प्रश्न:- आप जब बाहर जाती हैं तो क्या मधुबन की चिंता रहती?
उत्तर :- मधुबन से बाहर जाते तो मुझे चिंता नहीं रहती, परन्तु जब कोई काम-काज हो तो समझते दादी प्रेजेन्ट होनी चाहिए। बहुत टाइम दूर नहीं होनी चाहिए। सेवा के निमित्त याद करते। बाकि सीजन के समय मुझे कोई सिरदर्द नहीं होता। बाबा के कार्य में व्यस्त रहो तो कभी कोई थकावट महसूस नहीं होती। मैं 18 घंटा भी सेवा में बिज़ी रहती लेकिन कभी ऐसी थकावट नहीं होती। 10 मिनट भी आँख मीची तो फ्रेश हो जाती। मैं नींद करने जाती तो आधे मिनट में नींद आ जाती। मैं किसी बात के चिंतन व चिंता में अपनी नींद नहीं फिटाती। न किसी बात का इफेक्ट मेरी तबियत पर आता। बाबा का थैंक्स है – मुझे कभी मन का या मुख का रोना आता नहीं। बाबा ने स्थिर रहने की, सामना करने की शक्ति दी है। इसलिए बाबा का ह्रश्वयार है, कृपा है… चलती बाबा के नाज पर हूँ, बाबा के सिवाए मेरा और कुछ नहीं। बाबा ने हमारे ऊपर सारी सृष्टि को पावन करने की जि़म्मेवारी रखी है। यह हमारा संगम पर कर्तव्य है। इसलिए यहाँ रहते विश्व के प्लान चलते। देश-विदेश बुद्धि में घूमता रहता। बाबा के सब बच्चे याद आते। वह याद करते तो हमें भी याद आते। पर याद आते भी याद नहीं। बाबा की सीजन होती तो भल कितना भी काम बढ़ जाता, एक का 10 गुणा काम हो जाता लेकिन मुझे बोझ महसूस नहीं होता। मैं ऐसा कभी नहीं सोचती कि अब कौन इतना झंझट करे। बाबा के बच्चे आते, सभी कोखुशी होती। मुझे उन सभी का प्यार मिलता। मैं बोझ समझती ही नहीं।
प्रश्न:- बाबा तो आपके साथ है ही, लेकिन आपका कोई गुप्त पुरूषार्थ है?
उत्तर :- हाँ – हर बात में मैं बाबा के साथ-साथ अपने आपमें फुल पॉवर रखती। समझो कोई संकल्प आता है तो बाबा की शक्ति उसे समाप्त कर देती। आया और फुलस्टॉप लगा। मैं किसी बात में वीक नहीं समझती। बाबा ने जो अनेकानेक शक्तियां दी हैं, उनको मैं अपने साथ रखती हूँ। यह मेरा पुरूषार्थ है। किसी भी बात में मैं वीक हूँ – तो ये मेरे रजिस्टर पर दाग हो जाए। बाबा ने हमें 100 विजयी कहा है तो किसी भी बात में मेरी माक्र्स कम न हो। न दिल में दाग, न मन में दाग, न स्थिति में दाग, न रजिस्टर में दाग… यही अटेन्शन सदा रहता है। सुबह से रात तक अपने ऊपर फुल अटेन्शन है। संकल्प पर, बुद्धि पर, आँखों पर, मुख पर सब बातों पर अटेन्शन है। मैं अटेन्शन लूज छोड़ती ही नहीं।
प्रश्न :- हम ऐसा कौन-सा पुरूषार्थ करें जो सदा आगे बढ़ते रहें?
उत्तर :- उसके लिए अपना रजिस्टर हर बात में राइट रखो। किसी भी बात में रजिस्टर पर दाग न आये। मन्सा, वाचा, कर्मणा हर बात में अपना रजिस्टर बिल्कुल साफ, स्वच्छ, सच्चा, राइट रहना चाहिए। यही है आगे बढऩे का पुरूषार्थ।
प्रश्न :- यदि हमें माला में आने की या सम्पूर्ण बनने की इच्छा है, तो क्या इसे कामना नहीं कहेंगे?
उत्तर :- यह कामना नहीं – यह पुरूषार्थ है। श्रेष्ठ पुरूषार्थ का लक्ष्य तो हरेक को रखना चाहिए। अगर लक्ष्य श्रेष्ठ नहीं होगा तो पुरूषार्थ कैसे करेंगे। जितना पुरूषार्थ करो, रेस करो उतना अच्छा है।
प्रश्न :- आपने अपनी अवस्था किस विशेष पुरूषार्थ से ऐसी बनाई है? क्या आपका शुरू से ही ऐसा पुरूषार्थ है?
उत्तर : – मेरा हर धारणा पर पूरा अटेन्शन है। बाबा माना धारणामूर्त। मेरे से किसी भी प्रकार की देह अभिमान के वश गलती नहीं होनी चाहिए। अगर रिंचक हो जाएगी तो मैं उसे पूरा कवर करुँगी, मिटा दूंगी। मुझे उसे मिटाने में 5 सेकण्ड भी नहीं केवल सेकण्ड लगता है। आदि से ही मेरा अपनी धारणाओं पर अटेन्शन है। सेन्टर पर रहते भी मैं हमेशा यह ध्यान रखती थी कि ऐसा कोई कर्म न हो जो मेरी रिपोर्ट निकले या मेरी शिकायत बाबा तक जावे।




