कमी को दूर करने का सहज साधन
जो भी संकल्प आए, पहली बात, वह संकल्प बाप को तुरंत अर्पण कर दो। दूसरी बात, जो भी कमी-कमज़ोरी का संकल्प आए, उसको खत्म करने के लिए दृढ़ संकल्प करो और तीसरी बात, मैं बाप का और बाबा मेरा। जब क्रक्रमेरा बाबाञ्जञ्ज कहा तो मेरे ऊपर अधिकार होता है न, अधिकारी स्वरूप में स्थित होंगे तो अधीनता ऑटोमेटिकली निकलती जाएगी। सदा नशा रखो – विश्व के मालिक का मैं बालक हूँ, बालक सो मालिक भी हूँ। जब विश्व का रचयिता सर्वशक्तिवान मेरा साथी बन गया तो वहाँ क्या होगा? विजय ही होगी। अपनी जि़म्मेदारी बाप को दे दो और स्वयं को हल्का रखो। जब जि़म्मेदारी बाप को दे दी तो फरिश्ते बन गए ना! इतनी सहज बात तब कर नहीं पाते, तब मुश्किल अनुभव करते हैं। भक्ति में कहते थे, सब कर दो राम हवाले। जबकि अब राम के हवाले करने का समय आया है फिर क्यों नहीं करते हो? क्यों, क्या की हवालात में क्यों जाते हो? मेरा स्वभाव, मेरा संस्कार, मेरी वृत्ति… यह सब मेरा-मेरी कहाँ से आया? अगर मेरा-मेरी खत्म तो मुश्किलात भी खत्म।
मास्टर ज्ञानसूर्य बन कमज़ोरियों को भस्म करो – भस्म करना अर्थात् भस्म बना देना, बिल्कुल खत्म कर देना। राख को भस्म भी कहते हैं, यह भस्म बेहद की वैराग्य वृत्ति की निशानी है। सूर्यवंशी का कत्र्तव्य है- सिर्फ अपनी नहीं लेकिन औरों की भी कमी-कमज़ोरियों को भस्म कर देना, इतनी शक्ति है ना। जैसे सूर्य की शक्ति से और कोई शक्ति है क्या? चंद्रमाँ के ऊपर सूर्य है, परन्तु सूर्य के ऊपर तो और कोई नहीं है ना। चंद्रमाँ में भस्म करने की शक्ति नहीं है लेकिन सूर्य में भस्म करने की शक्ति है। ऐसे ही अब आप भी मास्टर ज्ञान सूर्य बनकर स्वयं की और सर्व की कमी-कमज़ोरियों को भस्म करो और कराओ।





