अबोहर, पंजाब। ब्रह्माकुमारीज़ संस्था की प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती (मम्मा) का 61वां पुण्य स्मृति दिवस स्थानीय राजयोग आश्रम में आध्यात्मिक ज्ञान दिवस के रूप में मनाया गया। केन्द्र प्रभारी पुष्पलता बहन ने कहा कि मम्मा सदा कहती थीं हर घड़ी अंतिम घड़ी है। इसलिए वह सदा अलर्ट, एक्यूरेट रहती थीं। बाबा का कहना और मम्मा का करना, यह विशेषता थी। कैसी भी परिस्थिति आई लेकिन मम्मा ने गंभीरता, धैर्यता के साथ सामना किया।
इस अवसर पर मुख्यतिथि नगर निगम के पूर्व मेयर विमल ठठई ने कहा कि जगदम्बा सरस्वती का जीवन बहुत ही सरल और महान था। वे नारी शक्ति की अदभुत मिसाल थी। 24 जून 1965 तक आपने ईश्वरीय विश्व विद्यालय की बागडोर बड़ी ही कुशलता के साथ निभाई। कम उम्र होने के बाद भी आपका गंभीर व्यक्तित्व और ज्ञान की गहराई से सभी अचंभित रह जाते थे।
मां जगदम्बा के शक्ति स्वरूप जीवन पर प्रकाश डालते हुए राजयोग शिक्षिका सुनीता बहन ने कहा कि वे सर्वगुण सम्पन्न थी। नारी के रूप में देवी का अवतार थी। मूल्य और व्यवहार उनके प्रत्येक कर्म से दिखते थे। लेखक परिषद के प्रधान राज सदोष ने कहा कि माउंट आबू में जगदम्बा सरस्वती ने संस्था की सेवाओं के संचालन में अदभुत सोच व कार्य क्षमता की मिसाल पैदा की थी। पिछले सात दशकों में ब्रह्माकुमारीज परिवार 140 देशों तक फैल गया है। यह उन्हीं के तेजस्वी जीवन का प्रताप है कि इतने बड़े परिवार की देखभाल लाखों बहनें और भाई बखूबी कर रहे हैं।
अमृतसर के परिवार से संबंधित जगदम्बा सरस्वती के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करने वालों में उप केन्द्र प्रभारी दर्शना बहन, शालू बहन, डा. कंचन खुराना, डा. संजय गुप्ता, डा. रितूू गुप्ता, रमेश शर्मा एडवोकेट, सेवानिवृत आयकर अधिकारी बलराम सिंगला आदि शामिल थे। उपस्थित भाईयों बहनों ने जगदम्बा सरस्वती के आदर्शों पर चलकर स्व: परिवर्तन से विश्व परिवर्तन का स्वप्न साकार करने का संकल्प लिया। सभी को मधुबन के संदेश का हवाला देते हुए कम ईंधन और आयातित सामान उपयोग करने की प्रेरणा दी गई।




