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बिजलपुर: अंतर्राष्ट्रीय बेटी दिवस “ के उपलक्ष्य पर शासकीय कन्याशाला उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, बिजलपुर इंदौर में कार्यक्रम का आयोजन किया गया

बिजलपुर,मध्य प्रदेश। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के मुख्य सेवाकेंद्र प्रेमनगर के उपसेवाकेंद्र बिजलपुर द्वारा, आजादी के अमृत महोत्सव से स्वर्णिम भारत की ओर परियोजना के अंतर्गत, “ अंतर्राष्ट्रीय बेटी दिवस “ के उपलक्ष्य पर शासकीय कन्याशाला उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, बिजलपुर इंदौर में कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमे कक्षा 6 वी से 12 वी के 450 कन्याओ ने भाग लिया | कार्यक्रम का विषय था “संस्कारो की धरोहर बेटियाँ | कार्यक्रम में मुख्य अतिथि उपस्थित थे –

  1. श्रीमती प्रीति पंथ (प्राचार्य, शासकीय कन्याशाला उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, बिजलपुर)
  2. भ्राता सुनील कु. चौधरी (उप-प्राचार्य, शासकीय कन्याशाला उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, बिजलपुर)
  3. बी. के. शशी दीदी जी (प्रभारी, मुख्य सेवाकेंद्र प्रेमनगर इंदौर पश्चिम क्षेत्र)
  4. बी.के. यश्वनी दीदी (इंदौर बिजलपुर उप सेवाकेंद्र प्रभारी )
  5. ब्र.कु. मनीषा बहन ( इंदौर बिजलपुर उप सेवाकेंद्र)

ब्र.कु. यश्वनी दीदी जी ने नैतिक मूल्यों पर प्रकाश डालते हुए छोटी कहानियों के माध्यम से विषय को स्पष्ट किया एवं राजयोग अनुभूति भी करवाई |

ब्र.कु. शशी दीदी जी ने अपने उद्बोधन में कहा की आज शासन द्वारा भी कई योजनाये एवं कानून बनाये गये है जिनके माध्यम से कन्याओ/बेटियों में जागरूकता आई है| अभी बेटी बचाओ,बेटी पढाओ का नारा, बेटियों के सशक्तिकरण में एक कदम है | उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य आदि के लिए भी कई कार्यक्रम चलाये जा रहे है | जिससे कुछ मात्र में सुधार भी हुआ है | जागरूकता लाने के लिए लगभग हर देश में बेटी दिवस मनाया जाता है | इस दिन भारतीयों को बेटियों को शिक्षा न करने, जन्म से पहले मरने, बेटियों को घरेलु हिंसा, दहेज़ और बलात्कार से बचाने के लिए जागरूक किया जाता है | बेटियाँ बोझ नहीं हैं परन्तु घर का श्रृंगार है |

भारत की संस्कृति प्राचीन काल से महान रही है, जिसमे जीवन के हर क्षेत्र में उच्च मानवीय मूल्यों का समावेश रहा है| भारतीय संस्कृति दैवी संस्कृति थी जहाँ कन्याओ-माताओ को उच्च गौरवशाली स्थान प्राप्त था | परन्तु जैसे जैसे समय बिता इन सांस्कृतिक मूल्यों में परिवर्तन हुए| समाज में अनेक रुठिया कुरीतिया, रीती रिवाज, साम्प्रदायिकता बढ़ने लगी और इस कुचक्र में नारी भी कगकग पराधीन हो गयी | लेकिन आज बदलते परिवेश में हम देख रहे है की नारी भी जागृत हुई है और उसने कई क्षेत्र में उंचाइयो को छुआ है | वह स्वयं शिक्षित है, गुणवान है समर्थ है, सशक्त है, आत्म सम्मान आत्म बल महसूस करती है तो वही संस्कार यह संतान में भी देती है |

आज बेटी दिवस पर विशेष दीदी ने देश की वर्तमान माननीय राष्ट्रपति जी का उदाहरण देते हुए कहा कि हमारी लगन, देश सेवा की भावना हमें भारत की महान विरासत की रक्षा के निमित्त बनती है| उसके लिए हरेक बेटी को शक्ति स्वरूपा बनना होगा – स्वयं सुसंस्कारित, सुयोग्य बनाना होगा |

सुखमय संसार की रचना में प्रभु का वरदान है बेटी, माँ बहन पत्नी के रूप, शक्ति की पहचान है बेटी, हर घर में पूजी जाती, ऐसी महान पावन है बेटी, भारत माता के गौरव की दास्तान है बेटी |

अंत में दीदीजी ने कहा की परमपिता शिव परमात्मा से अपना नाता जोड़े और स्वयं को शिव शक्तियाँ बनाये तो कभी किसी से भयभीत नहीं होगी, बेटियाँ वो लक्ष्मी, दुर्गा व सरस्वती का अवतार बन समाज के उत्थान में सहयोगी बने |

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