मुख पृष्ठदादी जीदादी हृदयमोहिनी जीसाधना शब्द का अर्थ ही है एकाग्रता

साधना शब्द का अर्थ ही है एकाग्रता

हम सबकी साधना व योग क्या है? एक बाबा को अपना संसार बना लेना, उनके साथ अपने सर्व सम्बन्ध जोडऩा, यही हमारी सच्ची साधना है, क्योंकि जितना सम्बन्ध समीप का होता है उतना उसकी याद स्वत: रहती है। हमारा बाबा सर्व सम्बन्ध निभाने वाला है, बाबा से हमें अनेकानेक प्राप्तियां हुई हैं, उन सबका अनुभव है। तो साधना अर्थात् एक बाबा की याद और उस साधना में एकाग्रता।

भक्ति मार्ग में भक्त लोग भिन्न-भिन्न रूप से साधना करते हैं। जब तक वो अपने लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर लेते, दर्शन नहीं हो जाते तब तक एक टांग पर ही खड़े रहेंगे व हठयोग की साधना करते रहेंगे। यहाँ तो ऐसे हठयोग की, एक टांग पर खड़े होने की बात नहीं है, हम तो अपने मन-बुद्धि को एक में लगाते हैं- यही हमारी साधना है।

साधना शब्द का अर्थ है एकाग्रता, उसमें ज़रा भी हलचल न हो। जहाँ एकाग्रता होती है वहाँ जिस स्थिति का अनुभव करना चाहते हैं, वह चाहना एकाग्रता के बल से पूर्ण हो जाती है। जैसे परमधाम में हम मन-बुद्धि द्वारा एक सेकण्ड में पहुंच तो जाते हैं परन्तु उसमें सदैव एकाग्रता हो अर्थात् एकरस अवस्था हो और हमेशा उसी का अनुभव होता रहे। समझो, अभी आत्मा अशरीरी बनके परमधाम में बाबा के साथ पहुंच गई, स्थिति वह हो गई फिर कोई भी व्यर्थ संकल्प या कोई काम का संकल्प भी न आये, कोई भी हलचल आकर्षित न करे, यही है सच्ची साधना। अगर एकाग्रता हिल जाती है तो वह साधना नहीं है। साधना का अर्थ ही है एक ही स्थिति में एकाग्र हों, जितना समय चाहें उतना समय हम उस स्थिति में स्थित हो जाएं।

एक होता है पुरुषार्थ करना, जैसे हमने याद किया बाबा, मैं अशरीरी आत्मा हूँ। बाबा जैसे आप हो वैसे मैं भी आत्मा ज्योति हूँ,मैं भी परमधाम निवासी हूँ, अपने घर में बाबा आपसे मिलने आ रही हूँ संकल्प से ऐसा पुरुषार्थ करते हैं लेकिन जब साधना की स्थिति होती है तो उसमें पुरुषार्थ खत्म हो जाता है और उसी स्थिति में स्थित हो जाते हैं। हिलते-डुलते नहीं हैं और जितना समय हम चाहें उतना समय हम बाबा की याद में खो जाएं। ऐसी पॉवरफुल साधना हो जो हम अपने मन को एकाग्र करके उसमें टिक सकें।

कभी-कभी हमारी रूचि होती है सूक्ष्मवतन में ब्रह्मा बाबा, शिवबाबा से अव्यक्त रूप में मुलाकात करें, तो वहाँ भी हलचल नहीं है, एकाग्रता है। एकाग्रता से मन को ऐसा स्थित करो जो मन हलचल में न आये। ऐसी साधना ही कर्मातीत अवस्था की निशानी है। जिस लक्ष्य से हम योग करने के लिए बैठें, उस समय सेवा का संकल्प भी न आये, ऐसी कन्ट्रोलिंग पॉवर हो। तो साधना का अर्थ है एकाग्रता से उस श्रेष्ठ स्थिति में स्थित रहना।

साधना में कोई भी साधन अपनी ओर खींचे नहीं। साधन, साधना को हिलावे नहीं। साधन यूज़ तो करना है लेकिन हमारा मन खींचे नहीं। जैसे कमल पुष्प कीचड़, पानी में रहता है लेकिन पानी की एक बूंद भी उसको स्पर्श नहीं करती है। ऐसे साधनों को यूज़ करने के लिए कोई मना नहीं है लेकिन साधन हमारी स्थिति को नीचे-ऊपर न करें।

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