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चंडीगढ़ : सेक्टर-33 स्थित राजयोग भवन में 6 ब्रह्मा कुमारी बहनों का समर्पण समारोह

चंडीगढ़: सेक्टर-33 स्थित राजयोग भवन में 6 ब्रह्मा कुमारी बहनों के समर्पण समारोह का एक अत्यंत भव्य आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस पावन अवसर पर ब्रह्मा कुमारीज संस्थान की अतिरिक्त प्रशासनिक प्रमुख आदरणीय जयन्ती दीदी जी (मधुबन), पंजाब जोनल हेड आदरणीय उत्तरा दीदी जी (चंडीगढ़), आदरणीय प्रेम दीदी जी (फरीदकोट), आदरणीय लक्ष्मी दीदी जी (निर्देशक, सोनीपत रिट्रीट सेंटर), आदरणीय अनीता दीदी जी (मुख्य संचालिका, सेक्टर-15 एवं पंचकुला सेवाकेंद्र) तथा आदरणीय विजय दीदी जी (मुख्य संचालिका, जींद) मंचासीन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में माननीय चीफ जस्टिस दया चौधरी जी की गरिमामयी उपस्थिति ने समारोह की शोभा को और बढ़ाया। मंच संचालन आदरणीय कविता दीदी जी द्वारा किया गया।
अपने सम्बोधन में आदरणीय जयन्ती दीदी ज* ने कहा कि जब माता-पिता अपनी कन्या के लिए वर चुनते हैं तो वे उसके गुण, घर और परिवार को देखते हैं, फिर भी यह निश्चित नहीं होता कि कन्या सदा सुखी रहेगी। किंतु इस अलौकिक एवं दिव्य समर्पण समारोह के माध्यम से कन्या को स्वयं परमपिता, जगत नियंता परमात्मा ही वर के रूप में प्राप्त हो जाते हैं। उन्होंने आगे कहा कि जहाँ तक घर की बात है, तो विश्व के 140 देशों में फैले सेवाकेंद्र ही कन्या के अपने घर हैं, और परिवार इतना विशाल है कि 10,000 से अधिक समर्पित भाई-बहन सेवाओं में लगे हुए हैं, जो एक-दूसरे को सहयोग देकर निरंतर आगे बढ़ाते हैं।
वहीं आदरणीय अनीता दीदी जी ने अपने सम्बोधन में कहा कि इस संस्थान में केवल वही कन्याएं समर्पित होती हैं जिन्हें स्वयं परमात्मा द्वारा चुना गया होता है। ये वे आत्माएं होती हैं जो सेवा और त्याग के भाव को अपनाकर, परमात्मा के महावाक्यों का गहराई से मनन-चिंतन करती हैं तथा हर क्षण सेवा में तत्पर रहती हैं। उन्होंने बताया कि लगभग 5 वर्षों तक सेवाकेंद्र पर रहकर संस्था और सेवाओं को समझने के पश्चात ही उनका समर्पण परमात्मा एवं निमित्त आत्माओं द्वारा स्वीकार किया जाता है। आज का यह अवसर अत्यंत हर्ष का विषय है कि इन 6 कन्याओं का समर्पण स्वयं भगवान द्वारा स्वीकार हुआ है।

आदरणीय लक्ष्मी दीदी जी ने अपने सम्बोधन में समर्पित होने वाली बहनों की प्रशंसा करते हुए कहा कि आज की स्वार्थपूर्ण दुनिया में, जहाँ लोग केवल अपने और अपनों के बारे में सोचते हैं , इन बहनों ने पूरे समाज और विश्व कल्याण के लिए अपना जीवन समर्पित किया है। उन्होंने कहा कि ये वे सच्ची “पार्वतियां” हैं जो आज शिव साजन को वरण कर रही हैं, जो जीवनभर उनकी रक्षा करेंगे। दीदी ने यह भी स्पष्ट किया कि यह श्वेत वस्त्र किसी विधवा का प्रतीक नहीं, बल्कि साक्षात माँ सरस्वती का प्रतीक है—जो पवित्रता, ज्ञान, गुणों और शक्तियों का प्रतीक है। उन्होंने समर्पित बहनों की तुलना नवरात्रि की देवियों से करते हुए उनका मान बढ़ाया ।
कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत नृत्य से हुई । इसके पश्चात छोटे-छोटे बच्चों ने मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से परमात्मा के प्रति समर्पण भाव को व्यक्त किया l समर्पण करने वाली 6 बहनों ने अपने जीवन को ईश्वरीय सेवा के लिए समर्पित करने की पावन प्रतिज्ञा की। इसी के साथ बहनों के माता-पिता ने भी सभा के समक्ष स्वेच्छा से अपनी कन्याओं को ईश्वरीय सेवा के मार्ग पर अग्रसर होने की स्वीकृति प्रदान की।
समारोह के दौरान सम्बन्धियों का स्नेह मिलन कार्यक्रम भी आयोजित किया गया, जिसमें परिवारजनों ने भाव विभोर होकर बहनों को शुभकामनाएं दी । अंत में सभी के लिए ब्रह्मा भोजन की व्यवस्था की गई। ईश्वरीय सौगात एवं टोली वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। समापन अवसर पर सभी वरिष्ठ दीदियों ने समर्पित होने वाली बहनों एवं उनके परिवारजनों को इस महान निर्णय के लिए पुनः हार्दिक अभिनन्दन एवं बधाई दी। यह समर्पण समारोह उपस्थित सभी भाई-बहनों के लिए एक अविस्मरणीय, प्रेरणादायक एवं आत्मिक अनुभूति से भरपूर अवसर सिद्ध हुआ।

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