मुख पृष्ठब्र.कु. अनुजतकदीर की तस्वीर

तकदीर की तस्वीर

कहावत है कि सभी इस दुनिया में अपना भाग्य लेकर ही आये हैं। लेकिन उस भाग्य को हमें अपने हिसाब से, अपने दायरे से, अपनी मर्यादाओं से, अपनी धारणाओं से चमकाना है। लेकिन कहा जाता है तकदीर को जगाने के लिए या तकदीर को और अच्छा बनाने के लिए हमको कुछ तदबीर करनी पड़ती है। तदबीर का अर्थ है- पुरुषार्थ करना पड़ता है, कर्म करना पड़ता है और उस कर्म को करने से हमारी तकदीर चमकती है, या आगे जगती है। लेकिन इसमें एक बहुत बड़ा द्वंद है कि बहुतों की तकदीर बहुत अच्छी है, कर्म भी बहुत अच्छा है लेकिन तकदीर फिर भी आगे नहीं जगती, कारण क्या है? तो इस कारण को समझते हैं और उसके निवारण को भी समझते हैं।

कहा जाता है कि इस दुनिया में पुरुषार्थ, भाग्य और कर्म इन तीनों को समझने के लिए ऐसे इसको समझा जा सकता है कि कर्म या पुरुषार्थ, भाग्य या प्रालब्ध, ये दोनों चीज़ें एक के ऊपर निर्भर करती हैं। और वो एक है हम सबकी चेतना, हम सबकी जागृति, हम सबका जगना। जब किसी से एक बार प्रश्न पूछा गया कि भाग्य बड़ा है इस दुनिया में या कर्म बड़ा है, या कोई और एक चीज़ है जो हम सबसे बड़ी है। तो कहते हैं- ना भाग्य बड़ा है, ना कर्म बड़ा है। हमारे पास एक चेतना है वो सबसे बड़ी है। उसी चेतना को हम बुद्धि कहते हैं, समझ कहते हैं, अंडरस्टैंडिंग कहते हैं। वो अगर हमारे अंदर है तो हमारा कर्म भी अच्छा होगा और जो भाग्य हमको मिला है माता-पिता से या हमारे कर्मों से, उसको हम बहुत श्रेष्ठ तरीके से निभा भी पाएंगे।

तो प्रश्न ये है कि हम सबका भाग्य तो अच्छा ही था, शुरु से मिला ही अच्छा है, और जिसको नहीं मिला है उसने अपनी बुद्धि से, अपनी समझ से उसको बनाने की कोशिश की। लेकिन समझ वो नहीं जो बाहर की दुनिया के इंसान हमको सिखाते हैं, समझ वो जिसमें कल्याण है, जिसमें केवल कल्याण है, तो हमारे कर्म के अन्दर बरकत होती है। कर्म हमसेे कभी खराब हो ही नहीं सकते। लेकिन बाहर की जो बुद्धि हमको मिली है उसमें मिक्शयरिटी है, उसमें सबकुछ मिक्स करके बताया जाता है।

तो अगर हमारी बुद्धि, हमारी चेतना या हमारा आत्मिक भाव या हमारा तीसरा नेत्र अगर खुल जाता है तो हमारा भाग्य बदल जाएगा और अगर भाग्य नहीं भी बदला है, तो हमारे कर्म अच्छे होने लग जायेंगे, तो भी भाग्य बदल जाएगा। इसलिए तराजू को अगर तीनों बातों के लिए एक साथ रखा जाए, तराजू का उदाहरण दिया जाए तो एक तरफ भाग्य को रख दीजिए, प्रालब्ध को रख दीजिए एक तरफ कर्म को रख लीजिए और बीच में जो बैलेंस बनाने का काम है वो बुद्धि का काम है। इसलिए परमात्मा ने आकर हमको बुद्धि दी, समझ दी, समझाया कि अगर अपनी तकदीर को जगाना है और जो तस्वीर हमको दिखाई कल्याणकारी वाली, एक दिव्यगुणों वाली, दिव्यता वाली, उस तस्वीर को प्राप्त करने के लिए हमें सबसे पहले अपनी बुद्धि को पॉवरफुल बनाना पड़ेगा, शक्तिशाली बनाना पड़ेगा। अब हमारी बुद्धि काम क्यों नहीं करती है, आज इसको समझ लेना है।

परमात्मा कहते हैं कि इस दुनिया में तीन चीज़ों से हमको बचना है – एक आलस्य से, एक अलबेलेपन से, तीसरी बहाने बाजी से। अब तीनों का रिज़न समझ लेते हैं। आलस्य अब हमारे अन्दर तब घर कर जाता है, बैठ जाता है जब हमारे अन्दर रचनात्मकता खत्म हो जाती है। जब हम कुछ क्रिएटिव नहीं करते हैं तो हम धीरे-धीरे आलसी हो जाते हैं। तो हमारे आलस्य को भगाने के लिए क्रिएटिविटी चाहिए, या रचनात्मकता चाहिए, कुछ नयापन चाहिए, और बहाने बाजी जो हम बहुत ज्य़ादा करते हैं, किसी के लिए बार-बार बहाना बनाते हैं तो उसका एक मात्र कारण है कि हमारा बाहरी दुनिया से आकर्षण है। चाहे वो किसी का भी हो सकता है, मेल का हो सकता है, फिमेल का हो सकता है या फिर वस्तु, व्यक्ति, पदार्थ कुछ भी हो सकता है, लेकिन बाहरी दुनिया का आकर्षण हमारे को बहाना बनाने के लिए विवश करता है।

हम बार-बार बहाना बनाएंगे कि नहीं आज ये काम है, आज वो काम है, वो हमारे अन्दर का अट्रैक्शन है, आकर्षण है जो बाहरी दुनिया से हमको जोड़ता है और जो बीच वाला है जिसको हम अलबेलापन या केयरलेसनेस कहते हैं इन दोनों के द्वारा अपने आप हमारे अन्दर आ जाता है। और जब ये आता है तो हमारी बुद्धि नष्ट हो जाती है। इसीलिए परमात्मा ने कहा कि चेतना की जागृति के लिए हमको सबसे पहले इन तीनों को जीतना ज़रूरी है और जब हम इन तीनों को जीत जाते हैं तो क्या जबरदस्त हमारा भाग्य बनता है और उस तकदीर की जो तस्वीर बनती है उसको देखने के लिए पूरी दुनिया आपके सामने नतमस्तक होती है। लेकिन वो तकदीर, वो तस्वीर केवल कल्याणकारी विचारों वाली है। जब हमारे मकसद में कल्याण होता है ना तो हमसे गलती नहीं होती, इसीलिए कल्याणकारी भाव से जो कर्म हुआ वो कर्म सबसे सही है। बाकी सारे कर्म में कुछ न कुछ खोट है। इसी बात को लेकर आप आगे बढ़ेंगे तो निश्चित रूप से सफलता भी मिलेगी और लोग सराहेंगे भी और उसका असर भी आपको नहीं होगा।

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