परमपिता शिव परमात्मा ने 1937 में प्रजापिता ब्रह्मा के तन का आधार लेकर उनमें अवतरित होकर उनके मुख से और साक्षात्कार के माध्यम से बताया है कि नजदीक के भविष्य में नई दुनिया स्वर्ग सतयुग आने वाला है और भारत स्वर्णिम भारत होगा और यह पुरानी दुनिया कलयुग का विनाश होगा। वह सारी बातें अभी स्पष्ट सामने दिखाई दे रही है अब सृष्टि के अंतिम वेला है तो हम कर्म से बने हुए ब्राह्मण अंतिम बेला में क्या करें ।….
बेग बैगेज समेटे :- जब हमें मालूम हो गया है की नई दुनिया स्वर्ग में जाने का समय आ गया है तो हमें अपना बैग बैगेज पूरा समेट लेना चाहिए अर्थात अब नए संबंध जोड़ने नही है और नए संबंधों का विस्तार नहीं करना है । नए हिसाब किताब नहीं बनाने हैं।
अब निमित्त मात्र ट्रस्टी बन संबंध को निभाना है। अपने धंधे धोरी, नौकरी ,लौकिक प्रवृत्ति निमित्त मात्र करनी है ।अपने रोटी कपड़ा मकान की आवश्यक पूर्ति के लिए ही लौकिक नौकरी धंधा करने हैं । अब उनको ज्यादा बढ़ाना नहीं है । अब उनको ज्यादा बढ़ाने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि शिवबाबा ने कहा है जो भी देखते हो सब विनाश हो जाएगा। तो फिर पेट के लिए कमाइये पेटी के लिए नहीं, भावी पेढीओ के लिए नहीं क्योंकि अब पीढी तो चलने वाली ही नहीं है। इसलिए अपना समय दिन रात लौकिक कारोबार के पीछे अर्थात कोडियो के पीछे ना गवाए । अब ज्यादा से ज्यादा समय निकाल रूहानी सेवा ओर तपस्या में अपना समय लगाकर पुण्य की पूंजी जमा करें ।
सफल करो सफलता पाओ :- शिव बाबा का महा वाक्य हम बार-बार सुनते हैं कि किसकी डबी रही धूल में , किसकी राजा खाए , किसकी आग जलाई , किसकी चोर लुट जाइ , सफल हो उनकी जो धनी के नाम लगाएंगे । अब यह समय बिल्कुल सामने दिखाई दे रहा है तो अपना सब कुछ तन मन धन समय श्वास शक्ति सब कुछ ईश्वर सेवा में पुण्य कार्य में लगा देना है। अगर हम जानते हुए भी नहीं लगा सके तो अंतिम विनाश के समय बहुत कष्ट होगा और अफसोस होगा। समय पर न धन काम आता है , न तन काम आता है , न मन काम आता है , न जन काम आता है। समय पर एक दुवा और एक बाबा ही काम आता हैं। अपने तन मन धन को ऐसे ही नष्ट होते हुए देखकर खून के आंसू आएंगे। पश्याताप के आंसू आएंगे।
शुक्रिया करें:- परमात्मा महा वाक्य है शुक्रिया करना भी योग है । हम दिल से हमारे रक्षक खुदा दोस्त भोलेनाथ शिव बाबा का शुक्रिया करें जिसे कल्प कल्प हमको ज्ञान योग सीखकर जन्म-जन्म सुख शांति का वर्षा दिया , दिव्य बुद्धि दी , श्रेष्ठ संस्कार बनाया जिनके कारण हम आज भी सुखी संतुष्ट आनंद में जीवन जी रहे हैं ।
शुक्रिया हम प्रकृति के पांच तत्वों का करें जल अग्नि वायु आकाश पृथ्वी जिसने हमें स्वर्ग में 21 जन्म पूर्णतया सुख दिया लेकिन कलयुग अंत में भी आज भी तमोप्रधान सृष्टि होते हुए भी बहुत कुछ दे रही है । तो पांचो तत्वों का लाख-लाख शुक्रिया करें । पांचो तत्वों का बना हुआ शरीर का भी लाख लाख शुक्रिया करें ।
अपने लौकिक माता-पिता अलौकिक माता-पिता और कर्मसे बने हुए हमारे ब्राह्मण परिवार और उनमें हमारी दादिया और दादे हमारे निमित्त बहने जिनके हमारे ऊपर बहुत-बहुत एहसान है उपकार है उसका दिल से शुक्रिया करें वंदन करें उनकी दिल से प्रशंशा करे और उनका आशीर्वाद ले।
