मुख पृष्ठराज्यमध्य प्रदेश।अलीराजपुर : बीती बातों को बीती करना यही वास्तविक होली है

अलीराजपुर : बीती बातों को बीती करना यही वास्तविक होली है

हर्षोल्लास के साथ ब्रह्मा कुमारीज में मनाया गया होली उत्सव

अलीराजपुर,मध्य प्रदेश। ईश्वरीय संग के रंगों में रंगे रहना ही सच्ची होली मनाना है। ऋतु परिवर्तन के साथ साथ सत्-चित्-आनन्द स्वरूप शिव के ज्ञान-गुणों से अलंकारी बने रहना ही सच्ची-सच्ची होली मनाना है। इससे उत्पन्न उमंग-उत्साह जीवन को शीतल-सुखदायी बनाता जायेगा। मायावी सभी विकारों के दुःखों का रंग स्वतः उतर जायेंगे। ज्ञान-योग-धारणा-सेवा को अपनाने से अन्य आत्मायें भी पवित्र-सुखी होने लगेंगी। सद्वविचारों के साथ इस पावन पर्व को मनाने पर आपसी वैर-भाव, राग-द्वेष मिट जाते हैं। ‘होनी थी वे बातें हो गयी’ इस भाव से होली मनाई जाये तो नये साल की शुरुआत शुभ कर्मों से होगी।
होली सारे भारत के साथ विश्व का मंगलोत्सव है। इस समय पेड़-पौधों के साथ तन और मन भी आभायुक्त हो जाते हैं। अनाज की बालियों को ‘होला’ कहा जाता है। होली की आग में नये अनाज की बालियाँ भून कर सगुन के रूप में बाँटे जाने के कारण ही इस त्योहार का नाम ‘होली’ पड़ा है। अन्न को संस्कारित करके स्वीकार किये जाने के कारण होली उच्च आदर्शों व संस्कृति की संवाहक है। बसन्त में सूर्य उत्तरायण होकर समूची प्रकृति में उल्लास, यौवन और नई प्रेरणायें भरता हैं। उमड़-घुमड़ कर वातावरण में पवित्रता और सम्पन्नता आने से यह समय आध्यात्मिक उत्थान के लिए बड़ा उपयोगी होता है। यह विचार इंदौर से पधारे ब्रह्मा कुमार नारायण भाई ने दीपा की चौकी पर स्थित ब्रह्माकुमारी सभागृह में होली के अवसर पर नगर वासियों को संबोधित करते हुए बताया। इस अवसर पर सेवा केंद्र संचालिका ब्रह्माकुमारी माधुरी दीदी ने सभी को होली की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि होली केवल रंगों का ही नहीं बल्कि मन के विकारों को त्यागकर प्रेम, शांति और पवित्रता के रंग में रंगने का भी पर्व है। उन्होंने सभी को जीवन में सकारात्मकता और भाईचारे का संदेश अपनाने की प्रेरणा दी।
सोडवा से पधारी ब्रह्माकुमारी प्रतिभा बहन ने होली के आध्यात्मिक रहस्य को स्पष्ट करते हुए बताया कि सच्ची होली तब है जब हम अपने अंदर के क्रोध, ईर्ष्या और नकारात्मकता को त्यागकर आत्मिक शांति और खुशी का अनुभव करें।
इससे समाज में सकारात्मक परिवर्तन आ रहा है और ऐसे उत्सव लोगों को आपसी प्रेम और एकता का संदेश देते हैं।
अंत में सभी उपस्थित भाई-बहनों ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं तथा आनंद और उत्साह के साथ इस पावन पर्व को मनाया। पूरे कार्यक्रम का वातावरण आध्यात्मिकता, प्रेम और उमंग से सराबोर रहा।

RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments