परमात्मा हमेशा हमें मुरलियों में कहते हैं कि जब कोई आत्मा महसूस कर रही है तो उस समय उसकी विशेषता का रियलाइज़ेशन दो। आपके अन्दर जो है ना ये बात बहुत अच्छी है। ये चीज़ें बहुत अच्छी है इसीलिए हम तो हमेशा आपकी यही क्वालिटी को देखते हुए आपके प्रति यही शुभ भावना रखते हैं कि आप इन्हीं क्वालिटीज़ के आधार पर आगे आओ।
जब कोई व्यक्ति बहुत गुस्से में होता है और उसके सामने अगर आप थोड़ा भी उस वक्त उसको अच्छी भावना से भी बोलने जाओ तो वो व्यक्ति क्योंकि इतना कमज़ोर है कि वो स्वीकार नहीं कर पाता है। और उस समय ऐसा होता है कि जैसे आग में घी डाल दिया तो आग और ही भभक जाती है। तो ऐसे भभकने के बजाय आप शांत रहो। फिर आप सोचते हैं कि वो रियलाइज़ कैसे करेगा! ज़रूर रियलाइज़ होगा उसको, थोड़ा वक्त दो, स्पेस दो। और इसीलिए जब आप शांत रहते हैं, आप कुछ नहीं कहते हैं उस वक्त, तो थोड़ी देर के बाद वो खुद रियलाइज़ करेगा। आप उसको शुभ भावना का दान जरूर दो। और बाबा को ये कहो कि ये आत्मा परवश है, इस आत्मा को शक्ति दो जो ये महसूस कर सके। क्योंकि कहीं ऐसा न हो इस आत्मा का ये संस्कार बहुत ज्य़ादा तीव्र हो जाये और उसको ही जीवन में नुकसान हो। ऐसी शुभ भावना के वायब्रेशन्स हमें उसको देने हैं।
जब ऐसे वायब्रेशन्स आप उसको देते जाएंगे तो हर बार जब वो गुस्से में आता है, कुछ गलत बोलता है और आप चुप हो जाते हैं तो धीरे-धीरे उसको रियलाइज़ ज़रूर होता है अन्दर। अगर आप बोलने जायेंगे वो जस्टिफिकेशन अपना दे देगा, सिद्ध करने का प्रयत्न करेगा कि नहीं, मैं ही राइट हूँ। इसीलिए ऐसे वक्त पर चुप हो जाओ, शांत हो जाओ, उसके प्रति शुभ भावना, बहुत अच्छे वायब्रेशन्स उसके प्रति फैलाओ, तो जैसे ही उसको समय और स्पेस मिली वैसे-वैसे वो अन्दर में रियलाइज़ करता है। एक बार नहीं करेगा, दो बार नहीं करेगा लेकिन जब तीन-चार बार होगा फिर उसको रियलाइज़ होगा कि हर बार मैं बोलता हूँ और ये व्यक्ति शांत ही रहता है। तब व्यक्ति उस शांति वाले पीरियड में खुद रियलाइज़ करेगा और खुद रियलाइज़ करने के बाद वो आपके पास आयेगा ज़रूर। सॉरी भी करेगा और कहेगा कि मैं जानता हूँ कि मेरी गलती है लेकिन उस समय ये नहीं कि मौका देखकर उसको रियलाइज़ करा देना है, नहीं। परमात्मा हमेशा हमें मुरलियों में कहते हैं कि जब कोई आत्मा महसूस कर रही है तो उस समय उसकी विशेषता का रियलाइज़ेशन दो। आपके अन्दर जो है ना ये बात बहुत अच्छी है। ये चीज़ें बहुत अच्छी हैं लेकिन कभी-कभी क्या होता है पानी फिर जाता है इन सबके ऊपर। तो ये सारी अच्छी क्वालिटीज़ जो है वो ढक जाती हैं। इसीलिए हम तो हमेशा आपकी यही क्वालिटी को देखते हुए आपके प्रति यही शुभ भावना रखते हैं कि आप इन्हीं क्वालिटीज़ के आधार पर आगे आओ।
इसलिए हम फील नहीं करते हैं लेकिन ज़रूर है कि आप इन्हीं क्वालिटीज़ जितना डेवलप करेंगे और अच्छा होगा आपके लिए, आपके भविष्य के लिए, तो उस व्यक्ति को अन्दर में इतना गदगद हो जाएगा कि देखो मैं अपनी कमज़ोरी के वश होता रहा लेकिन इस व्यक्ति ने मेरी जो पॉजि़टिव साइड है उसको देखा। उसका आपके प्रति और भी सम्मान बढ़ जाएगा, मान हो जाएगा, कि नहीं आप जो कहेंगे, जैसे कहेंगे अब मैं वैसे करूंगा। अब मैं अगर अपनी कमज़ोरी के वश होता हूँ उसी समय आप मुझे कह सकते हैं, मैं बुरा नहीं मानूंगा।
फिर वो सचमुच धीरे-धीरे परिवर्तित हो जाएगा। आपके संग में उसको भी कुछ अच्छे वायब्रेशन्स मिलेंगे, वो अपने आपको भी सशक्त ही महसूस करेगा। इसीलिए वो सदा ही आपके साथ रहना चाहेगा आपके सानिध्य में रहना चाहेगा, आपसे दूर नहीं जाना चाहेगा। तो इसीलिए आवश्यकता है कि रियलाइज़ेशन कराना है तो उसकी अच्छाइयों का रियलाइज़ेशन कराओ। किसी की कमज़ोरी का रियलाइज़ेशन कराके जंग नहीं जीतते हैं। लेकिन उसकी अच्छाइयों का रियलाइज़ेशन कराके ज़रूर एक जंग जीत जाएंगे।




