अलीराजपुर,मध्य प्रदेश। वंदे मातरम् स्वर्णिम भारत थीम पर विश्व महिला दिवस का आयोज शहर के आलीराजपुर स्थित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय सेवा केंद्र के माध्यम से विश्व महिला दिवस का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य विषय वंदे मातरम् – स्वर्णिम भारत रखा गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अतिथि एवं नगर के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में इंदौर धार्मिक विंग के प्रभारी बीके नारायण ने अपने उद्बोधन में कहा कि विश्व महिला दिवस का आयोजन महिलाओं के सम्मान और उनकी सामाजिक स्थिति को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 1936 में हुई थी और शुरुआत से ही महिलाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से इसे ब्रह्माकुमारी नाम दिया गया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समाज में महिलाओं से जुड़ी कई समस्याएं और चिंताएं हैं, जिनका समाधान आध्यात्मिकता के माध्यम से संभव है। यदि मनुष्य स्वयं को आत्मा समझकर परमात्मा से जुड़ता है, तो जीवन में समानता, शांति और सम्मान की भावना विकसित होती है।
कार्यक्रम में बीके माधुरी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि आज की महिलाएं हर क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। उनकी क्षमता, दक्षता और सहनशक्ति को कम करके नहीं आंका जा सकता। उन्होंने कहा कि समाज के विकास के लिए महिलाओं का सम्मान और सशक्तिकरण अत्यंत आवश्यक है।
सोंडवा महाविद्यालय की प्रोफेसर डॉ. रश्मि भवर ने कहा कि जो व्यक्ति और समाज महिलाओं का सम्मान नहीं करता, उसका विकास संभव नहीं है। उन्होंने सतयुग के उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय महिलाओं को देवियों के रूप में सम्मान दिया जाता था, इसलिए भारत स्वर्णिम भारत कहलाता था।
विधि महाविद्यालय की प्रोफेसर संगीता राठौर ने अपने संबोधन में महिलाओं के अधिकारों और उनकी सुरक्षा के लिए बनाए गए विभिन्न कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी। वरिष्ठ समाज सेविका शशि कला बहन ने बताया कि महिलाओं को महिला शब्द की महीनता में जाकर अपनी आंतरिक शक्तियों को जागृत करना और अपने को देवी गुणों से संपन्न करना यही पहला कर्तव्य होता है।
नगर की सुप्रसिद्ध कवयित्री सुरभि जैन ने बताया कि त्याग और बलिदान करने में मां के रूप में महिलाएं तो आगे है , लेकिन वहीं दूसरी ओर पिता के रूप में पुरुष भी अपना तन मन धन और समय अपने बच्चों तथा परिवार के ऊपर बलिहार करता है। हर बात को चुपचाप सहन कर अपने आप को मजबूत शक्तिशाली दिखाना यह विशेष गुण एक पिता में होता है। महिलाएं भी अष्टभुजा धारी मां स्वरूप बन अपनी हर जिम्मेवारी को बखूबी निभाती है वह एक के साथ कई कार्यो को संपन्न करती है ।उन्होंने कविता के माध्यम से समाज की आदि मध्य अंत कालीन सभ्यता का वर्णन भी किया।
राठौर समाज की अध्यक्ष कीर्ति बेन राठौर ने महिलाओं को और अधिक सशक्त बनाने तथा उन्हें उनके अधिकार दिलाने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम में अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार व्यक्त किए। बहन सुनीता जी बेस्ट ऑफ एयर उनका सम्मान भी किया गया और उन्होंने बताया कि आज भी भारत की बेटियां सिर्फ घर के कामकाज में लग जाने के कारण पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पाती और निरक्षर रह जाती है अतः हमारा कर्तव्य भी है हम सब अपने घर परिवार तथा गांव की बेटियों को शिक्षा से संपन्न कराने की जिम्मेवारी उठाएं ताकि वह आत्मनिर्भर बन सके।
कार्यक्रम का संचालन बीके ज्योति ने किया। अंत में सभी अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।






