एक खिलाड़ी दौड़ प्रतियोगिता की तैयारी कर रहा था। वह हर बार अभ्यास में गिर जाता, कभी ट्रैक पर फिसलता, तो कभी सांस फूल जाती। लोग उसका मज़ाक उड़ाते – ”तुमसे नहीं होगा!”
एक दिन कोच ने उसे एक लकड़ी दिखाई और कहा – ”इसमें एक कील ठोकनी है, लेकिन हर चोट की कीमत है।” खिलाड़ी ने कील ठोकने की कोशिश की, पर कई बार हथौड़ा उसकी उंगलियों पर पड़ गया। वह दर्द से परेशान हो गया और बोला – ”इतना दर्द क्यों?”
कोच ने मुस्कुराकर कहा – ”जिस दिन यह कील अंदर धँस जाएगी, वही दिन सफलता का होगा। लेकिन हर चोट, हर असफलता, हर गिरना … ये सब उसकी सफलता की कीमत है।”
खिलाड़ी ने यह बात दिल में बैठा ली। वह गिरता, फिर उठता, फिर दौड़ता। उसकी मेहनत बढऩे लगी। कुछ महीनों बाद उसकी प्रतियोगिता में उसने पहला स्थान हासिल किया। जब उसने ट्रॉफी पकड़ी, उसे कोच की वह बात याद आई – ”सफलता मुफ्त नहीं मिलती, हर संघर्ष उसकी कीमत बनकर चुकाना पड़ता है।”
सीख : असफलता रास्ता नहीं रोकती – वह हमें सफलता के लिए तैयार करती है।




