एक छोटे से गाँव में मोहन नाम का लड़का रहता था। उसका परिवार बहुत गरीब था। उसके पिता खेतों में मजदूरी करते थे और माँ घरों में काम करके परिवार चलाती थीं। मोहन पढ़ाई में बहुत होशियार था, लेकिन गरीबी के कारण उसे कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।
कई बार ऐसा होता था कि उसके पास स्कूल की फीस भरने के पैसे नहीं होते थे। किताबें खरीदने के लिए भी उसे दूसरों की पुरानी किताबों का सहारा लेना पड़ता था। फिर भी मोहन ने कभी हार नहीं मानी। वह रोज़ सुबह जल्दी उठकर पढ़ाई करता और स्कूल से आने के बाद अपने पिता के साथ खेतों में काम भी करता था।
गाँव के कई लोग उसका मज़ाक उड़ाते थे। वे कहते थे कि इतनी गरीबी में पढ़कर क्या होगा। लेकिन मोहन ने किसी की बात पर ध्यान नहीं दिया। वह हमेशा सोचता था कि शिक्षा ही उसके जीवन को बदल सकती है।
समय बीतता गया। मोहन ने अपनी मेहनत जारी रखी। जब बोर्ड परीक्षा का समय आया तो उसने दिन-रात पढ़ाई की। आखिरकार परीक्षा का परिणाम आया और पूरे जिले में मोहन ने पहला स्थान प्राप्त किया।
यह खबर सुनकर उसके माता-पिता की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। गाँव के लोग भी हैरान रह गए। मोहन को आगे की पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति मिल गई।
कई सालों बाद वही मोहन एक बड़ा अधिकारी बन गया। उसने अपने गाँव में एक स्कूल भी खुलवाया ताकि गरीब बच्चों को पढ़ाई में कठिनाई न हो।
सीख : मेहनत और दृढ़ निश्चय से कोई भी व्यक्ति अपने जीवन की परिस्थितियों को बदल सकता है।



