स्वप्न दोष से बचने की विधि
कई कहते हैं कि हम व्यर्थ कर्म में नहीं आते लेकिन हमें खराब स्वप्न आते हैं। अगर किसी को व्यर्थ व विकारी स्वप्न, लगाव के स्वप्न आते हैं तो अवश्य सोने के समय अलबेलेपन में सोये हैं। चेक करो – सोते समय बापदादा को सारे दिन का पोतामेल देकर खाली बुद्धि करके सोये? ऐसे नहीं कि थके हुए आये और बिस्तर पर सोने चले गए, यह भी अलबेलापन है। दिन भर में भल चाहे विकर्म भी नहीं किया हो, संकल्प भी नहीं किया लेकिन गंदे स्वप्न, अलबेलापन की सज़ा है।
बाप का फरमान है ही – सोते समय सदा अपनी बुद्धि को खाली करो फिर बाप के साथ सो जाओ, अकेले नहीं सो जाओ। अकेले सोते हो ना तभी बुरे स्वप्न आते हैं। अगर बाप के साथ सोयेंगे तो कभी ऐसे बुरे स्वप्न ही नहीं आ सकते। बच्चे फरमान को पूरा नहीं मानते हो तो अरमान मिलता है अर्थात् सुबह को उठकर के दिल में सोच चलता है ना कि मेरी पवित्रता स्वप्न में खत्म हो गई। यह कितना बड़ा अरमान बर्बाद होता है, कारण है – अलबेलापन। जैसे आया वैसे, यहाँ-वहाँ की बातें करते-करते नहीं सो जाओ। व्यर्थ बातों का वर्णन करते-करते सोना यह भी अलबेलापन फरमान का उल्लंघन है।
अगर और टाइम नहीं है और जरुरी बातें हैं तो सोने वाले कमरे में नहीं बात करना लेकिन कमरे के बाहर जाकर दो सेकण्ड में एक-दो को जो बातें हैं वह सुना दो, परन्तु सोते-सोते नहीं सुनाओ। बापदादा तो सब कुछ देखते हैं ना कि, बच्चे सोते कैसे हैं। बापदादा एक सेकण्ड में सारे विश्व का चक्कर लगा लेते हैं। वतन की टीवी में भी देखते हैं कि सो कैसे रहे हैं, बातें कैसे कर रहें है, सोते समय क्या- क्या देख रहे हैं, कहीं-कहीं तो कोई-कोई बातें करते-करते 12 बजा देते हैं इसलिए बाप के हर फरमान पर चलते चलो तो स्वप्न में भी कभी हार नहीं होगी और हर अरमान पूरे ना हों यह हो नहीं सकता।




