मुख पृष्ठकथा सरितामिजाज कुछ ऐसा हो

मिजाज कुछ ऐसा हो

श्याम बहुत ही शैतान और गुस्सैल लड़का था। किसी से सीधे मुंह बात नहीं करता था। उसके पिता को अक्सर उसकी ऐसी शिकायत सुनने को मिलती रहती थी। वह सब से बुरा बर्ताव करता था और बात-बात पर गुस्सा भी करता। दूसरों से लड़ाई और मार-पीट भी करता था।
इस तरह की शिकायतों से उसके पिता तंग आ चुके थे। एक दिन उन्होंने अपने लड़के को बुलाया और घर के आंगन में लगे नीम के पेड़ से उसे एक हरी और एक सुखी डाली तोड़ कर लाने को कहा, फिर दोनों डालियों को श्याम को दे दिया और बारी-बारी से तोडऩे को कहा। सुखी डाल तो उसने एक ही झटके में तोड़ दिया लेकिन हरी डाल मुड़ गई लेकिन टूटी नहीं।
श्याम के पिता उससे बोले, देखो बेटा, सुखी डाल कठोर थी और टूट गयी, लेकिन हरी डाल नरम थी और टूटी नहीं। इसी प्रकार जो लोग कठोर और गुस्सैल होते हैं, जिन में नरमी और धीरज नहीं होता है, वे बहुत ही जल्दी टूट जाते हैं। लेकिन जो लोग नरम होते हैं और गुस्सा कम करते हैं उन लोगों में परेशानियों का सामना करने की ताकत बहुत ही ज्य़ादा होती है। उस दिन के बाद श्याम सुधर गया और सब से मिलकर रहने लगा।

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