माफ करें माफी मांग ले :- यह अंतिम ब्राह्मण जन्म में और जन्म जन्म हमारे कारण जाने अनजाने में किसको भी दुख मिला होगा । कोई हमसे नाराज हुए होंगे। उनकी बेड एनर्जी आज भी हमारा पीछा करती होगी । तो सभी की सच्चे दिल से माफी मांग ले और हमें लगता है कोई व्यक्ति के कारण मुझे दुख मिला है मुझे परेशानी मिली है उनको उनके कर्म पर छोड़ते हुए उनको नादान समझते हुए उनको कमजोर समझते हुए एक बार दिल से माफ कर दे उनको बद्दुआ ना दे उनको नफरत ना करें वरना और ज्यादा ही हिसाब किताब बढ़ेगा और जन्म जन्म वह हमें मिलेंगे और दुख के निमित्त बनेंगे । इसलिए माफ करें माफी मांग ले ।
घोर तपस्या करें :- घोर तपस्या की अग्नि ही हमारे जन्म जन्म के पाप कर्म विकर्म को नष्ट करेंगे । हमारे हिसाब किताब को हल्का करने में और हमें अत्यंत सुख का अनुभव कराएंगी । हमें बाबा के नजदीक ले जाएंगी। हमें विश्व के रक्षक बना देंगी। इसलिए अब साधारण युक्त तपस्या नहीं घोर तपस्या मम्मा बाबा की तरह करें। मामा बाबा हमेशा दो तीन बजे उठकर सारे विश्व को सकाश देते थे।
संपूर्ण पवित्रता :- परमपिता परमात्मा के महा वाक्य है काम महा शत्रु है जो आदि मध्य अंत दुख देता है । काम जीत जगत जीत । पवित्रता अर्थात सिर्फ ब्रह्मचर्य नहीं परंतु ब्रह्मचारी अर्थात ब्रह्मा बाबा को पूरा फॉलो कर ब्रह्मा बाप समान बन मनसा वाचा कर्मणा स्वपन में भी पवित्रता हो। तब आपका चेहरा चलता फिरता म्यूजियम बन जाएगा । पवित्रता दुनिया की सर्वोच्च शक्ति है जिनके आगे सब को झुकना पड़ेगा । पवित्रता सुख शांति की जननी है । पवित्रता ही सबसे बड़े से बड़ी पर्सनालिटी है । पवित्रता ही सबसे बडी प्रोपर्टी है। अब हमारे जीवन में पवित्रता की पराकाष्ठा पूर्णता हो।
कृपालु दयालु रहम दिल :- आज विश्व में सुख शांति संतुष्टता कम हो रही है । आत्माएं सुख शांति की भिखारी बंद भटक रही है। चिल्ला रही है । बाबा कहते आपको उनकी आवाज नहीं सुनाई देती । अब अपने कृपालु दयालु दुख हर्ता सुखकर्ता पूर्वज स्वरूप को इमर्ज करो। दुखियों को सुख की अंजलि दो । अतः अब हमें रहम दिल बन कृपालु दयालु का पाठ बजाना है । भगवान का बच्चा मास्टर भगवान बन आत्माओं को मुक्ति जीवन मुक्ति की राह दिखानी है ।
साक्षी पन की स्थिति :- अब अंतिम समय में हम प्रवेश कर चुके हैं लास्ट सीन चल रहा है । आत्माएं अपना जन्म जन्म का पुण्य पूंजी जमा कर सुख शांति का वर्षा प्राप्त करेंगे नंबरवार पुरुषार्थ अनुसार और कहीं आत्माएं विनाश की चक्की में सरसों माफिक पीस जाएंगी । आत्माए अपना हिसाब किताब धर्मराज की सजा खाकर चुकतु करेंगी । अपने जिनको हम मानते हैं वह शायद हमसे पहले भी जाएंगे अपने पुरुषार्थ अनुसार सुखी व दुखी होकर वह हमें साक्षी होकर देखना पड़ेगा । हमें कर्मों की गति , हर एक आत्माओं का अपना भाग्य , ड्रामा कल्याणकारी है न्यायकारी है एक्यूरेट है , यह सब ज्ञान बुद्धि में रख विनाश का अंतिम सीन साक्षी होकर के देखना है । इसलिए संपूर्ण ज्ञानी योगी बन अचल एडोल स्थिरियम बन अब साक्षी हो जावो। अब हमें पूरा आत्मा अभिमानी बन, नष्ट मोहा स्मृति लब्धा बन पास विथ ओनर बन आप के पास जाना है ।




