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जालंधर: SIGNIS India National Assembly 2026 में “Interfaith Dialogue for Peace and Unity” विषय पर विशेष संगोष्ठी आयोजित

जालंधर, पंजाब। SIGNIS (भारतीय शाखा, SIGNIS India) मीडिया पेशेवरों का एक वैश्विक नेटवर्क है, जिसका उद्देश्य संचार के साधनों का जिम्मेदारी से उपयोग करके सकारात्मक संदेश, सत्य और मानवीय मूल्यों का प्रसार करना है।

SIGNIS India (The Catholic Association for Communication) की ओर से SIGNIS India National Assembly (SINA) 2026 का सफल एवं गरिमामय आयोजन किया गया। इस वर्ष की असेंबली का थीम था — “Whispers of Hope, Communicating Peace, Growing Together, Building Futures”, जो वर्तमान समय में आशा, संवाद और सामूहिक प्रगति की आवश्यकता को दर्शाता है।
इस राष्ट्रीय असेंबली के अंतर्गत “Interfaith Dialogue for Peace and Unity” विषय पर एक विशेष संगोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न धर्मों के प्रतिष्ठित प्रतिनिधियों ने भाग लेकर शांति, एकता और आपसी सद्भाव को बढ़ावा देने पर अपने विचार व्यक्त किए।
इस संवाद सत्र में ब्रह्माकुमारीज़ की ओर से राजयोगिनी बीके संधिरा बहन (सेंटर इंचार्ज, जालंधर), सिख समुदाय से सरदार गुर साहिब सिंह (डायरेक्टर), मुस्लिम समुदाय से मौलाना मुहम्मद उस्मान (रहमानि लुधियानवी, शाही इमाम, पंजाब) तथा ईसाई समुदाय की ओर से Msgr. Michael Ani (हिन्दी: मौनसीनर माइकल एनी) (कोऑर्डिनेटर फॉर कमिशन्स, डायोसीज ऑफ जालंधर) को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया।

अपने विचार साझा करते हुए राजयोगिनी बीके संधिरा बहन ने कहा कि “शांति और एकता बाहर से नहीं, बल्कि हमारे भीतर से प्रारंभ होती है। जब व्यक्ति अपने मन को शांत और सकारात्मक बनाता है, तब वह अपने व्यवहार और संबंधों के माध्यम से समाज में भी शांति का संचार करता है। राजयोग मेडिटेशन के माध्यम से हम अपने अंदर की नकारात्मकता को समाप्त कर, आत्मिक जागरूकता के द्वारा प्रेम, करुणा और सम्मान की भावना को विकसित कर सकते हैं। यही सच्चे अर्थों में विश्व शांति और एकता की आधारशिला है।”
उन्होंने आगे यह भी कहा कि आज के समय में धर्मों के बीच संवाद (Interfaith Dialogue) अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यह हमें एक-दूसरे को समझने, स्वीकारने और साथ मिलकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
अन्य वक्ताओं ने भी अपने-अपने दृष्टिकोण से शांति, सह-अस्तित्व और भाईचारे के महत्व पर प्रकाश डालते हुए यह संदेश दिया कि विभिन्न धर्मों के बीच सकारात्मक संवाद ही एक सशक्त, समरस और शांतिपूर्ण समाज का निर्माण कर सकता है।
यह आयोजन न केवल मीडिया और संचार के क्षेत्र में सकारात्मकता को बढ़ावा देने का प्रयास था, बल्कि समाज में एकता, भाईचारे और साझा मानवीय मूल्यों को मजबूत करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।

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