं है, सिर्फ तुलनात्मक कहा जात है। तो जिसके लिए हमारे लिए गुणों का वर्णन करना मुश्किल हो, वो परमात्मा है। ये कुछ बिंदु हैं जो परमात्मा के निराकार, सर्वज्ञ, सर्वशक्तिवान गुणों के सागर के रूप में पहचानने में मदद करेंगे। तो आइए आप भी सम्बन्ध जोड़ें।




