मुख पृष्ठकथा सरिताअधूरी सीढ़ी भी काफी है

अधूरी सीढ़ी भी काफी है

एक युवक पहाड़ की चोटी पर पहुँचने का सपना देखता था। जब भी चढ़ाई शुरू करता, थोड़ी दूरी तय करके ही वापस लौट आता। उसे लगता था कि रास्ता बहुत लंबा है और वह इसे पूरा नहीं कर पाएगा।

एक दिन उसे एक बुज़ुर्ग संत मिले। युवक ने अपनी समस्या बताई। संत उसे पास की एक पुरानी सीढ़ी के पास ले गए। सीढ़ी टूटी हुई थी और केवल पाँच पायदान ही बचे थे। संत बोले – ”इस सीढ़ी पर चढ़कर दिखाओ।”

युवक ने कहा – ”संतजी, यह सीढ़ी अधूरी है, इससे मैं ऊपर कैसे पहंचूंगा?”

संत मुस्कुरा कर बोले – ”बिल्कुल वैसे ही जैसे तुम अपने सपने तक पहुँचोगे – एक-एक कदम बढ़ाते हुए। पूरा रास्ता दिखना ज़रूरी नहीं, पहला कदम उठाना ज़रूरी है।”

युवक को बात समझ आ गई। उसने पहाड़ चढऩा शुरू किया, इस बार बिना सोचे कि रास्ता कितना बाकी है। वह केवल अगले कदम पर ध्यान देता रहा। कई घंटों की मेहनत के बाद वह आखिरकार चोटी तक पहुँच गया।

शिक्षा : जि़ंदगी में पूरा रास्ता एक साथ दिखना ज़रूरी नहीं। पहला कदम हिम्मत से उठाओ, रास्ता खुद ब खुद बनता जाता है।

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